जानिए क्यों मैंने अपने बेटे का अन्नप्राशन समारोह धूमधाम से नहीं मनाया

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परिवार चाहता था कि मेरे बेटे का अन्नप्राशन समारोह धूमधाम से हो और वो सभी रिश्तेदारों को निमंत्रण देना चाहते हैं, लेकिन मैंने ऐसा नहीं करने का फैसला किया।

मैं तीन खूबसूरत बच्चों की मां हूं। मेरा सबसे छोटा बेटा अभी 5 महीने का है। जैसा कि सभी भारतीय परिवारों में बच्चों का अन्नप्राशन धूमधाम से मनाने की बात चलती है मेरा परिवार भी चाहता है कि है कि अन्नप्राशन का समारोह ग्रैंड तरीके से मनाया जाए लेकिन मैंने ऐसा नहीं करने का फैसला लिया।

मैंने फैसला किया मैं कोई बड़ा फंक्शन नहीं करूंगी। हां इस वजह से मेरे परिवार में काफी विवाद भी हो रहा है लेकिन मैं अन्नप्राशन मनाने के खिलाफ हूं इसके पीछे भी एक कारण है।

क्यों मैंने नहीं मनाने का लिया फैसला

मैं इस फंक्शन को नहीं सेलिब्रेट कर रही हूं इसके पीछे का कारण काफी इमोशनल है। चलिए मैं आपको समझाने की कोशिश करती हूं। मेरी दो बेटियां हैं जो 6 और 4 साल की हैं।

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A baby’s initiation to solids is a marked change in his life and hence, celebrated in the annaprashan

जब उनके अन्नप्राशन का समय आया था तो मेरे ससुराल वालों ने मुझे सूचना दी थी कि फंक्शन बहुत ही निम्न स्तर पर रखा जाएगा क्योंकि लड़कियों से जुड़ा कोई फंक्शन ग्रैंड तरीके से नहीं मनाया जाता है।

इसलिए हमारे यहां दोनें बेटियों के लिए बहुत ही छोटी सी पूजा रखी गई थी। जब तक मेरा बेटा नहीं हुआ था तब तक मैं इसके बारे मे अधिक नहीं सोचती थी।

इस बार चीजें अलग थी   

जब मेरा बेटा सिर्फ दो महीने का था तभी से मेरी सास, बेटे के अन्नप्राशन संस्कार को धूमधाम से करने की बातें करती थी। मैं काफी शॉक्ड थी क्योंकि मेरी बेटियों के समय ऐसी बातें नहीं होती थी। पिछले एक महीने में लगातार कार्ड छपवाने, हलवाई को फोन करने और मिठाई बनवाने की बातें होती रही।

घर में सभी रिश्तेदारों को बुलाया जा रहा था जैसे किसी की शादी होने वाली है। ये सब देखकर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी बेटियों के साथ गलत हो रहा हो। अगर ये फंक्शन इतने बड़े स्तर पर होता है तो ये नियम मेरी बेटियों पर नहीं लागू किया गया? उनके अन्नप्राशन के समय क्यों बड़ा फंक्शन करने की जगह छोटी सी पूजा की गई? जब वो बड़ी होंगी तो क्या इन सब बातों का जवाब दे पाऊंगी?

सेलिब्रेशन के नाम पर हम लड़के और लड़कियों के साथ भेदभाव कर रहे हैं। इसलिए मैंने फैसला किया ग्रैंड सेलिब्रेशन नहीं किया जाएगा। मैंने फैसला किया कि मेरी बेटियों की तरह ही बेटे के लिए भी छोटी सी पूजा रखी जाएगी।

क्या मैं नियम के खिलाफ जा रही हूं?

मेरे ससुराल वाले मुझसे नाराज हैं और उन्हें लगता है कि मैं उनके विश्वास को चुनौती दे रही हूं। मैंने अपने पति को समझाने की कोशिश की और इस बात पर राजी भी हैं लेकिन उन्हें धूमधाम से फंक्शन मनाने में कोई आपत्ती नहीं है क्योंकि इससे पैरेंट्स को खुशी मिलेगी।

लेकिन मेरे लिए इसका अर्थ है अपनी बेटियों के लिए ना खड़ा होना। मैं ऐसा कुछ नहीं करना चाहती जो मेरी बेटियों के साथ गलत हो। ग्रैंड सेलिब्रेशन ही सिर्फ तरीका नहीं है जताने का मैं उनसे कितना प्यार करती हूं इसलिए मैं सब के लिए नियम एक जैसा रखना चाहती हूं।

मुझे लगता है कि अगर मैं घर में सही उदाहरण दूंगी तभी मेरी बेटियां कॉन्फिडेंट बनेंगी और मेरा बेटा भी समझेगा कि सबसे बड़ी ताकत ये समझना है कि चाहे लड़का हो या लड़की सभी बराबर होते हैं।मम्मियां मैं जानना चाहूंगी कि आप क्या सोचती हैं?