pregnancy के दौरान bleeding: क्या ठीक नहीं है?

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जानिए गर्भावस्था के दौरान किस वजह से होता है रक्तस्राव और उसके बारे में आप क्या कर सकती हैं।

गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग होना गर्भवती महिला को काफी बेचैन कर सकता है। गर्भावस्था के दौरान होने वाली संभावित समस्याओं में से ब्लड डिस्चार्ज देखकर आप सबसे ज्यादा परेशान और गर्भपात की आशंका आपको सता सकती है।

हालांकि यह ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि थोड़े ब्लड डिस्चार्ज का मतलब हमेशा गर्भपात नहीं होता है। वास्तविकता यह है कि स्पॉटिंग होना बहुत आम बात है और  गर्भवती महिलाओं में से करीब एक तिहाई में ऐसा होता है।

मुंबई स्थित कुमार क्लीनिक की कंसल्टेंट गाइनैकोलॉजिस्ट डॉ. पापिया गोस्वामी मुखर्जी बताती हैं, “गर्भावस्था के दौरान स्पॉटिंग या हल्की ब्लीडिंग होना हमेशा नुकसानदायक नहीं होता है। पर्याप्त आराम और दवाओं की मदद से शुरूआती ब्लीडिंग समस्याओं के बावजूद कई गर्भवती महिलाएं स्वस्थ शिशुओं को जन्म देती हैं।’’

स्पॉटिंग का माता और उसके गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ता है लेकिन ब्लीडिंग कई विविध जटिलताओं का संकेत हो सकती है जैसे गर्भपात, एक्टोपिक गर्भावस्था, प्लेसेंटल एबरप्शन या प्लेसेंटा प्रीविया। इसलिए इसे कभी नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान स्पॉटिंग और ब्लीडिंग की कुछ सामान्य वजहें निम्नलिखित हो सकती हैं।

गर्भावस्था के पहले 20 सप्ताह के दौरान ब्लीडिंग

गर्भवती महिलाओं में से करीब 20 फीसदी को गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान वैजाइनल ब्लीडिंग हो सकती है। डॉ. मुखर्जी के अनुसार गर्भावस्था की पहली आधी अवधि के दौरान स्पॉटिंग या ब्लीडिंग होने की कई वजहें हो सकती हैं।

  • इंप्लांटेशन ब्लीडिंग

कुछ महिलाओं को गर्भावस्था की शुरूआत में थोड़ी सामान्य स्पॉटिंग हो सकती है क्योंकि इस दौरान फर्टिलाइज़्ड अंडा गर्भाशय की लाइनिंग पर इंप्लांट होता है। डॉ. मुखर्जी बताती हैं, ’’फर्टिलाइज़्ड अंडा फैलोपियन ट्यूब से होते हुए गर्भाशय में पहुंचता है, जहां यह गर्भाशय की लाइनिंग से जुड़ जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान गर्भाशय में माता की कुछ रक्त धमनियों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे सर्विक्स और योनि से थोड़ा रक्त प्रवाह हो सकता है। चूंकि इंप्लांटेशन ब्लीडिंग गर्भावस्था की बिल्कुल शुरूआत में होती है और इसलिए अक्सर इसे हल्के पीरियड के तौर पर भी देखा जा सकता है।’’

  • हॉर्मोन स्तर में बदलाव

आमतौर पर मासिक धर्म का नियंत्रण करने वाले हॉर्मोन की वजह से भी गर्भावस्था की शुरूआत में ब्लीडिंग हो सकती है।

  • सर्वाइकल (गर्भाशयग्रीवा) या योनि में संक्रमण

सर्विक्स, योनि या यौन संक्रमण (जैसे क्लेमीडिया, गोनोरिया या हर्प्स) की वजह से भी गर्भावस्था की पहली तिमाही में ब्लीडिंग हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान होने वाले संक्रमणों का डॉक्टर की सलाह से जल्दी इलाज कराएं।

  • यौन संबंध

गर्भावस्था के दौरान सर्विक्स में अतिरिक्त रक्त का प्रवाह होता है। गर्भावस्था के दौरान निकलने वाले हॉर्मोन सर्विक्स की सतह में बदलाव कर देते हैं, जिससे घर्षण जैसे यौन संबंध बनाने के बाद इसमें ब्लीडिंग की आशंका बढ़ जाती है।

