“जिस दिन मैं अपनी सास की दोस्त बन गई...”

"हां, वो मेरी सास थीं, मेरी मां नहीं लेकिन वो हमेशा मेरे लिए रहीं जब मुझे उनकी जरूरत थी..."

तू सो जा, मैं सुला देती हूं छुटकी को जब मैंने ये धीमी आवाज पीछे से सुनी मैं अपनी एक महीने की बेटी को आधी रात में सुलाने की कोशिश कर रही थी।

ये मेरी सास की आवाज थी। वो मेरे साथ पूरी रात थीं । अपनी नींद को भी खराब करने के लिए तैयार ताकि मैं (उनकी बहु) पूरी नींद ले सकूं। ये उनका 25 वां दिन था जब मेरी बेटी के जन्म के बाद वो पूरी रात जागी हुई थीं। वो हमेशा दिन रात मेरे साथ रहीं ताकि वो किसी तरह मेरी जिंदगी आसान बना सकें।

उस रात को उन्होंने बेबी को मेरे हाथ से ले लिया और उसे लोरी सुनाने लगीं, पहली बार मैंने एक औरत को देखा जो मेरी जैसी थीं, जिन्हें मेरी चिंता थी। एक औरत जिनसे मुझे हमेशा समस्या थी, वो औरत जिनसे मुझे सावधान रहना सिखाया गया था जब से मेरी शादी हुई थी।

हां, वो मेरी सास थीं, मेरी मां नहीं लेकिन वो हमेशा मेरे लिए रहीं जब मुझे उनकी जरूरत थी। जिस समय मैं अपनी जिंदगी के अलग चरण में पहुचीं और मुझे लोगों के सर्पोट के जरूरत थी।

हम इस रूढ़ीवादी विचार के साथ बड़े होते हैं कि हमें अपना नजरिया कुछ चीजों को लेकर नहीं बदलना है।उस दिन मैंने सोचा कि हमलोग सास के प्रति गलत धारणा पहले दिन से क्यों बनाकर रखते हैं? क्यों हम वो जो भी करें उसका विरोध ही करते हैं? क्यों हम उनको लेकर या उनके साथ रिश्ते को लेकर अपना नजरिया नहीं बदल सकते ।

ये बातें मेरे दिमाग में आई, मैंने ठान लिया कि मैं खुद को होशियार और उन्हें गलत दिखाने के लिए कुछ चीजें मैं कभी नहीं करूंगी

1. पहले से कोई धारणा नहीं

 

मैंने सोच लिया कि मैं कभी भी उनको लेकर कभी आलोचनात्मक रवैया नहीं अपनाउंगी बल्कि कोई निर्णय लेने से पहले उनके साथ एक बैलेंस अप्रोच रखूंगी । जरूरी नहीं कि वो गलत हों, हो सकता है वो जो कह रही हों उसके पीछे अच्छी मंशा हो।

2. उन्हें दादी बनने से पोते-पोतियों का ख्याल रखने से नहीं रोकूंगी

 

हर मां अपने बेटे के बच्चों यानी कि पोते पोतियों का साथ समय बिताना चाहती है। एक मां के तौर पर मैं कभी उन्हें बेबी के साथ समय बिताने, खेलने देने, और प्यार करने से नहीं रोकूंगी।बतौर नई मां हम थोड़े जिद्दी हो जाते हैं और बेबी जो भी करता है उसपर खास नजर रखने लग जाते हैं।ये ना बेबी के लिए अच्छा है और ना आपके लिए।

4. अपने बेटे के साथ समय

 

हम जब भी अपनी सास और पति को साथ में देख लेते हैं तो सोचने लग जाते हैं कि कुछ तो खिचड़ी पक रही है लेकिन सच्चाई तो यही है कि वो आपसे में हंसी मजाक करते हैं, आखिर वो भी तो मां-बेटे हैं।

5. किचन में भी आजादी देनी चाहिए

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मेरी सास को पूरे परिवार के लिए खाना बनाना काफी पसंद है। पहले मैं इससे नाखुश थी कि उन्होंने मेरे किचन पर कब्जा कर लिया। लेकिन मैंने इसका भी उपाय निकाल लिया, वो जब अपने बेटे के लिए और परिवार के लिए जब भी बनाना चाहती हैं मैं उन्हें बनाने देती हूं। क्या हर मां ये नहीं करना चाहती? अगर इससे उन्हें खुशी मिलती है तो क्यों नहीं?

6. मैं अपनी मां की तरह उनका आदर करती हूं

मैंने कभी भी अपने सास के साथ किसी तरह की बद्तमीजी नहीं की और उस दिन मैंने कसम खा ली कि मैं उन्हें भी अपनी मां जितना ही इज्जत दूंगी। वो भी एक मां हैं और उन्हें इज्जत देने से कोई नुकसान नहीं होगा।

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Source: theindusparent