दिल्ली ही नहीं मुंबई का भी वही हाल..रेयान इंटनेशनल में पढ़ने वाली 5 साल की बच्ची की भयावह कहानी..मां ने किया बयां

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"उसने मुझे बताया कि वो वॉशरुम के लिए बाहर खड़ी आंटी को बताकर गई थी। जब वो बाहर निकल रही थी तो उसने पाया कि दरवाजा बाहर से लगा हुआ है।"

कुछ दिनों पहले रेयान इंटरनेशनल स्कूल गुरुग्राम में जो घटना घटी उसके बाद मुझे महसूस हुआ कि जिस तरह स्कूल चेन काम करते हैं वो वाकई बहुत गलत है। मेरी सबसे बड़ी बेटी ने पहले नवीं मुंबई रेयान इंटरनेशनल में ही 4 सालों तक पढ़ाई की लेकिन आखिरकार हमें उसे वहां से उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निकालना पड़ा। आज वो 10 साल की है और अपने एकेडमिक में भी बहुत ही अच्छा कर रही है, इतना ही नहीं वो सुरक्षित भी है और वो बहुत ही खुश भी है जैसे हर बच्चे को रहना चाहिए। 

मैं बताती हूं कि क्या हुआ था

मुझे सबसे ज्यादा समस्या स्कूल के किंडरगार्टेन स्टाफ से थी। मेरी बेटी ने वहां नर्सरी से 1 तक की पढ़ाई की। वहां के स्टाफ इतने प्रशिक्षित नहीं रहते हैं कि वो छोटे बच्चों को संभाल सकें। खासकर जो बच्चे पहली बार स्कूल जाना शुरू करते हैं। 

उनकी पॉलिसी में बच्चों को डराना भी शामिल था। पहली बार पैरेंट होने के नाते मैं इसके खिलाफ बोलती भी थी, मुझे लगा कि बच्चों को हैंडल करने का यह तरीका गलत है क्योंकि वो पहले ही डरे हुए हैं कि पैरेंट्स से अलग उन्हें अनजान जगह पर भेजा जा रहा है। लेकिन ज्यादातर पैरेंट्स चुप रहे और मेरी शिकायत का कोई असर नहीं हुआ। 

जब शुरूआती समस्याएं खत्म हुई तो और मुझे लगने लगा कि अब सब ठीक है। पहला साल भी अच्छा था लेकिन जैसे ही वो जूनियर केजी में गई मेरी बेटी ने मुझे बताया कि टीचर उसकी पिटाई करते हैं। पहले मुझे लगा कि उसे कोई गलतफहमी हुई है जो असल में ना समझना मेरी गलती थी। मैंने उससे कई बार बात की लेकिन उसका एक ही जवाब होता था कि टीचर उसपर हाथ उठाते हैं।

मैंने शिक्षक का सामना करने का फैसला किया

मैं उसे स्कूल से लाने गई थी,  वहां क्लासटीचर खुद बच्चों को पैरेंट्स तक पहुंचाने आते हैं। सभी पैरेंट्स के सामने मैंने टीचर से पूछा कि क्या हुआ था। उन्होंने इंकार कर दिया लेकिन मेरी साढ़े तीन साल की बेटी ने सबकुछ पूरे कॉन्फिडेंस के साथ बताया। 

src=https://www.theindusparent.com/wp content/uploads/2017/07/prevent bullying crying.jpg दिल्ली ही नहीं मुंबई का भी वही हाल..रेयान इंटनेशनल में पढ़ने वाली 5 साल की बच्ची की भयावह कहानी..मां ने किया बयां

टीचर की बातचीत और शारीरिक हावभाव तुरंत बदल गए और वो कुछ बोल नहीं पा रही थी। ये उस समय की बात है जब बच्चों पर हाथ उठाना स्कूल में बैन कर दिया गया था और शिक्षकों को बच्चों पर हाथ उठाने की अनुमति नहीं थी। 

मैंने टीचर से कहा कि मैं फिर आऊंगी। अगले दिन मैं प्रिंसिपल और क्साल टीचर के पास गई और उनकी आखों में आखें मिलाकर कहा कि ये कानून के खिलाफ है और अगली बार अगर मेरी बेटी ने ऐसा कुछ बताया तो मैं मीडिया के पास जाऊंगी। उन्होंने माफी मांगी और फिर बच्ची को मारने की घटना दुबारा नहीं हुई। 

दो साल.. दो समस्या

तीसरे साल सीनियर केजी में मेरी बेटी स्कूल जाने के लिए काफी एक्साइटेड रहती थी लेकिन एक दिन स्कूल से आने के बाद वो काफी शांत थी जबकि असल में वो काफी चंचल है। आते ही वो मुझे पूरे दिन क्या हुआ बताती थी लेकिन उस दिन वो शांत थी और मुझे लगा कि शायद उसे नींद आ रही होगी। 

वो घर आई और सो गई, सोकर उठने के बाद उसने एक शब्द नहीं कहा। एक शब्द भी नहीं। मेरे पति ने भी घर आते ही उससे बातें करने की कोशिश की लेकिन ऐसा लग रहा था कि कुछ हुआ है और वो बता नहीं पा रही है। अगले दिन मैंने जैसे ही उठाया और कहा कि उसे स्कूल जाने के लिए तैयार होना है वो डर के मारे चिल्लाने लगी। 

