दादा-दादी हो या नाना-नानी... बंद करें Babysitter समझना

दादा-दादी हो या नाना-नानी... बंद करें Babysitter समझना

कामकाजी कपल्स के लिए बच्चे अपने पैरेंट्स पर छोड़ कर जाना आम बात है लेकिन मुझे नहीं लगता कि ये सही है

जब मैं वापस भारत लौटी और अपनी जिंदगी को यहां एडजस्ट करने लगी तो मैंने अपने बेटी के लिए डे केयर ढूंढना शुरू किया। इसके बाद मुझे बहुत अजीबोगरीब रिएक्शन मिले। लोग मुझे घूर कर देखने लगे कि मैं अपने सास-ससुर को बच्चे संभालने के लिए नहीं बुला रही थी।

मुझे पता है कि भारत में कामकाजी कपल्स के लिए बच्चे अपने पैरेंट्स पर छोड़ कर जाना आम बात है लेकिन मुझे नहीं लगता कि ये सही है। इसलिए मैंने अपनी बेटी के लिए डे केयर खोजना शुरू किया बजाय कि मैं अपने सास ससुर को बेबीसिट्टर बनाती।

1. पीछे पीछे दौड़ने की उम्र नहीं

आप इस बात से सहमत होंगी कि सास ससुर की उम्र ऐसी नहीं होती कि वो बच्चों के साथ पूरी चुस्ती के साथ दौ़ड़ सकें। उन्हें खुद कई शारीरिक समस्याओं से जूझना पड़ता है। कभी जोड़ों का दर्द तो कभी कुछ।  जिस दिन उनकी तबियत खराब होती है उस दिन का क्या। मेरा विश्वास कीजिए बच्चों के लिए बाई खोज देना भी इस समस्या का समाधान नहीं है। उन्हें तब भी मदद की जरुरत होगी। आपके सास ससुर को हमेशा उनके उपर नजर रखनी जो खुद ही बहुत कठिन काम है।

2. वो पहले ही काफी कुछ कर चुके हैं

मुझे याद है मेरी मां और पापा हमेशा हम भाई बहनों के पीछ रहते थे। वो यहां तक कि अपने जरुरी काम भी रोक देते थे खासकर जब हमारी परीक्षाएं होती थी। शायद ही कभी वो फिल्म या पार्टी के लिए जाते थे क्योंकि हमारी पढ़ाई से बढ़कर उनके लिए कुछ नहीं होता था।

क्या आपको नहीं लगता कि वो पहले ही काफी कुछ कर चुके हैं और अब उन्हें अपनी जिंदगी इंज्वॉय करने की जरुरत है। कल अगर आपके बच्चे अपने बच्चों के बेबीसिट्टर बनने बोलेंगे तो आपको कैसा लगेगा?

3. आपके बच्चे को कंपनी चाहिए

सबसे आसान तरीका अपने बच्चों को बिजी रखने का है टीवी। उन्हें आप अपने फेवरिट कार्टून देखने बोलें और जो भी आपके बच्चे की देखरेख करे उसे भी ब्रेक मिल जाएगा। क्या ये सही आइडिया नहीं है कि बच्चों को उनके उम्र के बच्चों के साथ खेलने के लिए छोड़ दिया जाए जिससे कि वो सोफे पर पड़े ना रहे बल्कि कुछ अच्छे काम करें।

डे केयर सेंटर के अलावा भी कई जगहों पर बच्चों को बिजी और एक्टिव रखने के लिए एक्टिविटी कराए जाते हैं। उनकी देखरेख स्टाफ मेंबर करते हैं जो सुपर एक्टिव बच्चों की केयर अच्छे से करते हैं।

4. वो असहज महसूस कर सकते हैं

अगर आप अक्सर बोलेंगी कि बच्चे ठीक से नहीं खा रहे, बहुत टीवी देखते हैं या दिन में ठीक से नहीं सोते तो शायद वो भी असहज महसूस करेंगे। कभी कभी वो बच्चों को हमेशा खुश रखते हैं उनकी गलतियों पर पर्दा डालते हैं जो हो सकता है आप ना बर्दाश्त कर पाएं।


क्या है उपाय

ये सही बात है कि बच्चों को मां बाप के साथ ग्रैंड पैरेंट्स का प्यार मिलना बहुत जरुरी है। सबसे अच्छा आइडिया है कि कुछ देर के लिए आप बच्चों को डे केयर में छोड़े फिर कुछ समय वो अपने दादा दादी या नाना नानी के साथ बिताएं। इससे आपके सास ससुर और बच्चे दोनों ही खुश रहेंगे।

यहां ये समझना जरुरी है कि अपने बच्चे की हर गलती के लिए आप अपने सास ससुर को जिम्मेदार ना मानें। अगर आप बच्चे को उनकी कंपनी में छोड़ रही हैं तो उनका आभार मानें। आखिरकार वो भी आपके बच्चे का भला ही चाहते हैं। 

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Source: theindusparent

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