गर्भ के दौरान अवसाद बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है । 

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28 वर्षीय नताशा राव ((बदला हुआ नाम) के लिए सब कुछ ठीक चल रहा था । उनके पास अच्छी नौकरी थी, अच्छे व्यक्ति से उनकी शादी हो गयी थी और जब उन्हें लगा तब वो गर्भवती भी हुई ।लेकिन अपने गर्भ की ख़ुशी मनाने से ज्यादा ज्यादातर बेचैन रहें लगीं उनका आत्म-विश्वास कम होने लगा।

वो कहती हैं की " मैं निराशावादी हो गयी थी । छोटी-छोटी बातें मुझे रुला दिया करती थीं । मेरी माँ कहती थी ये करो और मेरी सास कहतीं थी की ये काम मत करो । इन सबसे मैं इतना परेशान हो गयी थी की मुझे अपने अन्दर पल रहे बच्चे से नफरत होने लगी थी ।आखिरकार मुझे काउंसलिंग करवानी ही पड़ी ।

सैकड़ों गर्भवती महिलाओं की तरह नताशा भी गर्भ के दौरान होने वाली डिप्रेशन का शिकार थी । गर्भवती महिलाओं में चिडचिडापन, मूड स्विंग आदि को ज्यादातर नजरंदाज कर दिया जाता है । लेकिन यह समस्या असल में बहुत गंभीर होती है ।

मुंबई के फोर्टिस हॉस्पिटल में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सोनल कुम्ता बताती हैं की " गर्भ के दौरान अवसाद या डिप्रेशन कोई विरल समस्या नहीं है । 33 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं इस अवस्था में डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं ।

बहुत वर्षों तक यह माना जाता रहा की गर्भ के दौरान होर्मोन्स महिला को डिप्रेशन से बचाते हैं । लेकिन अब अध्ययन से पता चला है की गर्भ के दौरान बनने वाले हॉर्मोन शुरू में तेज़ी से बढ़कर दिमाग की रसायन क्रियाओं को प्रभावित कर देते हैं और अवसाद की भावना को जन्म देते हैं । अगर इसपर ध्यान ना दिया जाए तो ये माँ और बच्चा दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है ।

src=http://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2016/03/anxiety affects foetus 500x341.jpg गर्भ के दौरान अवसाद बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है । 

डिप्रेशन को पहचानें 

तनाव और अवसाद की भावना दबाव में एक आम एहसास है । ये बिना किसी वजह या कारण के भी हो सकते हैं , लेकिन ये इंसान की जीवन को मुश्किल बना देते हैं । इनके कुछ लक्षण इस प्रकार है :

  • चिकित्सक सहित अन्य लोगों के साथ अपनी भावनाओं को बता पाने में असमर्थता
  • मुसीबत में ध्यान केंद्रित होना
  • ज्यादातर समय चिंतित रहना
  • बारम्बार बेचैनी होना
  • अक्सर गुस्सा आना
  • गंभीर नींद की समस्या
  • अत्यधिक थकान महसूस करना
  • लगातार नकारात्मक विचारों का आना
  • हर समय खाने की इच्छा या बिल्कुल भी नहीं खाना
  • कुछ भी सुखी न होने की भावना
  • अक्सर रोना और असहाय महसूस करना

डॉ कुम्ता बताती हैं की कभी कभी डिप्रेशन के बारे में जानना बहुत जटिल काम हो सकता है । ऐसा इसीलिए की ज्यादातर लक्षण गर्भवती महिलाओं के लक्षणों से मिलते जुलते हैं । अपने बच्चे की थोड़ी चिंता रखना किसी भी महिला के सामान्य बात है लेकिन अगर ये इतना बढ़ जाए की दिनचर्या ही मुश्किल में पड़ जाए तब मदद लेनी जरूरी है ।

माँ और बच्चे को खतरा 

अगर डिप्रेशन का उपाय न ढूंढा जाए तो माँ और बच्चे दोनों को खतरा हो सकता है ।

बच्चे के लिए जोखिम :

  • कम वजन के साथ जन्म लेना
  • समय से पहले जन्म लेना
  • APGAR स्कोर कम होना
  • सांस लेने में परेशानी आदि की समस्या

माँ को जोखिम :

  • आत्महत्या करने की प्रवृत्ति
  • प्रसवोत्तर अवसाद या चिंता
  • शराब या ड्रग लेने की आदत लग जाना
  • बच्चे से लगाव न होना
  • Pre-eclampsia
  • समय से पहले दर्द का शुरू हो जाना
  • सी-सेक्शन डिलीवरी की जरूरत

src=http://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2016/03/Screen Shot 2015 07 09 at 4.07.29 PM.jpg गर्भ के दौरान अवसाद बच्चे के लिए खतरनाक हो सकता है । 

गर्भावस्था में डिप्रेशन से बचाव 

ज्यादातर परिवार का साथ ना देने के कारण महिलाएं डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं । इसके अलावा घरेलू हिंसा , काम की चिंता, गर्भ के गिरना , बिना प्लान की गयी गर्भावस्था, कम उम्र में गर्भ धारण कर लेना आदि डिप्रेशन के मुख्य कारण हो सकते हैं । डिप्रेशन से बचने का सबसे बेहतरीन उपाय है परिवार से प्यार और सहायता मिलना । इन सबके अलावा डिप्रेशन से बचने के लिए निम्नलिखित उपायों पर गौर करें ।

  • घरेलु काम में दूसरों की मदद लें और खुद को थकने मत दें
  • आराम करें
  • समस्याओं के बारे में बात करें
  • जितनी जल्दी हो सके उठकर व्यायाम करें
  • ताज़ा हवा के लिए घर से बाहर निकलें
  • दूसरी गर्भवती महिलाओं से मिलें बात करें
  • बेबी बम्प के साथ भी अच्छे कपडे पहनें और अच्छी दिखें
  • योग , ध्यान आदि करें
  • पति के साथ बाहर डेट पर या कहीं शान्ति में खाना खाने जरुर जाएँ

गर्भावस्था के दौरान डिप्रेशन का इलाज 

एक बार इसके बारे में पता लगने के बाद उस इलाज को शुरू करें जिससे बच्चे को कोई भी नुकसान ना हो । इनमे प्रमुख तरीके शामिल हैं :

  • मनोचिकित्सा पर ध्यान दें जैसे Cognitive Behavioural Therapy (CBT) जिसमे आपको अपने भावनाओं पर काबू रखना सिखाया जाता है ।
  • ओमेगा 3 जैसे जरूरी फैटी एसिड वाले पदार्थ खाएं जैस ऑयली फिश , अखरोट आदि
  • लाइट थेरेपी का प्रयोग करें जिसमे आपको आर्टिफीसियल सूरज की रौशनी के सामने रखा जाता है
  • एक्यूपंक्चर का इस्तेमाल करें जिससे आपका मूड फ्रेश और खुशहाल बना रहेगा ।

जो महिलाएं रोजाना ध्यान करती हैं उन्हें डिप्रेशन होने की संभावना बहुत कम होती है लेकिन डॉ कुम्ता बताती हैं की फिर भी किसी न किसी डॉक्टर से मिलना और उसकी सलाह लेना जरूरी है ।

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