जानिए बच्चों के लिए हॉबी क्लासेज़ की अहमियत क्या है

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सबसे पहले तो अभिभावकों को ये समझना होगा कि पढ़ाई के अलावा भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिसमें बच्चे अपने हुनर से एक नया मुकाम हासिल कर सकते हैं और हो सकता है कि बड़ा होने पर यही बच्चा अपनी हॉबी को ही अपना करियर, अपना पैशन बना ले ।

एक दौर था जब स्कूल और होमवर्क के बीच की बोरियत को दूर करने के लिए बच्चे घर में ही धमाचौकड़ी मचाया करते या अपने भाई-बहनों के साथ मिल कर इनडोर गेम्स खेला करते थे । लेकिन अब इंटरनेट के ज़माने में अधिकांश बच्चे मोबाईल या वीडियो गेम्स खेलने में ही अपना पूरा खाली समय लगा देते हैं जो कि उनके व्यक्तित्व को गलत दिशा प्रदान कर रहा है । इसलिए बहुत छोटी उम्र से ही बच्चों में अच्छी हॉबी विकसित करने के लिए उन्हें प्रेरित करना चाहिए । जी हां पढ़ाई के साथ-साथ हर एक बच्चे में कोई ना कोई हॉबी ज़रुर होती है बस जरुरत होती है उसे परखने या निखारने की । हॉबी से हमारा तात्पर्य है ऐसी कोई भी ऐक्टिविटी या काम जिसे पूरा करने में आपके बच्चे का भरपूर मन लगे या जिस क्रियाकलाप का वो पूरा आनंद लें सकें ।

अगर अभी तक आपके बच्चे की हॉबी को लेकर आप उतने गंभीर नहीं हैं तो आपको अब हो जाना चाहिए क्योंकि बच्चों के व्यक्तित्व को आकार देने में इसका बड़ा योगदान होता है और साथ ही निकट भविष्य  में भी आपके बच्चे को इसके अनगिनत फायदे मिल सकते हैं ।

src=https://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2017/11/fingerpaint 1 1171665.jpg जानिए बच्चों के लिए हॉबी क्लासेज़ की अहमियत क्या है

बच्चों में कैसी हॉबी विकसित करें

शौक कई तरह के हो सकते हैं और हर बच्चे का इन्ट्रेस्ट भी अलग होता है । जैसे- सिंगिग, डॉंसिंग, पेंटिंग, पॉट्री, क्ले मॉडलिंग, लेखन जैसी कलात्मक चीजों के अलावा स्वीमिंग, क्रिकेट, फुटबॉल , शतरंज, या कोई अन्य खेल भी एक बच्चे की हॉबी लिस्ट में शुमार हो सकता है । कई बच्चों के शौक बेहद अलग और रोचक होते हैं जैसे अलग-अलग स्टाम्प्स या सिक्के जमा करना या ऐतिहासिक जगहों के बारे में जानना आदि ।

मैंने 8 साल की एक बच्ची से जब उसकी हॉबी के विषय में पूछा तो वो मुझे अपने स्कूल की कॉपी में महज़ पेंसिल और पेन से बनाई हुई कई खूबसूरत ज्वेलरी की डिजाइन दिखाई । जिसका काम वाकई काफी दिलचस्प और बारीक था । इस छुपे हुए शौक के साथ ही पढ़ाई में भी उसकी रुचि है और वो डॉक्टर बनना चाहती है लेकिन सोचिए जब बिना किसी ट्रेनिंग के ही वो इतनी सुंदर कलाकारी कर सकती है तो भविष्य में इसको करियर का रुप देना तो उसके लिए और भी आसान होगा । इस वाकये को उदाहरण के तौर पर पेश करने के पीछे मेरा एक ही मकसद है कि अभिभावकों को बच्चे के हिडन टैंलेंट की परख होनी चाहिए और उन्हें बच्चों को इस तरह के मौके भी देने चाहिए ताकि वो अपने हुनर को निखार सकें ।      

सबसे पहले तो अभिभावकों को ये समझना होगा कि पढ़ाई के अलावा भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिसमें बच्चे अपने हुनर से एक नया मुकाम हासिल कर सकते हैं और हो सकता है कि बड़ा होने पर यही बच्चा अपनी हॉबी को ही अपना करियर, अपना पैशन बना ले । इसलिए बचपन में ही इस बात का सही आंकलन करना अनिवार्य है कि आखिर बच्चे की रुचि किस क्षेत्र में सबसे अधिक है।

src=https://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2017/11/football 2853590 960 720.jpg जानिए बच्चों के लिए हॉबी क्लासेज़ की अहमियत क्या है

हर हॉबी की है अलग विशेषता

आने वाले दशकों में रुटीन काम काज़ की बजाए क्रेएटिविटी की मांग बढ़ने वाली है । इसलिए शौक चाहे कुछ भी हो पर उसे नए मुकाम तक ले जाने की लगन होनी चाहिए । डांसिंग, सिंगिंग या अभिनय या अन्य कोई भी परफार्मिंग आर्ट्स बच्चों के अंदर आत्मविश्वास जगाता है । नृत्य तो अपने आप में ही एक व्यायाम है और गायन किसी मेडिटेशन से कम नहीं । अगर आपके बच्चे को इसमें से किसी में भी रुचि हो तो आप उसे 3-5 वर्ष की उम्र से ही क्लास ज्वाइन करवा दें ख़ास कर के नृत्य तो इसी उम्र से सीखना चाहिए ताकि शरीर के लचीलेपन का भरपूर उपयोग किया जा सके ।

राईटिंग और पेंटिंग या , पॉट्री , क्ले मॉडलिंग एक अलग तरह की कला है जिसमें बच्चे की रचनात्मक शैली विकसित होती है । पेटिंग तो एक अद्भुत कला है जिससे बच्चों की ऐकाग्रता विकसित करने में मदद मिलती है ।

अगर बच्चे को फीजिकल ऐक्टिविटी पसंद हो तो आप उसे कई तरह के खेल-कूद सिखा सकते हैं । ऐथिलेटिक्स में शामिल कई आउट डोर खेल की क्लासेज चलती हैं जिसमें आप उसे भेज सकते हैं ।

सर्दी की छुट्टी हो या गर्मी की, या फिर स्कूल के बाद का लीज़र टाईम हॉबी की क्लास करने से बच्चे अपना खाली समय सही तरीके से व्यतीत कर पाते हैं साथ ही उनका मन भी प्रसन्न रहता है । ऐसा माना जाता है कि हॉबी को गंभीरता से लेने वाले बच्चे अधिक अनुशासित और आत्मविश्वास वाले होते हैं।

आख़िरी में मैं अपने पाठकों से यही अनुरोध करना चाहुंगी कि वो एक अभिभावक के तौर पर बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए उनके शौक पर भी ध्यान केंद्रित करें । उन्हें समय की पाबंदी की सीख दें तथा उन्हें शाबाशी देते हुए रोज़ कुछ नया सीखने को प्रेरित करते रहें ।