  • फाइब्रॉइड्स

कई बार प्लेसेंटा गर्भाशय में ऐसी जगह जुड़ जाता है, जहां उसकी लाइनिंग में फाइब्रॉइड या कोई और विकास हो, इस वजह से भी कई बार ब्लीडिंग हो जाती है। लेकिन इससे गर्भ में पल रहे शिशु को कोई नुकसान नहीं होता है।

कई बार पहले 20 सप्ताह में ब्लीडिंग होना किसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है और आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसकी वजह निम्नलिखित में से कुछ भी हो सकती है:

  • गर्भपात

गर्भावस्था के पहले 12 सप्ताह के दौरान गर्भपात होना सबसे सामान्य होता है और पहली तिमाही में ब्लीडिंग होने पर गर्भपात की आशंका सताने लगती है। आमतौर पर गर्भावस्था की शुरूआत में गर्भपात तब होता है, जब भू्रण सही ढंग से विकास नहीं कर रहा हो। डॉ. मुखर्जी कहती हैं,  “कुछ महिलाओं को उनके गर्भवती होने का अहसास होने से पहले ही उनका गर्भपात हो जाता है क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके पीरियड चल रहे हैं।’’

  • सबकोरियॉनिक हैमोरोज

गर्भावस्था के शुरूआती दौर में ब्लीडिंग होना या प्लेसेंटा के आसपास खून के छोटे-छोटे थक्के जम सकते हैं।

  • एक्टोपिक गर्भावस्था

एक्टोपिक गर्भावस्था में फर्टिलाइज़्ड भू्रण गर्भाशय के बाहर इंप्लांट हो जाता है आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब में। अगर भू्रण वहां विकसित होता रहा तो फैलोपियन ट्यूब फट सकती है, जो माता के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

  • मोलर गर्भावस्था

मोलर गर्भावस्था एक दुर्लभ स्थिति होती है, जिसमें आसामान्य कोशिकाएं भू्रण के बजाय गर्भाशय में विकसित होने लगती हैं। ऐसा तब होता है, जब भू्रण सही ढंग से विकसित नहीं हो रहा हो लेकिन गर्भाशय की कुछ कोशिकाएं बढ़ने और गुणा होने लगती हैं। दुर्लभ मामलों में कोशिका कैंसरयुक्त हो सकती है और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकती है।

  • केमिकल गर्भावस्था

जब अंडा फर्टिलाइज़्ड हो लेकिन पूरी तरह गर्भाशय में इंप्लांट नहीं हुआ हो तो इससे केमिकल गर्भावस्था कहा जाता है। गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोन स्तर की जांच से इसका पता लगाया जा सकता है।

दूसरी तिमाही में ब्लीडिंग की वजह जानने के लिए पढ़ना जारी रखें

गर्भावस्था के दूसरे हिस्से में ब्लीडिंग

गर्भावस्था की आधी अवधि अवधि पूरी होने पर एक्टोपिक गर्भावस्था और केमिकल गर्भावस्था जैसी जटिलताएं होने की आशंका नहीं होती है। गर्भावस्था की पहली तिमाही पूरी होने के बाद गर्भपात का जोखिम बहुत कम हो जाता है। हालांकि दूसरी तिमाही में ब्लीडिंग हो तो इसे बहुत गंभीरता से देखना चाहिए।

इस अवधि में ब्लीडिंग होने की निम्नलिखित वजहें हो सकती हैं:

प्रसव की शुरूआत

आमतौर पर प्रसव की शुरूआत योनि से रक्त और म्यूकस निकलने के साथ होती है। डॉ. मुखर्जी बताती है, “इस डिस्चार्ज को ’ब्लडी शो’ कहते हैं और यह तब होता है, जब सर्विक्स फैलना शुरू करता है और कुछ छोटी नसें फट जाती हैं। इस डिस्चार्ज में रक्त की मात्रा बहुत कम होती है।’’ गर्भावस्था के अंतिम दौर में ब्लीडिंग का मतलब प्रसव की शुरूआत होती है।

अगर किसी गर्भवती महिला को 36 सप्ताह से पहले क्रैंपिंग दर्द का अनुभव होता है मुमकिन है कि उनका प्रसव समयपूर्व शुरू हो चुका है। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

src=http://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2015/12/2 1.jpg pregnancy के दौरान bleeding: क्या ठीक नहीं है?

