डिलीवरी से पूर्व नवज़ात शिशु के बारे में इन बातों को जानना हर मां के लिए ज़रुरी...

आपकी कशमकश को दूर करते हुए हम आपको शिशु से जुड़ी जरुरी बातें बताते हैं...

प्रेगनेंसी के आखिरी पड़ाव में जैसे-जैसे आपकी ड्यु डेट करीब आने लगती है तो मानो हर पल यही डर लगा रहता है कि कहीं तुरंत ही लेबर पेन या वाटर ब्रोक जैसा कुछ ना हो जाए...पहले प्रसव को लेकर भय तो रहता ही है लेकिन कई तरह की आशंकाओं से भी हम घिरे होते हैं धड़कनें बढ़ी रहती हैं ये सोच कर कि अपने शिशु को देखने का वो पहला ऐहसास जाने कैसा होगा...। जी हां, मां बनने का अनुभव होता ही है इतना ख़ास कि हम चाह कर भी उन मासूम ख्यालों में खोने से ख़ुद को रोक नहीं पाते ।

ख़ैर ये सारी बातें तो आपके मन को प्रसन्न रखने के लिए आवश्यक भी है आख़िर पूरे नौ महीने के बाद इंतज़ार का आलम खत्म जो होने जा रहा है । लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है कि जन्म के बाद से ही नन्हे शिशु के शरीर में आपको तकरीबन रोज़ ही नये बदलाव देखने को मिलेंगे जिसके लिए आपको पहले से ही तैयार रहना होगा और सबसे बड़ी बात ये है कि आपको ये पता होना ही चाहिए कि कौन से बदलाव नार्मल हैं और कौन से नहीं ।

तो चलिए आपकी कशमकश को दूर करते हुए हम आपको शिशु से जुड़ी जरुरी बातें बताते हैं...

बर्थ मार्क- जन्म के साथ ही शिशु के शरीर के किसी हिस्से में दाग होना सामान्य है। ये मार्क धीरे-धीरे खुद ही समाप्त हो जाता है ।लहसन होना तो अधिकांश शिशुओं में देखा जाता है । जो जन्म के दो-तीन दिन बाद से साफ नज़र आने लगता है ।  

स्टिकी पॉटी- नवज़ात शिशु दिन में कई बार मल त्याग करते हैं जिसका पतला होना या रंग काला या काई जैसा होना नार्मल होता है ।  

अंडकोश/ जेनाइटल का बड़ा होना- बेबी बॉय के प्राईवेट पार्ट का फूला होना भी सामान्य है धीरे-धीरे वो अपने सामान्य स्थिति में आ जाता है । पहली बार मैंने जब अपने शिशु को इस तरह देखा था तो जानकारी के अभाव में मुझे बड़ी चिंता हुई थी । फिर मैं डॉक्टर की सलाह भी लेने गई वहां जाकर पता चला कि अंडकोश का बड़ा दिखना नार्मल है और वाकई समय के साथ ये समस्या खुद ही ठीक हो गई ।

वजन घटना- शुरुआती सप्ताहों में शिशु का वजन घटता रहता है जो एक सामान्य प्रक्रिया है । एक माह के बाद स्वस्थ शिशु वेट गेन करने लगेगा ।

निप्पल से दूध निकलना- लड़का हो या लड़की सभी शिशु के स्तन से शुरुआती महीनों में दूध निकलना कॉमन है । कई बार उसमें सिक्के जैसा कड़ा गांठ भी बन जाता है और वो हिस्सा बड़ा तथा लाल दिखाई देता है । आपको ये समझना होगा कि जिस हार्मोन के असर से आप में दूध बनना शुरु हुआ वही प्रभाव आपके गर्भ में पल रहे शिशु को भी हुआ है जो कि धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म हो जाएगा । यूं तो ये नैचुरल प्रोसेस है लेकिन कई घरों में शिशु के ब्रेस्ट को दबा-दबा कर दूध बहा दिया जाता है जिससे कई बार उनमें अधिक सूजन या ब्रेस्ट में इरिटेशन हो जाता है । गांठ बनने के कारण शिशु को बुखार भी हो सकता है ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ।  

योनि से डिस्चार्ज - बेबी गर्ल के प्राईवेट पार्ट से चिपचिपा, सफेद रिसाव होना भी सामान्य है । ये भी गर्भ में होने वाले हार्मोनल बदलाव के असर की वजह से ही होता है जो अपने आप ठीक हो जाऐगा ।इसे मुलायम कपड़े से सावधानी से साफ करते रहना चाहिए ।

नींद में मुस्कुराना - या रोने जैसा ऐक्सप्रेशन-सोने के दौरान ऐसा हर शिशु में कम से कम एक माह तक देखने को मिलता है।  

हर आधे घंटे में भूख लगना - नवज़ात शिशु जन्म के पहले-दूसरे दिन दूध के 2-3 छोटी चम्मच भी ले लें तो बहुत है इसलिए आप देखेंगे कि सो कर जागने के बाद शिशु भूख से रोने लगेगा इसलिए उन्हें बार-बार फीड कराना चाहिए ।

दिल की धड़कन तेज होना - सामान्य वयस्क की हर्ट बीट पर मिनट की दर से 70 से 90 तक होती है वही नवज़ात शिशु में ये लगभग 130 पर मिनट रहता है । इसके लिए घबराने की कोई बात नहीं क्योंकि रोने के दौरान या बुखार की अवस्था में शिशु की धड़कनें और भी बढ़ जाती हैं ।