चम्तकार..आगरा की एक महिला ने 18 बार गर्भपात के बाद हेल्दी बच्चे को दिया जन्म

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डॉक्टर्स इसे चिकित्सीय चम्तकार ही मान रहे हैं कि हमेशा गर्भावस्था के पांचवे या छठे महीने में गर्भपात के बाद भी वो लगातार कंसीव करती रही।

18 गर्भपात (जी हां ये सच है) और 20 साल बाद एक 38 वर्षीय महिला (रजनी) की जिंदगी में वो दिन आ गया जिसका वो इतने सालों से इंतजार कर रही थी। रजनी ने 1 जून को स्वस्थ्य बेटे को जन्म दिया और कपल अब ये केस गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराना चाह रहे हैं।

डॉक्टर्स इसे चिकित्सीय चम्तकार ही मान रहे हैं कि हमेशा गर्भावस्था के पांचवे या छठे महीने में गर्भपात के बाद भी वो लगातार कंसीव करती रही।

आगरा के बरहन स्थित हाथीगढ़ी गांव का ये परिवार मुख्य रूप से किसान है, उसके पति प्रेम कुमार ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने बेबी के लिए हर संभव प्रयास किया और पहले गए अस्पतालों के नाम भी बताए। आखिकार उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सपना आगरा के प्राइवेट अस्पताल में पूरा हुआ।

 
mother and baby चम्तकार..आगरा की एक महिला ने 18 बार गर्भपात के बाद हेल्दी बच्चे को दिया जन्म

रजनी का ट्रीममेंट डॉ अमित टंडन कर रहे थे जो लैप्रेस्कोपिक सर्जन हैं और डॉ वैशाली IVF स्पेशलिस्ट हैं।

डॉ टंडन ने आगरा में मीडिया को बताया कि रजनी incompetent cervix से पीड़ित थी जिसमें गर्भाशय भ्रूण के भार को नहीं उठा पाता है और इसलिए 5-6 महीने में गर्भपात हो जाता है। उसका कई नर्सिंग होम में ट्रीटमेंट हुआ, कई स्टीच भी पड़े लेकिन प्रेग्नेंसी सफल नहीं रही।

दोनों डॉक्टर्स इस नतीजे पर पहुंचे कि रजनी की प्रेग्नेंसी तभी सफल हो सकती है जब गर्भाशय भ्रूण के वजन को उठा पाएगा। इसके लिए जब रजनी साढ़े तीन महीने की प्रेग्नेंट थी तभी डॉक्टर्स ने उसके गर्भाशय ग्रीवा में लैप्रोस्कोपिक स्टीच दी ।

आखिरकार रजनी एक स्वस्थ्य बेटे की मां बनी। चमत्कार का इससे बेहतर उदाहरण और कुछ नहीं हो सकता है।

बार बार गर्भपात के कारण

Warwick University, UK के वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर गर्भाशय में स्टेम सेल की कमी हो तो गर्भपात हो सकता है। कारण पता चलने के बाद अब वैज्ञानिक गर्भपात से बचने के तरीकों पर रिर्सच कर रहे हैं।

ऑब्सिट्रिक्स और गाइनोक्लॉजी के प्रोफेसर जन ब्रोसेन्स ने मीडिया से कहा कि हमने पता किया है कि जिन महिलाओं का बार बार गर्भपात हो रहा था उनकी गर्भाशय की लाइन पहले से ही ठीक नहीं थी। इसके पहले की मरीज फिर से गर्भधारण करे ,हम इसे सही करने की संभावनाओं पर हर संभव विचार कर रहे है। हो सकता है कि यही सिर्फ एक कारण हो जो इस तरह के गर्भपात को रोकने में कारगर हो।

पहले की स्टडी में बताया गया है कि भारतीय महिलाओं में गर्भपात की संभावना अधिक होती है। ऐसा भारत के Obstetrics and Gynecology के जर्नल में बताया गया है जिसमें पांच अलग अलग शहरों की महिलाओं को शामिल किया गया था।  

इस स्टडी में 2400 महिलाएं शामिल हुई, इनमें से 32 प्रतिशत महिलाओं का गर्भघारण करते ही अपने आप गर्भपात हो गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ये नंबर 10 प्रतिशत है। भारत के प्रेग्नेंसी रिपोर्ट कार्ड पर ये खराब नंबर महिलाओं के गर्भाशय में इंफेक्शन के इतिहास के बारे में भी बताता है।

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Source: theindusparent