स्कूल बस शब्द का नाम सुनते ही वो रोने लगी। मुझे लगा कि उसे घर में रहना चाहिए। उसने फिर पूरे दिन और रात बात नहीं की। अगले दिन बालकनी से स्कूल बस देखकर वो फिर से रोने और चिल्लाने लगी। मैं पहले ही देख चुकी थी कि कहीं उसे चोट तो नहीं आई है जो कोई भी पैरेंट सबसे पहले करेगा।  
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लेकिन किसी तरह के चोट के निशान नहीं थे। कई दिनों तक हम उससे बात करने की कोशिश करते रहे लेकिन वो कुछ नहीं बोलती थी। वो बात ही नहीं करती थी। तब उसकी उम्र 4 साल भी नहीं थी। हम स्कूल गए लेकिन उन्होंने कहा कि स्कूल बस में कुछ भी नहीं हुआ है। लेकिन ये सच नहीं था क्योंकि ये स्कूल बस था जिसकी वजह से वो इतना अधिक डरी और सहमी हुई थी। 

हमें वो करना पड़ा जो कोई भी पैरेंट अपने बच्चे को नहीं करने देना चाहते। हमें साढ़े तीन साल की बच्ची को काउंसलिंग सेशन के लिए ले जाना पड़ता था। 

अगले तीन महीनों में मैं उसे अपनी गोद में स्कूल ले जाती थी क्लास तक पहुंचाती थी और बाहर इंतजार करती थी ताकि वो ना घबराए। मैंने तीन महीने तक लगातार धूप, बारिश कुछ भी हो लेकिन ये करना जारी रखा तब जाकर वो थोड़ा बहुत बोलने लगी।

इस दौरान हम उसे चाइल्ड काउंसलर और मनोवैज्ञानिक के पास लेकर गए जिन्होंने साफ कहा कि उसे गहरा आघात लगा है। एक साढ़े तीन साल की बच्ची जो बिल्कुल खुश थी और सुबह स्कूल बस से स्कूल जाने और वापस आने के दौरान क्या आघात पहुंच सकता था जिसकी वजह से वो इतनी शांत हो गई थी। स्कूल का कहना था कि उन्हें इस बारे में कुछ पता नहीं था और वो कोई मदद के लिए भी तैयार नहीं थे। अगर आपको लग रहा है कि बात खत्म हो गई तो आप ऐसा ना सोचें अभी और बहुत कुछ बाकी है।  

चौथा साल..क्लास I..वॉशरुम में बंद

मेरी बेटी घर आते ही रोने लगी। मैंने किसी तरह उसे शांत किया लेकिन वो लगातार रोए जा रही थी और उसके चेहरे आसुओं के निशान थे। आखिरकार उसने मुझे बताया कि वो वॉशरुम गई थी बाहर खड़ी आंटी को बताया भी था कि वो अंदर जा रही है लेकिन जब वो बाहर आने लगी तो उसे समझ आया कि दरवाजा बाहर से बंद था। 

वो काफी देर तक दरवाजा खटखटाते रही, रोतेचिल्लाते रही लेकिन कोई भी नहीं आया और ये सब स्कूल के समय के दौरान हुआ। दरवाजा लगातार खटखटाने की वजह से उसकी हाथें सूज गई थीं। उसने एक छड़ी में पोछे का कपड़ा बंधा देखा और मेरी साढ़े पांच साल की बेटी ने उस छड़ी को खिड़की से बाहर निकालकर बताने की कोशिश की, कि वो अंदर बंद है लेकिन किसी ने नहीं देखा।

काफी देर के बाद किसी ने उसे देखा और दरवाजा खोला। उसे क्लासरुम में ले जाया गया जहां वो लगातार रोए जा रही थी। शिक्षकों ने उसे शांत कराने की कोशिश की और आखिरकार स्कूल बस से वापस भेज दिया गया। 

ये सब स्कूल समय के बीच में हुआ और किसी को ये नहीं लगा कि इतनी देर से क्लास से एक बच्ची कहां गायब है। मैंने इसके बाद स्कूल जाकर बात भी की। मुझे पता है आप सभी सोच रहे होंगे कि हमने अपनी बच्ची को रेयान इंटरनेशनल स्कूल से क्यों नहीं निकाला। शुरुआती दिनों में मेरे पति को लगता था कि सभी स्कूल ऐसे ही चलाए जाते हैं और इसमें कुछ भी गलत नहीं था लेकिन आखिरी घटना के बाद मैंने उसे स्कूल से निकाल लिया। 

src=https://www.theindusparent.com/wp content/uploads/2017/09/gurugram student lead.jpg दिल्ली ही नहीं मुंबई का भी वही हाल..रेयान इंटनेशनल में पढ़ने वाली 5 साल की बच्ची की भयावह कहानी..मां ने किया बयां

7-year-old Pradyuman who was found murdered at Ryan Internationa School, Gurugram

मेरे दो और दोस्तों के बच्चे रेयान में पढ़ते थे लेकिन वो ऊंची कक्षाओं में थे और उनका अनुभव भी स्टाफ, बच्चों की सुरक्षा और केयर को लेकर काफी बुरा था। उन्होंने भी आखिरकार अपने बच्चों का दाखिला दूसरे स्कूलों में करवाया। 

मैं सिर्फ इतना कह सकती हूं कि अगर आपका बच्चा भी रेयान में जाता है तो सचेत रहें। अपने बच्चों की बात सुने और चौंकन्ना रहें। मैंने पहली बार ही अपनी बच्ची की बातों को गंभीरता से ना लेकर गलती कर दी। शुक्र है कि आज मेरे दोनों बच्चे जिस भी स्कूल में हैं काफी खुश हैं।