तेज़-तर्रार दिमाग के लिए बच्चे को ज़रुर दें आईक्यू बढ़ाने वाले खिलौने

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जैसे-जैसे बच्चे की पसंद विकसित होती है घर में खिलौनों का जमावड़ा लगता जाता है । लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गुड्डे-गुड़ियों के अलावा उम्र के हर पड़ाव पर बच्चे की बेहतर मानसिक विकास के लिए आपको उपयोगी खिलौने देने चाहिए...।

छोटे बच्चों को खिलौने चाहिए होते हैं रंग-बिरंगे, कई तरह की आवाज़ों वाले या पहिये वाले इत्यादि अधिकांश बच्चों को गतिमान चीजें पसंद आती हैं । हलांकि खिलौने की च्वाइस भी उनके उम्र के आधार पर होती है ।

जैसे- 1-3 माह की अवस्था में उन्हें रंगीन और आवाज़ करने वाली चीजें भाती हैं । धीरे-धीरे जब शिशु बड़ा होता है और वस्तुओं को पकड़ने की कोशिश करने लगता है तब उसे बॉल या घूमने वाले खिलौने पसंद आने लगते हैं ।

जैसे-जैसे बच्चे की पसंद विकसित होती है घर में खिलौनों का जमावड़ा लगता जाता है । लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गुड्डे-गुड़ियों के अलावा उम्र के हर पड़ाव पर बच्चे की बेहतर मानसिक विकास के लिए आपको उपयोगी खिलौने देने चाहिए...।

पहले के समय में खिलौनो का बाज़ार उतना भी प्रचलित नहीं था । बच्चे मिट्टी, ईंट-पत्थर या पत्तियों से भी तरह-तरह के खेल खेलते थे । इलेक्ट्रिक खिलौने की जगह लकड़ी या मिट्टी के बने खिलौने मिलते थे ।

अब रिमोट कंट्रोल के इस नए ज़माने में हमारे बच्चों को भी एक बटन दबाने मात्र से बदलाव देखने की आदत हो गई है ।मिट्टी और कच्चे रंग से बने खिलौने उन्हें पसंद नहीं आ सकते और माता-पिता के तौर पर हम भी उन्हें मिट्टी से दूर रहने की सलाह अक्सर दे देते हैं ।

हममें से बहुत कम ही माता-पिता अपने बच्चे को देर तक बाहर रहने या धूल-मिट्टी में खेलने की अनुमति दे सकेंगे । यही कारण है कि आजकल तरह-तरह के खिलौने बनाए जा रहे हैं जिससे घर के अंदर रह रहा अकेला बच्चा बोर ना हो और वो अकेले ही गेम का आनंद ले सके साथ ही खेल-खेल में ही उनकी सूझ-बूझ और इंटेलिजेंसी भी बढ़ायी जा सके ।

जानिए बच्चों की विकास में मदद करने योग्य कब कौन से खिलौने दें

src=https://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2018/01/baby toys cropped.jpg तेज़ तर्रार दिमाग के लिए बच्चे को ज़रुर दें आईक्यू बढ़ाने वाले खिलौने

  • 1-3 माह तक के शिशु की सुनने की शक्ति ,आवाज़ में अंतर परखने, देखने और चेहरा पहचान करने की शक्ति को बढ़ावा देने की खातिर उनके लिए खिलौने मिलते हैं । हवा में झूलने वाला रंगीन रिबन हो या हिलने-डुलने वाला सॉफ्ट टॉय इसके अलावा रंग-बिरंगे बलून्स भी शिशु का ध्यान आकर्षित करते हुए उन्हें सही दिशा में आंखों को घुंमाने के लिए प्रेरित करते हैं ।
  • 6 माह की आयु तक जब वो पकड़ने में, खिसकने में महारत हासिल कर लेते हैं तब उनकी गतिविधियों को दिशा देने के लिए और उनकी होल्ड को मजबूत करने के लिए एवं दांत निकलने में मदद करने के लिए कई प्रकार के उपयोगी खिलौने दे सकती हैं ।
  • 6-12 माह के बीच आप शिशु को अलग-अलग आकार और बनावट वाले खिलौने दे सकती हैं । ताकि उसकी नज़रें शेप में होने वाले अंतर को पहचानने की कोशिश कर सके ।
  • रंग-बिरंगी बीड्स जिसे आपस में जोड़ने की कला सीखना आपके बड़े होते शिशु को उत्साहित कर सकता है ।
  • 1.5-2 साल तक के बच्चे को आप एल्फाबेटिकल टॉयज़ दे सकती हैं । बड़े आकार के लेटर्स उन्हें रोमांचित करने के लिए काफी हैं । इसके अलावा आप ब्लॉक्स भी लाकर दें उनके साथ खेलने से बच्चे में आत्मविश्वास और रचनात्मकता बढ़ती है ।
  • आजकल तरह-तरह के मोबाईल ऐप्स उपलब्ध हैं जो ऐनिमेशन के माध्यम से बच्चों में सीखने की लालसा जगा देते हैं । आप चाहें तो क्विज़ के माध्यम से अपने बच्चे को सही ज़बाब देने और सीखने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं ।
  • 1-2 साल की आयु के बच्चों को बॉडी पार्ट, सब्जी, फलों आदि की पहचान करवाने के बाद  1-2 दिन छोड़कर दोबारा उनसे पहचानने को कहें । गलती को सुधारें अच्छी याददाश्त बनाने के लिए यह ज़रुरी है । इसी प्रकार आप उन्हें किसी खिलौने को खोज कर लाने के लिए भी कह सकती हैं ।
  • पज़ल गेम्स बच्चों के दिमाग को तेज़ी से सोचने के लिए प्रेरित करते हैं इसलिए आप बड़े हो रहे बच्चे को पज़ल सॉल्व करने के लिए प्रोत्साहित करते रहें ।
  • बच्चे में कोई ना कोई हॉबी ज़रुर विकसित करें । इसके लिए आप चाहें तो उन्हें खिलौने वाले म्युज़िक इन्सट्रुमेंट्स या क्ले मॉडलिंग के लिए सामग्री, ड्रॉइंग शिट्स आदि ला कर दे सकते हैं ।  
  • छोटी उम्र से ही बच्चे को स्लेट, स्केच, चौक से खेलने दें । सादे पेपर पर पेंसिल से घिसने के लिए दें धीरे-धीरे वो अलग-अलग रंगों की पेंसिल का इस्तेमाल करते हुए रंगों को भी पहचानने लगेगा ।
  • 3 साल तक के बच्चों के लिए आप ऐसे खिलौने चुनें जिनके द्वारा वो कुछ बनाना सिख सकें । जैसे टुकड़ों को जोड़ कर ट्रेन बनाना आदि ।