"Chimi Lhakhang"- fertility का मंदिर' !

"Chimi Lhakhang"- fertility का मंदिर' !

"चिमी ल्हाखांग" दुनिया में एक ही ऐसा मंदिर है जहाँ किसी भगवन की नहीं बल्कि एक 'एरेक्ट पेनिस' की पूजा होती हैं और उससे फर्टिलिटी का आशीर्वाद लिया जाता है । बाकायदा तीर्थ की तरह कपल्स वहां बच्चे के लिए दुआ मांगने जाते हैं ।

 

 

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आज साइंस के पास इनफर्टिलिटी से निपटने के बहुत से तरीके है लेकिन फिर भी लोग अपनी आस्था उर विश्वास पर भरोसा करते हैं . लोग एक बच्चे के लिए क्या क्या नहीं करते ? अलग- अलग मंदिरों, मज़जिदों और गुरुद्वारों में जाकर अपने भगवन के आगे सर झुका कर दुआ मांगते हैं । लेकिन, "चिमी ल्हाखांग" दुनिया में एक ही ऐसा मंदिर है जहाँ किसी भगवन की नहीं बल्कि एक 'एरेक्ट पेनिस' की पूजा होती हैं और उससे फर्टिलिटी का आशीर्वाद लिया जाता है ।

 

'चिमी ल्हाखांग' भूटान के में एक ऐसा मंदीर है जहाँ फर्टिलिटी के लिए दुआ मांगी जाती है बाकायदा तीर्थ की तरह कपल्स वहां बच्चे की चाह लेकर जाते हैं।

 

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हर साल हज़ारों कपल यहाँ फर्टिलिटी के लिए दुआ मांगने आते हैं और मंदिर बैठे मोंक उन्हें एक लकड़ी से बने पेनिस से थापक कर आशीर्वाद देते हैं

 

इस गाओं की हर दिवार को देख कर आपको ये अंदाज़ा हो जायेगा की यहाँ पेनिस को कितना पवित्र और शक्तिशाली मन जाता है । यहाँ हर घर के बाहर और छत पर बुरी अप्त्माओं से उसकी रक्षा के लिए "फल्लुस पेंटिंग्स" यानि 'पेनिस की पेंटिंग्स' बानी होती है ।

 

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इस गाओं और आस पास के इलाकों में पेनिस को भगवन की तरह पूजा जाता है, और उसी के सिंबल के रूप में एक 'एजेक्युलेटिंग पेनिस' की पेंटिंग्स को घर और दुकानों के दरवाज़ों और छतों पर बनाया जाता है । कमाल की बात ये है कि इन पेंटिंग्स को 'पूरी तरह एरेक्ट पेनिस' के हर शेप और साइज में बनाया जाता है, जिनमें से कुछ पर आँखें और स्कार्फ्स भी बने होते हैं ।

 

 

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अपने घर को बुरी नज़र से बचाने के लिए लकड़ी के 'फल्लुस' यानि 'पेनिस' को घर के चारों कोनों में लगाया जाता है ।

 

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ये पेंटिंग्स असल में "दृक्पा कुंले", भूटान में यात्रा करने वाले एक निराले संत की शिक्षाओं का सिंबल हैं । इस संत को अपनी अजीबोगरीब टीचिंग्स के लिए 'मेडम मेन' भी कहा जाता है ।

 

"फल्लुस पेंटिंग्स" के बारे में और जानने के लिए आगे पढ़ें 

 

 

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"दृक्पा कुंले" की टीचिंग्स बौद्ध धर्म की एक अपरंपरागत शाखा के प्रचार करने पर आधारित थी, जिसमें खास तौर पर औरतों को सेक्सशुअली जागरूक करना शामिल था। उनका मन्ना था कि धार्मिक और सामाजिक बंधन, आम लोगों को बुद्ध की सही शिक्षा सीखने से रोके हुए हैं ।

 

 

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ऐसा भी माना जाता है की उनका 'सेक्सुअल फ्रीडम' के बारे में अश्लील और अपमानजनक बातें करना असल में लोगों की बंधी हुई सोच को बदलने का एक तरीका था जिससे वो बौद्ध की सही शिक्षा तक पहुंच सकें ।

 

 

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वेस्टर्न भूटान के कुछ इलाकों में लोग आज भी "लहबों" फेस्टिवल में पेनिस शेप की लड़कियों से एक सीढ़ी बनाते है, और ऐसा माना जाता है की उस सीढ़ी से उतर कर देवता उनके अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए उन्हें आशीर्वाद देने आएंगे ।

 

 

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'दृक्पा कुंले' भूटान में सबसे जादा पॉपुलर और फॉलो किये जाने वाले संत हैं और उनके सिंबल के रूप में भूटान के हर घर और रेस्टुरेंट में 'फल्लुस' यानि 'पेनिस' को हर शेप और साइज में, किसी न किसी तरह सजे हुए देखा जा सकता है ।

 

यहाँ के खास सुविनिअर के बारे में और जानने के लिए आगे पढ़ें 

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यहाँ की सोविनियर शॉप्स में भी यही 'फल्लुस' यानि 'पेनिस' गिफ्ट के तौर पर खरीदने के लिए मिलते हैं ।

 

वहां तक कैसे पहुंचे ?

 

 

चिमी ल्हाखांग मंदिर, मेटशिना वैली के बीचों-बीच बसे 'सोपसखा' गाओं से सिर्फ 20 मिनट की दुरी पर है, जहाँ तक आराम से चल कर जाया जा सकता है ।

 

भले ही आप  पागल बाबा के वरदान और शक्ति में विशवास रखते हो या नहीं, 'चिमी ल्हाखांग' अपने पटनर के साथ एक शांत और खूबसूरत ट्रिप पर जाने के लिए एक बिलकुल सही जगह है। क्या पता इस मंदिर के जादू का सीक्रेट असल में 'चिमी ल्हाखांग' की खूबसूरत वादियां ही हों, जो आपकी सोयी हुई रोमांटिक लाइफ को फिर से ज़िंदा कर दे ।

 

 

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