child sexual abuse : ‘underwear rule’ के बारे में अपने बच्चों को सिखाएं

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चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज़ से अपने बच्चों को बचाने के लिए 'अंडरवियर रूल' के बारे में बताइये, ताकि वो अपनी तरफ बढ़ते हुए खरते को पहचान कर उससे बच सकें।

देश के अलग-अलग हिस्सों से चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज़, यहाँ तक की बच्चों के रेप की घटनाएं भी सामने आई हैं।

जहाँ एक तरफ पहले मामले में एक 62 साल के बूढ़े व्यक्ति ने 6 की बच्ची से रेप किया तो वहीँ, बेंगलुरु में एक 17 साल की लड़की की रेप की खबर सामने आयीं। तीसरा मामला बंगाल से था ,जहाँ दो बच्चे करीब 30 साल के आदमी द्वारा रेप किये गए।

इन सभी केस में एक चीज़ कॉमन है, और वो ये की इन सभी मामलों में विक्टिम आरोपी को पहले से जानते थे। ये साफ़ बताता है की बच्चों में गुड टच और बैड टच को लेकर जागरूकता नहीं है। यही कारण है की बच्चों के साथ इस तरह की घटनाओं में इज़ाफ़ा हुआ है। 2014 के नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, 82,423 क्राइम 18 साल के काम उम्र के बच्चे के साथ हुए। ये आंकड़ा पहले से कहीं ज्यादा था।

तो चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज़ से कैसे निपटें ?

अपने बच्चे को गुड टच, बैड टच के अलावा 'अंडरवियर रूल' भी सिखाएं। 2011 में कौंसिल ऑफ़ यूरोप ने इस कैंपेन की शुरुवात की। ये एक साधारण तरीका है जिससे माँ बाप बच्चे को सेक्स एब्यूज का शिकार होने से बचा सकते हैं।

'अंडरवियर रूल' चाइल्ड सेक्स एब्यूज के खिलाफ जागरूकता अभियान है

इस कैम्पेन में माता पिता को सिखाया जाता है, शरीर के उन हिस्सों के बारे में जिन्हे दूसरों को छूने का अधिकार नहीं है। इन मामलों में बच्चे से बात करें ।

तो क्या है अंडरवियर रूल ?

ये बहुत ही आसान है। बच्चों के बॉडी के उन हिस्सों को नहीं छूना चाहिए जो अंडरगार्मेंट से ढके होते हैं। हालांकि माता पिता जरूरत पड़ने  पर या डॉक्टर उन हिस्सों को जरूरत पड़ने पर छू सकते हैं लेकिन वो भी तबतक, जब तक बच्चा इसके साथ सहज स्तिथि में हो। इससे बच्चे ये भी सीखते हैं, की उनका शरीर सिर्फ उनका ही है और बिना उनकी इज़ाज़त के इसे छूने का अधिकार किसी को नहीं है।

इसे समझने के लिए ये वीडियो देखें :

 

 

अंडरवियर रूल कैसे सिखाएं? जानने के लिए आगे पढ़ें 

अंडरवियर रूल कैसे सिखाएं ?

आप सेक्सुअल एब्यूज़ के बारे में अपने बच्चे से कभी भी बात करना शुरू कर सकते हैं।

बच्चों को सिखाएं की उनका शरीर उनका है :

उन्हें समझाएं की उनके इज़ाज़त के बिना उन्हें छूने का अधिकार किसी को नहीं है , फिर चाहे वो परिवार के लोग हों,रिश्तेदार हों या दोस्त। उन्हें सेक्सुअलिटी और उनके प्राइवेट बॉडी पार्ट के बारे में बताएं।

 

उन्हें गुड टच और बैड टच के बीच का अंतर बताएं :

उन्हें बताएं की गुड टच का मतलब है की, जब उन्हें अच्छा लगे और वो इसके साथ ओके हों. और एक बैड टच वो है, जब कोई आपके प्राइवेट पार्ट को छूने की कोशिश करता है।

 

src=http://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2016/01/PicMonkey Collage rule.jpg child sexual abuse : ‘underwear rule’ के बारे में अपने बच्चों को सिखाएं

 

उन्हें गुड सीक्रेट और बैड सीक्रेट में अंतर बताएं :

उन्हें सिखाएं की रिश्तेदार हो या दोस्त , अगर वो उन्हें कोई सीक्रेट रखने के लिए कह रहा है ,तो वो तुरंत अपने माता पिता को बताएं। याद रखें की ये गुप्त रखने की आदतें की गलत लोगों का हथियार होता है।

 

उन्हें सिखाएं की सेफ्टी और सिक्यूरिटी बड़ों की जिम्मेदारी है :

उन्हें सिखाएं की वो खुद को दूसरों से कैसे बचा सकते है, साथ ही ये भी बताएं की उनकी सुरक्षा उनके बड़ों की जिम्मेदारी है। अगर आपका बच्चा शर्म महसूस कर रहा है तो ये सेक्स एब्यूज का एक रूप हो सकता है।

 

उन्हें किसी के साथ भी किसी भी तरह की नज़दीकी के बारे में बताना सिखाएं :

बच्चों को हमेशा उन लोगों के बारे में बताया जाना चाहिए जो उनकी सुरक्षा कर सकते हैं। उन्हें अनजान लोगों से दूर रहना और जिनके भी साथ रहें उनके बारे में बताना सिखाएं

 

इन आसान नियमों को फॉलो कर के आप न सिर्फ अपने बच्चे को चाइल्ड सेक्स एब्यूज के प्रति जागरूक बनाते हैं बल्कि उन्हें भी सही गलत की पहचान होने में आसानी होती है।

याद रखें की बच्चों को ये सिखाने की कोई तय सीमा नहीं होती है। जितनी जल्दी बच्चे को इस अंडरवियर रूल के बारे में बताया जाए उतना अच्छा होता है। अगर आप अभी उससे इस बारे में बात करने में शर्म महसूस कर रहे हैं तो याद रखिये की जब वो थोड़े बड़े हो जाएंगे तब आप और भी हिच-किचाएंगे। इसीलिए आज से ही शुरुवात करें।

 

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