डियर भारतीय बहुएं..प्लीज अपनी उम्मीदों और बातों को सही तरीके से रखना सीखें..

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शुरूआत से आप जो हैं वही रहें और याद रखें कि जैसे आप नए घर में जा रही हैं वैसे ही वो भी एक नए शख्स के साथ एडजस्ट कर रहे हैं जो उनके परिवार की अभिन्न अंग बन चुकी है।

इसके पहले कि आपको मुझ पर गुस्सा आए और मुझे उपदेशक समझें जो कुछ ज्यादा ही अच्छी बनने की कोशिश कर रही है तो मैं आपको बताना चाहूंगी कि एक भारतीय बहू होने के नाते मैं भी देसी बहुरानी की तरह रही हूं। मैंने भी अपनी शादीशुदा जिंदगी में कई बातें सीखी हैं जो आपके साथ शेयर करना चाहती हूं।

संक्षिप्त रूप में बोलें तो मैं ये कहना चाह रही हूं कि कैसे हम बहुएं कभी कभी खुद की ही गलत छवि अपने ससुराल वालों के सामने पेश करते हैं और इस वजह से वो हमसे कुछ अलग उम्मीदें रखने लगते हैं।

अगर इस चीज की अनदेखी की जाए और हम जैसे हैं वैसे ही रहें तो कई तनाव वैसे ही कम हो जाएंगे जिनसे हम अक्सर ससुराल में दो चार होते हैं।

*इसके पहले कि हम आगे बढ़ें, आपको बता दें कि हमारा इरादा किसी को दुख पहुंचाने का नहीं है। ये बस साधारण अवलोकन है और अगर आपका अपने ससुराल वालों के साथ अच्छा रिलेशन है तो हम भी आपकी सलाह और राज सुनना पसंद करेंगे!

1. पहनावा

शादी के बाद हर भारतीय बहू को जिस समस्या से गुजरना पड़ता है वो है कि क्या पहना जाए। जबतक आप साड़ी (या कुछ आधुनिक परिवारों में) सलवार सूट ना पहनें, आपको अपने ससुराल वालों से कुछ निगेटिव कमेंट ही सुनने को मिलेगा। भले कि आपकी ही उम्र की उनकी बेटी जीन्स, शॉर्ट्स पहने लेकिन आपके पहनने पर उन्हें बुरा लगेगा।

शादी के बाद अपने ससुराल जाते समय सूटकेस में सिर्फ साड़ी और भारी भरकंप भारतीय परिधानों की जगह वैसे कपड़े ले जाएं जो आप असल में पहनती हैं। कभी कभी कुछ खास मौकों पर जब परिवार वालों या परिवार के खास दोस्तों से मिलना हो तो देसी परिधान पहनें वरना हर तरह के कपड़े पहनें। अगर आप जीन्स टीशर्ट पहनना पसंद करती हैं तो इसे मेंहदी के रंग उतरने तक पहनना शुरू कर दें।

 
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2. अपनी पसंद को स्पष्ट रूप से बताएं

नई जगह में जाना और एडजस्ट करना कोई आसान काम नहीं होता है, इसके लिए कई बदलाव लाने पड़ते हैं। सबसे बड़ा बदलाव होता है आपके खानों की आदत और पसंद नापसंद में। हो सकता है शुरूआत में आप ससुराल वालों की पसंद नापसंद के हिसाब से खाएं लेकिन जल्द ही आप अपनी पसंद नापसंद भी स्पष्ट रूप से उन्हें बताएं।

आप खुद खाना बनाने की पहल करें और अपने ससुराल वालों को बताएं कि आप कुछ नए व्यंजन बनाना चाहती हैं। अगर उन्हें पसंद आया तो और भी अच्छी बात है।

अगर आपको और उनको दोनों को एक दूसरे की पसंद नहीं अच्छी लगे तो अपने लिए कुछ बना लें। हो सकता है शुरूआत में ये थोड़ा अजीब लगे और आपको कुछ नकारात्मक बातें भी सुनने को मिलें लेकिन धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा।

3. अपने व्यक्तित्व को बनाए रखें

भले आप नई शादीशुदा हैं और आपको घर का ख्याल रखना होता है, लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है आपकी सोशल लाइफ नहीं है। अगर आप शादी से पहले पार्टी गर्ल रह चुकी हैं या आपको दोस्तों से मिलना पसंद है तो शादी के बाद शुरूआत में आपको चीजें अलग लग सकती हैं। लगातार सोशल ग्रुप से अलग रहना और फिर एक्टिव होने से काफी उलझन पैदा हो सकती है।

 
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शुरूआत में कम से कम एक बार अपने दोस्तों से मिलें और परिवार को बताएं कि आप अपने दोस्तों से मिलने जा रही हैं ना कि काम करने, इसके लिए शर्मिंदा ना हों ताकि उन्हें पता हो कि भले ये काम नहीं है लेकिन बेहद जरूरी है। अपने दोस्तों को घर भी बुलाएं इससे आपके ससुराल वाले भी काफी सहज रहेंगे।

आप कुछ भी करें लेकिन मुख्य बात है कि आप अपनी असली छवि को पेश करें और अपने ससुराल वाले आपको वही समझें जो आप असलियत में हैं। जाहिर है शादी मतलब एडजस्ट करना, समझौता करना होता है, लेकिन आपको ससुराल वाले जो भी अपेक्षा रखें उसे पूरा करना और फिर इसे लेकर घुटन महसूस करने से सिर्फ तनाव होगा।

शुरूआत से आप जो हैं वही रहें और याद रखें कि जैसे आप नए घर में जा रही हैं वैसे ही वो भी एक नए शख्स के साथ एडजस्ट कर रहे हैं जो उनके परिवार की अभिन्न अंग बन चुकी है।

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