जिमनास्ट दीपा कर्माकर के बारे में 5 बातें जो आप नहीं जानते ।

जिमनास्ट दीपा कर्माकर के बारे में 5 बातें जो आप नहीं जानते ।

 

भारतीय महिलाएं क्या क्या नहीं कर रही हैं ! देखकर ऐसा कोई काम नहीं लगता जो वो न कर सकें । यही बात दीपा कर्माकर ने साबित की जब वो ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 22 साल की दीपा ने रियो दे जेनेरियो में आयोजित ओलिंपिक क्वालीफाइंग इवेंट में 52.698 पॉइंट्स हासिल कर के अपना ओलिंपिक का टिकट पक्का कर लिया ।

वो न सिर्फ ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई होने वाली पहली महिला हैं बल्कि वो 52 साल के बाद इस तरह के इवेंट को क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय जिमनास्ट भी हैं । ओलिंपिक में अब तक 11 पुरुष जिमनास्ट भाग ले चुके हैं जिनमे से 2, 1952 में 3, 1956 में और 6, 1964 में भाग लिया । ये हैं वो 5 बातें जो आप दीपा के बारे में नहीं जानते ।

#1 वो त्रिपुरा से हैं
दीपा उत्तर पूर्वी राज्य त्रिपुरा के छोटे से जगह से आती हैं और उनका पालन पोषण अगरतल्ला में हुआ। उन्होंने 6 साल के उनर से ही जिमनास्ट की प्रॅक्टिसिंग शुरू कर दी थी ।
# 2 दीपा ने जिमनास्ट की प्रैक्टिस flat feet होने के बावजूद की ।
बहुत लोगों को नहीं पता है की जब दीपा जब पहली बार जिमनास्ट के लिए enroll हुईं तो उनका पैर flat था। ये एक ऐसी चीज थी जो जिमनास्ट बनने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा थी, क्योंकि इससे जम्प करने के लिए वो स्प्रिंग इफ़ेक्ट नहीं मिल पाता है।  उनके कोच बिस्बेश्वर नंदी बताते हैं "दीपा में ये एक सबसे कठिन बात थी जो ठीक होनी बहुत जरूरी थी।  उसके छोटे होते हुए उसके पैरों को curve देने के लिए हमें कड़ी मशक्कत करनी पड़ी ।"

#3 दीपा कामनवेल्थ गेम्स में ब्रोंज मैडल लाने वाली भी पहली महिला जिमनास्ट थी । 
ग्लासगो में 2014 में हुए कामनवेल्थ गेम्स में भी ब्रोंज मैडल लाने वाली वो पहली महिला थी । इसके अलावा पिछले नवंबर में वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में फीचर होने वाली वो पहली भारतीय महिला भी रह चुकी हैं ।

#4 दीपा ने जिमनास्ट सिखने के लिए बंगला स्कूल में दाखिला लिया ।
आज के इस दौर में जहाँ लोग इंग्लिश में fluent होने के लिए क्या क्या नहीं करते, दीपा ने बंगला स्कूल में एडमिशन लिया ताकि बेरोकटोक वो अपनी जिमनास्ट की प्रैक्टिस कर सकें । उन्होंने ऐसे इसीलिए किया क्योंकि अगरतल्ला के इंग्लिश स्कूल में अटेंडेंस को लेकर बहुत सख्ती थी ।
"पेरेंट्स होने के नाते हम तय नहीं कर पा रहे थे की इंग्लिश स्कूल छोड़ना ठीक होगा या नहीं लेकिन वो बहुत ज़िद्दी थी । उसने फाइनली अपनी ग्रेजुएशन की और अब वो मास्टर्स कर रही है पोलिटिकल साइंस में इसीलिए पहले की बातें अब ज्यादा मैटर नहीं करतीं । " - दीपा के पिता दुलाल कर्माकर ने एक नेशनल डेली से बात करते हुए बताया । उनके पिता के मुताबिक ये सबसे बड़ी sacrifice थी जो दीपा ने जिमनास्ट बनने के लिए झेला ।
#5एक बार उन्होंने अपने जन्मदिन का केक नहीं काटा जब तक उनकी जिमनास्ट की प्रैक्टिस पूरी नहीं हो गयी । 
"9 साल की उम्र में उन्होंने बिना अपनी जिमनास्ट की परेक्टिस किये अपने जन्मदिन का केक काटने से मना कर दिया । इस मामले में वो बहुत पहले से ही मैच्योर हो गयी थी।  उसने अपने पिता से कहा की क्योंकि उनके पास खेलने के लिए और कोई स्पोर्ट्स था नहीं इसीलिए इस टाइम में वो इंग्लिश सिख लिया करेंगी । वो क्लास, स्कूल आदि किसी भी तरह का झंझट नहीं चाहती थी इसीलिए वो बंगला स्कूल में बहुत ज्यादा खुश थीं । दुनिया को भले लगता हो की उसमे इतनी मोटिवेशन आई कहाँ से लेकिन हमें इसके बारे में बहुत पहले से पता था । " -दीपा की बहन पूजा ।
आपको लड़कियों को खेलने के लिए क्यों प्रेरित करना चाहिए ?
दीपा एक और उदाहरण है की कैसे भारतीय महिलाएं खेल जगत में भी अपनी छाप छोड़ रही हैं । चाहे वो साइना नेहवाल हों, सानिया मिर्ज़ा हों, ज्वाला गुट्टा हों, मैरी कोम हों,गीता फोगट हों या फिर पी टी उषा । ज्यादा से ज्यादा महिलाएं खेल जगह में भारत का नाम रोशन कर रही हैं । एक और बात जो इन सभी महिलाओं में सामान्य है वो ये की इन सबने लाइफ में आने वाली सभी बाधाओं से जूझकर ही ये मुकाम पाया है ।
इसीलिए पेरेंट्स को चाहिए की वो बच्चों को म्हणत करने दें और उन्हें ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव को जीने की आदत डलवाएं । सब कुछ पका पकाया देने से वो लाइफ में कुछ नहीं कर पाएंगे ।पेरेंट्स के लिए जरूरी है की वो लड़कियों को स्पोर्ट्स में भाग लेने के लिए प्रेरित करें । इससे न सिर्फ वो स्वस्थ रहेंगे बल्कि इससे उनमे अनुशासन और लाइफ में कुछ कर गुजरने की तमन्ना जागृत होगी। क्या पता कल को आपको अपनी बेटी पर इसी तरह गर्व हो।
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