जानिए क्या बनाता है आपके बच्चे के स्वभाव को आक्रामक

बड़े हो रहे बच्चों की मां बनने से ज्यादा उनके दोस्त बनें उनकी पसंदीदा शिक्षिका बनने की कोशिश करें ताकि वो आपसे अपनी कमी और उसके चंचल मन में चल रहे हर एक बात साझा कर सके और आप समय रहते उसे कुठाओं, आशंकाओं से बचा सकें।

प्रतिस्पर्धा और भाग-दौड़ भरी इस जिंदगी में अपने बच्चों को व्यवहार कुशल बनाना हर माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। बच्चों के स्वभाव में उनके आसपास के परिवेश और आपकी परवरिश की झलक ही देखने को मिलती है।

अधिकांश बच्चे वही सीखते हैं जो वो बचपन से देख रहे होते हैं। इसलिए परेन्ट्स होने के नाते आपको उनके सामने एक अच्छा उदाहरण सेट करने की जरुरत है। छोटी उम्र में जो बच्चे जिद्दी होते हैं वही आगे चलकर अपनी जिद्द पूरी ना होने पर आक्रामक हो सकते हैं।

स्कूल के टीचर का बच्चे के साथ बुरा बर्ताव भी उसका स्वभाव गुस्सैल बनाता है। अक्सर हमें ऐसा बर्ताव देखने को मिलता है जब बच्चे की गलती पर मां या पिता उसके दोस्तों या रिश्तेदारों के सामने ही उसे सज़ा देने लगते हैं ऐसा करने से बच्चे शर्मसार होते हैं और उनमें आत्मविश्वास नहीं रह जाता।

बेहतर परवरिश के 12 नुस्खे….

  • कम से कम 1 घंटे का समय सिर्फ बच्चे के लिए निकालें
  • मां के अलावा उसकी टीचर बनने की कोशिश करें
  • बच्चों की काबिलियत को अपने सोशल इमेज ना बनाएं
  • पड़ोस या रिश्तेदार के बच्चों से उसकी तुलना ना करें
  • समय की पाबंदी का पाठ पढ़ाएं
  • हमेशा उससे प्यार से बातें करें
  • खुद के गुस्से पर काबू करना सीखें
  • बात-बात पर उस पर चीखना-चिल्लाना छोड़ दें
  • गलती की अनदेखी ना करें
  • उसकी अनुचित जिद्द पूरी करने से बचें
  • बच्चे को पूरा अटेंशन दें
  • उसकी बातों को ध्यान से सुनें फिर उसको सही-गलत दिखाने का प्रयास करें 

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जाने अनजाने में शिशु के पैदा होने के साथ ही आजकल पैरेन्ट्स कितनी सारी उम्मीदें लगा लेते हैं उदाहरण के तौर पर क्यूटेस्ट बेबी कॉन्टेस्ट के लिए पैरेंट्स की दीवानगी को ही ले लीजिए। हो सकता है कि आपमें से कुछ मेरी इस बात से सहमत ना हों लेकिन नन्हे से शिशु के रुप या बनावट को लेकर इतनी प्रतिस्पर्धा कहां तक उचित है! मैं एक संवेदनशील मां होने के नाते आपसे बस इतना ही कहना चाहुंगी कि  हर शिशु अनमोल होता है इसलिए अगर आपके आंखों का तारा इस तरह के किसी प्लैटफार्म पर अपना बेस्ट नहीं दिख सका हो…उसकी प्यारी सी मुस्कान सबसे ज्यादा लाइक्स बटोरने में असफल रही हो और सबसे प्यारा बच्चा होने का खिताब किसी और के नाम हो गया हो तो आपको ज़रा सा भी अफसोस नहीं होना चाहिए।

शिशुओं के अलावा स्कूल जाने वाले बच्चों का जिक्र करें तो उन्हें भी पढाई, परीक्षा, खेल-कूद, हॉबी क्लासेज़ सभी में अव्वल आने से लेकर कई तरह के मानसिक तनाव का शिकार होना पड़ता है। इस तरह जब ये माता पिता के सपनों को साकार करने मॆं असमर्थ साबित होते हैं तो उनकी भी मानसिक शांति भंग हो जाती है। उनमें हीन भावना, ईर्ष्या की भावना पनपने लगती हैं ऐसे में उनके स्वभाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना लाज़िमी है।

हालांकि कई बार बच्चों को ये महसूस होने लगता है कि उन्हें कम प्यार मिल रहा है और उनके छोटे भाईयों या बहनों को घर के सदस्य अधिक लाड़-प्यार दे रहे हैं। ऐसे में बच्चा पैरेंट्स का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए आक्रामक हो जाते हैं या अपने सिबलिंग्स से झगड़ा, मार-पीट करने लगते हैं। बच्चों में अच्छे संस्कार का विकास करने के लिए 6 वर्ष की उम्र से ही आप उन्हें पैसे की अहमियत और समय के साथ चलना सिखाएं। पैसों की बचत एक अच्छी आदत है इसलिए छोटी उम्र में ही आप उसे ये सिखाकर जिम्मेदार बना पाऐंगी।

मैं अपने आसपास के 10-12 वर्ष के बच्चों से जब मिलती हूं तो कई प्रकार से उनके मन को टटोलने का प्रयास करती हूं और उनसे बात करने के दौरान कई ऐसी बातें जानकर बड़ी हैरानी होती है। आजकल बच्चों का दिमाग संकुचित नहीं रह गया है टीवी, मोबाईल, इंटरनेट के माध्यम से वो हर एक चीज से वाकिफ होने लगे हैं और सबसे बड़ी बात ये है कि उनमें पर्सनल स्पेस पाने की चाहत इस उम्र से ही बढ़ रही है। दोस्तों की बुरी आदतें धीरे-धीरे इनमें भी घर कर सकती हैं इसलिए बड़े होते बच्चों का खास ख्याल रखें। नई चीजें आज़माने के लिए या कभी दोस्तों की चुनौती स्वीकार करते हुए इनमें गलत चीजों के सेवन की आदत भी लग सकती है। इसलिए अच्छे दोस्त चुनने की सलाह बच्चों को हमेशा दें।

बच्चे अकेले में मोबाईल पर क्या देख रहे हैं इसकी पूरी निगरानी रखें कई बार वो उत्सुकता वश गलती कर बैठते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों पर उनके सहपाठियों के संस्कार एवं परवरिश का बहुत प्रभाव पड़ता है।

आखिरी में मैं इतना ही कहना चाहुंगी कि बड़े हो रहे बच्चों की मां बनने से ज्यादा उनके दोस्त बनें उनकी पसंदीदा शिक्षिका बनने की कोशिश करें ताकि वो आपसे अपनी कमी और उसके चंचल मन में चल रहे हर एक बात साझा कर सके और आप समय रहते उसे कुठाओं, आशंकाओं से बचा सकें।