theAsianparent Logo

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों को समझिए कुछ इस तरह...

गर्भधारण करना महिलाओं के लिए सबसे आनंदित करने वाला अनुभव होता है ।

जिस तरह परिवार के सदस्यों को ये खुशख़बरी सुनने की जल्दी होती है उसी तरह शिशु की इच्छा रखने वाले पैरेंट्स को भी । लेकिन कई बार जब हम पीरियड मिस होने के तुरंत बाद प्रेगनेंसी किट का इस्तेमाल करने लगते हैं तो प्रेगनेंसी के विषय में निश्चित परिणाम नहीं जान पाते हैं । इस नकारात्मक परिणाम का ये मतलब है कि अभी पर्याप्त मात्रा में ऐचसीजी हार्मोन नहीं रिलीज हुआ है, आपको थोड़े दिन रुक कर दोबारा जांच करनी चाहिए । प्रेगनेंसी में हार्मोन का स्तर इतना बढ़ जाता है कि आप दिन प्रतिदिन हो रहे बदलाव को प्रत्यक्ष रुप से अनुभव कर सकती है ।

वैसे सामान्यतया गर्भाधान के 10 दिनों के भीतर ही हल्का परिवर्तन महसूस किया जा सकता है और ये तब होता है जब निषेचित अंडा आपके गर्भाशय में प्रवेश करने के बाद गर्भाशय की दीवार से जुड़ जाता है । हालांकि, संभव है कि गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों को समझने में आप असमर्थ रहें । ऐसी स्थिति में कुछ दिनों के इंतज़ार के बाद किट के द्वारा प्रेगनेंसी जांच की जा सकती है ।

 

जिन महिलाओं की माहवारी नियमित नहीं रहती उनके लिए गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण पर गौर करना ज़रुरी हो जाता है । ये भी हो सकता है कि माहवारी की निश्चित तिथि को ब्लीडिंग ना होकर खून के हल्के धब्बे दिखाई दें । अगर उन दिनों शरीर में ऐंठन हो ,स्तन संवेदनशील हो जाएं लेकिन रक्तस्त्राव ना हो तो ऐसा होना आपके कंसीव कर लेने के संकेत हो सकते हैं । इसके अलावा भी कई अन्य शारीरिक व मानसिक बदलावों पर गौर करने से आप गर्भावस्था के लक्षणों को लेकर निश्चित हो सकती हैं ।

 

प्रेग्नेंसी के नौवे महीने में ना बरतें लापरवाही...इन खास बातों का रखें ख्याल

ऐसे पता करें आपने बेबी कंसीव कर लिया है या नहीं 

  • सूघंने या गंध को लेकर संवेदनशील होना- गर्भावस्था में प्रवेश करते ही आपको किचन की कई चीजों के गंध से परेशानी हो सकती है । मुझे प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में काजू, पके हुए चावल और केले के गंध से समस्या होती थी । इसके अलावा मुझे अपने एक ड्रेस से, जिसे मैं सामान्य रुप से पहनना पसंद करती थी उससे बड़ी समस्या होती थी , उस कपड़े को देखते ही मैं बेचैन हो जाती थी और जी मिचलाने लगता था । गर्भावस्था से जुड़ी ये सारी चीजें सामान्य तो है पर वाकई बड़ी आश्चर्यजनक है ।

 

  • स्वाद का बदल जाना- इन दिनों किसी भी खाद्य सामग्री के लिए किसी भी समय आपका मन ललायित हो सकता है । प्रेगनेंसी के 6 सप्ताह के बाद से इस तरह के लक्षण अधिक देखने को मिलते हैं ।

 

  • व्यवहारिक बदलाव होना- थोड़े समय के लिए नाराज़ होना, झुंझलाहट होना, भूलना आदि बदलाव हो सकते हैं । इन दिनों अधिकांश महिलाएं भावनात्मक रुप से कमज़ोर हो जाती हैं ।

 

  • जल्दी-जल्दी पेशाब आना- जैसे-जैसे गर्भावस्था में आपका शिशु विकसित हो रहा होगा आपको बार-बार मूत्र त्याग करने की ज़रुरत महसूस होने लगेगी ।

 

  • थकान अनुभव करना- शुरुआती 3-4 महीनों में थकान एवं मॉर्निंग सिकनेस की समस्या अधिक देखी जाती है । आपको अधिकांश तौर पर लेटे रहना पसंद आ सकता है ।

 

  • स्तन के आकार में परिवर्तन- जिस तरह माहवारी के दिनों में कई महिलाओं के स्तन में गांठ जैसा अनुभव होता है उसी तरह प्रेगनेंसी के पहले कुछ महीनों में स्तनों में दर्द भी अनुभव होता है और ब्रेस्ट साइज भी बढ़ जाता है ।

 

  • निपल के रंग में बदलाव- ये लक्षण आप आसानी से परख सकती हैं । गर्भाधान के बाद निप्पल ज्यादा कड़े तथा उभरे प्रतीत होते हैं साथ ही स्तन के डार्क एरिया का रंग और भी गहरा हो जाता है तथा वहां दाने स्पष्ट रुप से दिखने लगते हैं ।

 

  • जी मिचलाना- अमूमन हर महिला को जी मिचलाने की समस्या रहती है किसी को शुरुआती 4 माह तक उल्टी आने या जी मिचलाने की समस्या झेलनी पड़ती है तो कई महिलाओं को पूरे नौ महीने तक इससे दिक्कतें होती रहती है ।

 

  • शरीर का तापमान बढ़ना- अगर आप नियमित रुप से शारीरिक तापमान नोट करती रहें तो आपको फर्क पता चल सकेगा । गर्भाधान के बाद शरीर का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ा रह सकता है ।