जब अचानक आराध्या से टकराईं रेखा..फिर हुआ कुछ ऐसा

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आराध्या बच्चन अचानक रेखा के सामने एक पार्टी में आ गईं और इसके बाद दोनों को बीच जानिए क्या हुआ ।

इसमें कोई शक नहीं है कि ऐश्वर्या राय बच्चन अपनी बेटी आराध्या को पारंपरिक भारतीय मूल्यों की भी सीख दे रही हैं।

किसी भी साधारण मां की तरह आराध्या को भी पूजा करने से लेकर, बड़ों के पैर छूने और विनम्र रहने का पाठ ऐश्वर्या राय ने बखूबी पढ़ाया है।

हालांकि लाइमलाइट में रहने के कारण आराध्या को मिली हुई इन संस्कारों की परीक्षा हो जाती है और वो हमेशा इसमें पास भी होती है। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जब 5 साल की आराध्या का सामना बच्चन परिवार की सबसे बड़ी कंट्रोवर्सी से हुआ तो उन्होंने क्या किया?

जब रेखा से मिली आराध्या!

अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय और आराध्या का अचानक रेखा के सामने आ जाना भी किसी परीक्षा से कम नहीं है। ये घटना कुछ दिन पहले मुकेश अंबानी के यहां हुई पार्टी की है जहां तीनों ने रेखा से मुलाकात की, जिनके और अमिताभ बच्चन की कथित अफेयर की खबरें सुर्खियों में रहती थी।  

आराध्या ने कहा नमस्ते

ऐसा लगता है कि ऐश्वर्या राय और बच्चन खानदान के संस्कार आराध्या में कूट-कूट कर भरे हैं। अभिषेक और ऐश्वर्या राय ने रेखा का अभिवादन पूरी गर्मजोशी और आदर  के साथ किया। आराध्या ने भी रेखा को पांरपरिक अंदाज में नमस्ते किया और उनसे आर्शीवाद लिया।

दीवाली पूजा में लगभग सभी बड़े बॉलीवुड स्टार्स मुकेश अंबानी के घर एंटिलिया पहुंचे जिनमें ऐश्वर्या राय, अभिषेक बच्चन और आराध्या भी शामिल थे। जब वो घर के अंदर जा रहे थे तभी रेखा आईं। फिल्मफेयर के अनुसार तभी तीनों की मुलाकात रेखा से हुई और तीनों ने रेखा का गर्मजोशी के साथ अभिवादन किया और उनका आर्शीवाद भी लिया।

ऐसा लगता है कि विनम्रता औऱ संस्कार बच्चन परिवार के लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है जो होना भी चाहिए भले सामने वाले की वजह से उनकी जिंदगी में कंट्रोवर्सी हो जाए।

यह घटना हमें बताती है कि हमें अपने बच्चों को कैसे मूल्य देना चाहिए और उन्हें सबको इज्जत देना आना चाहिए।ये याद रखें कि कभी-कभी सिर्फ नमस्ते पर्याप्त नहीं होता।

यहां हम आपको तीन महत्वपूर्ण मूल्य बता रहें है जो हमें अपने बच्चों को भी सिखाना चाहिए।

3 नैतिक मूल्य जो बच्चों को सिखाने की आवश्यकता है!

 

  • बड़ों की आदर: दूसरों का आदर करना सबसे महत्वपूर्ण मानवीय मूल्य है जो बच्चों को कम उम्र से सिखाना चाहिए। ये सुनिश्चित कर लें कि आप बच्चों के सामने सही उदाहरण पेश करें ताकि वो सबका आदर करें चाहे वो उनके बड़े हों या घर में मदद करने वाले सहायक। बच्चों के सामने लोगों से अच्छी से बात करें ताकि उनके ऊपर इसका गलत प्रभाव ना पड़े।
  • खुद के लिए खड़े होना: चाहे बेटे हो या बेटियां लेकिन अपने बच्चों को सिखाएं कि तनाव में वो कमजोर ना पड़ें बल्कि उन्हे खुद के लिए खड़ा होना चाहिए। अपने बच्चों को बेझिझक बोलने दें। उन्हें बोलने से कभी ना टोकें चाहे कोई भी विषय हो।
  • सहिष्णुता जरूरी: हमें बच्चों को जरूर सिखाना चाहिए कि वो जाति, लिंग, धर्म आदि के नाम पर कभी भेदभाव ना करें। उन्हें उदाहरण देकर समझाएं कि हमें हर इंसान के जिंदगी के जीने के तरीके का सम्मान करना चाहिए।

 

Written by

Deepshika Punj

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