टीन एज बच्चे को सुनें और उनकी भावनाओं का सम्मान करना सीखें...आपसी दूरी बढ़ा सकती हैं मुश्किलें

जैसे ही आपके बच्चे प्राइमरी से बढ़कर सेकेंडरी स्तर पर पहुंचते हैं आपकी उनसे बात-चीत कम होती जाती है या यूं कहें कोई विशेष वजह बन ही नहीं पाती

आजकल माता-पिता की व्यस्तम जीवनशैली हर बच्चे के लिए आम बात है । जैसे ही आपके बच्चे प्राइमरी से बढ़कर सेकेंडरी स्तर पर पहुंचते हैं आपकी उनसे बात-चीत कम होती जाती है या यूं कहें कोई विशेष वजह बन ही नहीं पाती जिसके लिए अलग से समय निकाल कर उनके साथ परिचर्चा की जाए ।

भविष्य में जिसके कारण बच्चे और माता-पिता के बीच जो भावनात्मक संबंध होना चाहिए कहीं ना कहीं वो कमज़ोर होती चली जाती है । हो सकता है कि वो प्रतिस्पर्धा और पैसे के आगे रिश्तों का मूल्य नहीं समझने के कारण उम्र के किसी पड़ाव में आपसे भी दूरी बना लें ।

इस समस्या का दूसरा पहलू ये है कि आजकल पैरेंट्स भी बच्चों को परफेक्ट बनाने के चक्कर में उन्हें सभी रिश्ते-नाते से दूर एक रुटीन में बांध कर रखते हैं ।

पहले अपना काम पूरा करो,समय बर्बाद मत करो, किसी से बातें मत करो इत्यादि सीख हर बच्चे को दी जाती है । उनके दिमाग में हम उनके व्यक्तिगत तरक्की को तवज्जो देने की बात बिठा देते हैं जिसका ख़ामियाज़ा बाद में हम माता-पिता को भी भुगतना पड़ सकता है ।

दूसरी ओर, नए ज़माने के टेक सेवी बच्चे नई उमंगों एवं नई सोच वाली अपनी दुनिया में अपने हमउम्र दोस्तों से इतने घुल-मिल जाते हैं कि उन्हें माता-पिता का व्यवहारिक सवाल भी परेशान करता है या कई बार तो बच्चे माता-पिता की सोच के साथ उन्हें भी ‘आउटडेटेड’  मान बैठते हैं।

तकनीकी विकास और आधुनिकीकरण के इस युग में एक ओर जहां बदलते परिवेश का असर बच्चों की मानसिकता पर पड़ रहा है वहीं पैरेंट्स अपने टीनएज बच्चों या बढ़ते बच्चों को लेकर बहुत ही अधिक पोज़ेसिव होते जा रहे हैं ।

वो चाहते हैं कि उनके बच्चे नाप-तौल कर कदम बढ़ाएं जिससे गिरने का डर ही ना रहे, इसलिए छोटी उम्र से ही बच्चों के कंधे पर पैरेंट्स की उम्मीद उनके बस्ते से भी भारी बोझ बन जाती  है ।

क्यों ज़रुरी है टीन एज़ बच्चों के साथ वक्त बिताना

आपकी आकांक्षाओं को पूरा ना कर पाने की कसक या भय बच्चे की सोच में नकारात्मकता घोल देती है । आपके टीनएज बच्चे या प्री टीन अवस्था के बच्चे कई तरह के मानिसक, शारीरिक और भावनात्मक बदलाव के दौर से गुज़रते हैं ।

इस दौरान अगर उन्हें आपसे वो पर्सनल स्पेस नहीं मिला तो ज़ाहिर है कि वो बाहर ही अपनी दुनिया तलाशेंगे जिसका परिणाम अधिकांशत: बुरा ही होगा ।

इस तरह बच्चे आपसे दूरी बनाने लगते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं उनकी बातें सुनकर, या उनके दोस्तों के बारे में जानकर आपकी उम्मीदों को ठेस पहुंचेगी । उन्हें लगता है कि आप उन्हें सज़ा देंगी या अगली बार कम नम्बर लाने पर बुरी संगति को लेकर अधिक ताने देंगी।

बड़े बच्चों को अपनी ममता से बांधे रखना इसलिए जरुरी है ताकि जब उन्हें कोई निराशा हो, या जब उन्हें ये लगे कि उनके पास खुश होने का कोई रीज़न बांकि नहीं रहा...या कोई दोस्त नहीं रहा तब उस वक्त आपका चेहरा उनकी आखों के सामने आ जाना चाहिए जो उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकें ।

टीन एज़ बच्चे को सही दिशा कैसे दें

  • बड़े हो रहे बच्चों से पारिवारिक समस्याएं या हर अहम बात साझा करें । इससे उनमें परिपक्वता आएगी ।
  • बच्चे की उपेक्षा कतई ना करें ।
  • उनके और अपने बीच के जेनेरेशन गैप को भरने का प्रयास करें ।
  • एक दम से उन्हें किसी बात के लिए मना मत करें ।
  • मार-पीट या धमकी भरे लहज़े कभी ना अपनाएं ।
  • पढ़ाई के अलावा  भी उन्हें अच्छी हॉबी अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें ।
  • घर में उन्हें खुशगंवार माहौल दें ।
  • पॉकेट मनी बचाने या अपनी काबीलियत से कमाने के लिए प्रेरित करें इससे वो पैसे का मोल समझेंगे ।
  • बच्चे जैसे हैं या जो बनना चाहते हैं उन्हें उसी हाल में स्वीकार करें ।
  • उनकी प्रेम भावनाओं को भी सहज़ता से सुनें तथा सही दिशा दें ।