जानिए ऋषि कपूर की जुबानी..क्यों एक पिता के तौर पर हुए नाकाम

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"मैं रणबीर के बचपन में काफी व्यस्त रहता था इसलिए वो नीतू के ज्यादा करीब चला गया। शायद उसे महसूस हुआ कि उसे पिता की जरूरत थी लेकिन आई एम सॉरी मैं फेल हो गया"

यह हमेशा बहस का मुद्दा रहता है कि हमें बच्चों का दोस्त बनकर रहना चाहिए या पैरेंट? कई नए पैरेंट्स मानेंगे कि बच्चों का दोस्त बनकर रहने से वो आसानी से आपके सामने खुल जाते हैं और हर तरह की बातें शेयर करते हैं, वहीं पुराने जमाने के पैरेंट्स आज भी सोचते हैं कि पैरेंट्स को थोड़ी कड़ाई के साथ पेश आना चाहिए।

ऐसा लगता है कि एक्टर ऋषि कपूर भी उन पैरेंट्स के कल्ब में आते हैं जो मानते हैं कि बच्चों के साथ कड़ाई से पेश आना चाहिए। अपनी किताब खुल्लम खुल्ला की लॉन्चिंग पर उन्होंने अपने बेटे के साथ रिश्ते पर बात की।

जब रणबीर छोटा था मैं बहुत व्यस्त रहता था

ऋषि कपूर ने कहा कि जब रणबीर कपूर छोटे थे तो वो बहुत व्यस्त रहते थे। उनके पास रणबीर के लिए समय नहीं था। ऋषि कपूर का खुद भी अपने पिता राज कपूर से दोस्ती भरा रिश्ता नहीं था इसलिए उन्होंने यही अपने बेटे पर भी लागू किया।

उन्होंने बातचीत के दौरान बताया कि “मैं रणबीर के बचपन में काफी व्यस्त रहता था इसलिए वो नीतू के ज्यादा करीब चला गया। शायद उसे महसूस हुआ कि उसे पिता की जरूरत थी लेकिन आई एम सॉरी मैं फेल हो गया..मैं उसके साथ नहीं था।मैं अपने बेटे का दोस्त नहीं हो सकता। मैं इस तरह से अपने पिता के साथ भी नहीं रहा इसलिए आपको मानना पड़ेगा कि मैं ऐसा क्यूं हूं।“

ऋषि कपूर ने कुछ उदाहरण भी दिए कि कैसे वो कुछ चीजें अपने पिता के साथ नहीं कर सकते थे।

“मैंने कभी अपने पिता से बहस नहीं किया और बदकिस्मती से यही रिश्ता रणबीर के साथ भी कायम हो गया। मैं वाकई चाहता हूं कि मेरे और रणबीर के बीच प्यार और सम्मान दोनों हो लेकिन एक दूरी है कि मैं उसे देख सकता हूं लेकिन महसूस नहीं कर सकता।मैं वैसा पिता नहीं हूं जो बैठ कर उसकी गर्लफ्रेंड के बारे में बात करूं। लेकिन मैं ऐसा ही हूं। हम दोनों के बीच शीशे की दीवार है। एक दूसरे को देख सकते हैं महसूस नहीं कर सकते।“

ऋषि कपूर ये भी मानते हैं कि एक पैरेंट के तौर पर वो नाकाम हुए लेकिन वो कुछ नहीं कर सकते क्योंकि वो ऐसा करना चाहते थे।

उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि “मैं जानता हूं कि मैं गलत हूं। रणबीर का अपना अलग प्वाइंट है और मेरा अपना। जब उसके बच्चे होंगे तो वो मेरे जैसा पिता नहीं बनेगा इसे पीढी का अंतर कहिए या जो भी। मैं ऐसा हूं और मैं अपने बेटे का दोस्त नहीं बन सकता। आपको मानना पड़ेगा कि इसलिए मैं ऋषि कपूर हूं।“

रणबीर कपूर ने अपने पिता के साथ की इस दूरी पर बात की। “मैं अपनी मां के ज्यादा क्लोज हूं। मुझे लगता है कि डैड ने मेरे साथ अपना रिश्ता ठीक वैसा ही रखा जैसा उनका उनके पिता के साथ था। ये सच है कि हम दोनों में एक लाइन है जिसे मैंने कभी नहीं पार किया। लेकिन हमारे बीच कोई खालीपन नहीं है। मैं सोचता हूं कि काश हमारा रिश्ता भी फ्रेंडली होता और हम साथ ज्यादा वक्त बिता पाते।“

सात ही उन्होंने ये भी कहा कि वो अपने पिता से ज्यादा अच्छे पिता बनने की कोशिश करेंगे।

उन्होंने ये भी कहा कि “कभी कभी लगता है कि मैं उन्हें कॉल करूं और बात करूं कि वो कैसे हैं लेकिन हमारे बीच ऐसा नहीं है। हमारे बीच फोन रिलेशनशिप नहीं है। जब मेरी शादी होगी और बच्चे होंगे तो इस चीज को मैं बदलूंगा। मैं अपने बच्चों के साथ फॉर्मल रिश्ता नहीं रखूंगा जैसा मेरे और डैड का है। मैं फ्रेंडली रहना चाहता हूं, ज्यादा जुड़ा हुआ, उनके साथ ज्यादा समय बिता सकूं।“

क्यों पिता की बॉन्डिंग बच्चों से अधिक होनी चाहिए

एक पिता और बेटे का रिश्ता काफी संवेदनशील होता है और रिर्सच यहीं कहते हैं कि पिता के मूड का असर बच्चों की साइकोलॉजी पर पड़ता है।

Michigan State University study के अनुसार बच्चों का दिमागी और व्यवहारिक विकास हमेशा पिता के मूड से जुड़ा हुआ होता है।

प्राइमरी इन्वेस्टिगेटर और प्राइमरी रिर्सच प्रोजेक्ट के एसोसिएट प्रोफेसर Claire Callotton के अनुसार पिता का बच्चों पर सीधा असर नहीं पड़ता है। लेकिन यहां दिखता है कि पिता का बच्चों पर सीधा असर पड़ता है।

इस स्टडी में कहा गया है कि परवरिश से जुड़ा तनाव उनके बच्चों की भाषा के विकास में अड़चन होती है खासकर 2 से 3 साल के बीच। इसका असर अलग अलग लिंग पर अलग होता है जैसे पिता का असर लडकों की भाषा पर अधिक पड़ती है लड़कियों के मुकाबले।

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Source: theindusparent