टीकाकरण असल में शिशु की किस तरह मदद करता है...पढ़ें

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अगर आपका शिशु छोटा है और आपको उसे टीका लगवाना होता है तो पहले आपके मन में कुछ आशंकाएं ज़रुर रहती होंगी

जन्म के बाद से लेकर शुरुआती कुछ सालों तक शिशु को कई सारे टीके लगवाने होते हैं । जिनमें से कुछ खुराक तो दवा पिलाने तक सीमित रहती है लेकिन कई टीके ऐसे हैं जिसमें सूई लगवानी पड़ती है । शिशु के शरीर में सूई की चुभन शिशु के साथ ही हर मां को बेचैन कर देती है लेकिन शिशु को कई प्रकार की बीमारियों से बचाने के लिए सभी टीके लगवाना अनिवार्य होता है ।

टीकाकरण शिशु के शरीर को संक्रमण से लड़ने की क्षमता विकसित करने में मदद करता है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली उसे विशेष बीमारी की चपेट में आने नहीं देती ।गर्भ में उसे मां से ही ऐंटीबॉडीज मिलती है और बाद में स्तन पान के माध्यम से भी वो एंटीबॉडीज ग्रहण कर पा रहा होता है । लेकिन धीरे-धीरे शिशु को खुद ही एंटीबॉडीज विकसित करने की आवश्यकता होती है ताकि वो बीमारियों से खुद का बचाव कर सके । शिशु को लगाए जाने वाले विभिन्न टीके शरीर को इसी कार्य के लिए प्रेरित करते हैं।

आपको मालूम हो कि जन्म के बाद हर सरकारी अस्पताल में शिशु के जन्म एवं टीकाकरण व उसके विकास से संबंधित एक विशेष कार्ड दिया जाता है जिस पर गौर करने से आप अपने शिशु के वजन, विकास दर आदि को भलीभांति समझ सकती हैं उसमें तो टीकाकरण तालिका भी शामिल है जहां से ये जान लेंगी कि कब कौन सा टीका लगवाना है ।

अगर आपका शिशु छोटा है और आपको उसे टीका लगवाना होता है तो पहले आपके मन में कुछ आशंकाएं ज़रुर रहती होंगी । जैसे- इसे लगवाने से कौन सी बीमारी नहीं होती या लगवाने के बाद क्या उसके रिएक्शन की भी संभावनाएं हैं, अगर समय पर ना लगवा सके तो क्या हो सकता है या फिर शिशु बीमार हो तो क्या टीका लगवाना सुरक्षित है...आदि इत्यादि । तो आईए इस लेख के माध्यम से हम आपकी सभी शंकाओं को दूर करने का प्रयास करते हैं ।

टीकाकरण के तीनों स्तर को समझें

src=https://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2018/01/six month old baby.jpg टीकाकरण असल में शिशु की किस तरह मदद करता है...पढ़ें

प्राथमिक टीका करण शिशु के जन्म के बाद से ही शुरु हो जाता है उसके बाद बूस्टर शुरु होता है जो दरअसल पूराने टीकों के असर को सपोर्ट करता है । समय के साथ जब शिशु के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में प्राथमिक टीकों का असर घटने लगता है तो बूस्टर खुराकें दी जाती है जिससे शरीर में एंटीबॉडिज को सही स्तर पर बरकरार रखने में मदद मिलती है ।

तीसरा है सार्वजनिक टीकाकरण जिसमें किसी विशेष रोग को जड़ से खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर सरकार द्वारा अभियान चलाया जाता है जैसे- पोलियो आदि ।

टीकाकरण के बाद ये सब होना सामान्य है

टीका लगवाने से शिशु को कोई नुकसान नहीं पहुंचता और ये उनके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए ज़रुरी कदम है । हालांकि कई बार टीकाकरण के बाद शिशु को तेज बुखार, या सूई लगने वाली जगह पर लाल निशान या सूजन जैसा हो सकता है ।

अमूमन सूई की जगह को मिलाने से मना किया जाता है और बर्फ से सिकाई की सलाह दी जाती है । तेज बुखार होने पर पैरासिटामोल सिरप शिशु को पिलाया जा सकता है । ये बुखार धीरे-धीरे अपने आप भी ठीक हो जाता है फिर भी अधिक परेशानी में दवा दे सकते हैं ।

आपको बता दें कि सामान्य रुप से बीमार अवस्था में भी टीकाकरण समय से करवाना चाहिए अगर परिस्थिति गंभीर रोग की हो तो विशेषज्ञ से सलाह लेने की आवश्यकता पड़ सकती है ।

सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों के तहत टीबी, टायफाइड, खसरा, काली खांसी, टिटनस, हेपेटाइटस बी, ए , रुबेला एवं कंठमाला आदि रोगों के लिए टीके लगवाए जाते हैं वैसे बाज़ार में टीके के कई अन्य विकल्प भी मौजूद हैं जो कि विभिन्न रोगों से बचाव के लिए लगवाए जा सकते हैं ।