जब मेरी 6 साल की बेटी ने पूछा भयानक सवाल... “मम्मा लड़कों के penis क्यों होता हैं?”

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कहने की जरूरत नहीं है कि मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी!

मम्मा लड़कों के पेनिस क्यों होते हैं”? पिछले सप्ताह मैं अपनी बेटी को स्कूल जाने के लिए तैयार कर रही थीं और वो मुझसे यह सवाल पूछ बैठी। इसके बाद उसने एक और सवाल पूछ डाला कि आप लड़कियों के प्राइवेट पार्ट को क्या कहती हैं?”

जाहिर है मुझे बिल्कुल भी ऐसे सवालों की उम्मीद नहीं थी, मुझे नहीं पता था कि मुझे उससे क्या कहना चाहिए। मैंने प्यार से पूछा कि क्या स्कूल में किसी ने उससे ये सवाल पूछा।

उसने मुझे बताना शुरू किया कि उसे समझ नहीं आता कि क्यों लड़कियां और लड़के अलग टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं? लड़के खड़े होकर टॉयलेट क्यों करते हैं? इसके बाद उसने बताया कि उसने मानव अंगो के बारे में लाइब्रेरी में एक किताब पढ़ी।

इसके पहले की मैं मुद्दे पर आऊं, मैं आपको बता दूं कि मेरी 6 साल की बेटी को पढ़ना बहुत पसंद है और वो कुछ भी पढ़ सकती है। यहां तक कि अगर किताब बिन तस्वीरों के हो तो भी। मेरे कहने का मतलब है कि 6 साल की उम्र की बच्ची के लिए ये बड़ी बात है।  

लड़कियों के प्राइवेट पार्ट को वेजाइना कहते हैं 
src=https://www.theindusparent.com/wp content/uploads/2017/08/mother and baby girl.jpg जब मेरी 6 साल की बेटी ने पूछा भयानक सवाल... “मम्मा लड़कों के penis क्यों होता हैं?”

उसके बेहद सीरियस लहजे को देखकर मैं समझ गई थी कि उसके लिए यह बेहद महत्वपूर्ण विषय है और इसे काफी परिपक्वता के साथ हैंडल करना चाहिए। इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं उसे महिला और पुरूषों के जननांगो के बारे में बताने के लिए किसी तरह के फनी नामों का इस्तेमाल नहीं करूंगी क्योंकि इससे उन्हें कन्फ्यूजन होगा।

इसलिए मैंने उससे कहा कि लड़कों के पेनिस होते हैं क्योंकि भगवान ने उन्हें ऐसे ही बनाया है।

तुरंत वो मुझसे पूछ बैठी कि तो आप लड़कियों के प्राइवेट पार्ट्स को क्या बोलती हैं?” मैंने उसे बताया कि इसे वेजाइना कहते हैं लेकिन उसे छूने की अनुमति किसी को भी नहीं है फिर चाहे वो लड़का या लड़की हो।

किसी तरह मैंने सवालों की झड़ी को रोका और मुझे समझ आया कि वो मेरे जवाबों से संतुष्ट थी। हो सकता है कई मम्मियां इस दृष्टिकोण से सहमत नहीं हों लेकिन इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

ध्यान देने योग्य बातें..

निजी रूप से मेरा मानना है कि अगर बात पुरूष या महिला जननांगो की हों तो इसे कभी गलत या शर्मिंदगी के तौर पर नहीं लेना चाहिए। वो भी सिर्फ इसलिए कि इससे गलत संदेश जाएगा और उन्हें भी एहसास होगा कि ये काफी शर्माने सकुचाने वाली बात है। यहां हम आपको कुछ ध्यान देने योग्य बातें बता रहे हैं।

  • उनमें उत्सुकता होती है: हमेशा याद रखें कि बच्चों के मन-मस्तिष्क में जो भी सवाल होते हैं उसका उत्तर पाने की उनमें उत्सुकता और जिज्ञासा होती है और उन्हें जवाब मिल जाने पर उनका भी कन्फ्यूजन खत्म हो जाएगा।
  • शर्मिंदगी ना महसूस करें: शुरूआत से सही बातें जानना उनके सेक्सुअल हेल्थ के लिए भी अच्छा है। आखिर बच्चे किसी तरह के यौन उत्पीड़न के बारे में कैसे बताएंगे जब उन्हें पता ही नहीं होगा कि उनके साथ हुआ क्या है? अगर उन्हें लगेगा कि उनके पैरेंट्स सवालों के जवाब देने से हिचक रहे हैं तो कभी दुबारा ऐसा सवाल नहीं करेंगे।
  • एहतियात बरतें: पैरेंट्स को समझना होगा कि भले आप उनके साथ सीधे तौर पर चर्चा करें लेकिन उन्हें ऐसे समझाए कि वो समझ जाएं ना कि उनका कन्फ्यूजन बढ़ जाए। साथ ही उन्हें अच्छे स्पर्श और बुरे स्पर्श के बीच में अंतर समझाएं।
  • कम शब्दों में समझाएं: हम जानते हैं कि बच्चों की एकाग्रता बहुत कम समय के लिए होती है। उन्हें लंबा भाषण देने से वो सिर्फ बोर होंगे और आपकी बातों को ध्यान से नहीं सुनेंगे। इसके साथ ही उन्हें कुछ समझ नहीं आएगा।
  • जानें कि वो कितना जानती हैं: पैरेंट्स के लिए  जरूरी है कि वो समझें कि विषय के बारे में वो और क्या जानते हैं। अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा इन बातों को समझने के लिए सहज है तो आगे बढ़ें और समझाएं।

अंत में मैं कहना चाहती हूं कि ऐसे सवालों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके बाद वो कभी आपसे सवाल पूछने नहीं आएंगे और बतौर पैरेंट्स आप ये तो कभी नहीं चाहेंगे, है ना?