प्लेसेंटल एबरप्शन

प्लेसेंटल एबरप्शन बहुत गंभीर स्थिति होती है, जिसमें प्लेसेंटा गर्भाशय से अलग हो जाता है और प्लेसेंटा व गर्भाशय के बीच रक्त इकट्ठा हो जाता है। यह स्थिति माता व शिशु दोनों के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है।

प्लेसेंटा प्रीविया

यह स्थिति तब होती है, जब प्लेसेंटा गर्भाशय में थोड़ा नीचे रहता है और आंशिक या पूरी तरह से बर्थ कैनाल का मुंह बंद कर देता है। डॉ. मुखर्जी कहती हैं, ’’प्लेसेंटा प्रीविया में बिना किसी चेतावनी के ब्लीडिंग शुरू हो सकती है या फिर ऐसा तब हो सकता है, जब कोई चिकित्सक यह जांच कर रहा हो कि सर्विक्स फैल रहा है या नहीं या फिर प्रसव शुरू हुआ या नहीं।’’

गर्भाशय का फटना

दुर्लभ मामलों में ही ऐसा होता है, कि गर्भावस्था के दौरान पुराना सिज़ेरियन सेक्शन फिर खुल जाए। गर्भाशय का फटना माता के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

वासा प्रीविया

इस बेहद दुर्लभ परिस्थिति में गर्भ में पल रहे शिशु की रक्त धमनियां अंब्लिकल कॉर्ड या प्लेसेंटा से निकलकर बर्थ कैनाल के मुंह से बाहर आ जाती है। जब प्रसव शुरू होता है तो ये छोटी-छोटी रक्त धमनियां फट सकती हैं, जिससे भ्रूण तक रक्त प्रवाह नहीं हो पाता है। वासा प्रीविया की स्थिति शिशु के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है क्योंकि इसमें शिशु का काफी रक्त बह सकता है और उसे ऑक्सीजन की कमी हो सकती है।

जब गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग होने लगे

आपको स्पॉटिंग हो या ब्लीडिंग, लेकिन जब आप गर्भवती होती हैं तो कितनी भी मात्रा में रक्त निकलना मुश्किल का संकेत हो सकता है, इसलिए अपने डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर दें। इसलिए अगर गर्भावस्था के दौरान आपको ब्लड डिस्चार्ज दिखे तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

- पैड जरूर लगाएं, जिससे आपको पता चले कि आपको कितनी ब्लीडिंग हो रही है और आप निकलने वाले रक्त का प्रकार जान सकें (उदाहरण के लिए गुलाबी, भूरा या लाल, तरल है या फिर थक्के निकल रहे हैं)। मुमकिन है कि इस स्थिति में आप बहुत घबरा जाएं लेकिन ऐसा करने से आपके डॉक्टर को स्थिति की गंभीरता को जल्दी पहचानने में काफी मदद मिलेगी।

- आपकी योनि से निकलने वाले रक्त की कुछ कोशिकाएं अपने डॉक्टर को जांच के लिए उपलब्ध कराएं।

- अगर आपको गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग हो तो टैंपून के इस्तेमाल से परेहज करें।

- अगर आपको स्पॉटिंग या ब्लीडिंग हो रही है तो यौन संबंध बनाने से परहेज़ करें।

- अगर आपको पहले भी गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग/स्पॉटिंग हुई और अब रुक चुकी है तो भी डॉक्टर को ज़रूर बताएं।

- लक्षणों पर ध्यान दें जैसे पेट में मरोड़ उठना, पीठ में दर्द, अत्यधिक उलटी और स्पॉटिंग के साथ बेहोशी छाना।

ब्लीडिंग/स्पॉटिंग की वजह की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित कर सकता है:

  • क्लीनिकल जांच कर सकता है
  • अल्ट्रासाउंड स्कैन कर सकता है
  • पेशाब और रक्त की जांच कर सकता है, जिससे गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोन स्तर की जांच कर सकता है
  • आपके ब्लड ग्रुप और आरएच स्तर, संपूर्ण ब्लड काउंट और क्लॉटिंग समय की जांच कर सकता है

नतीजों के आधार पर ब्लीडिंग की जांच का पता लगाने के लिए आगे भी कुछ परीक्षण किए जा सकते हैं।

अगर आपको गर्भावस्था की शुरूआत में शौच के दौरान कुछ ब्लीडिंग दिखाई दे तो घबराएं नहीं बल्कि अपने डॉक्टर को इसकी जानकारी दें। इसकी संभावना है कि वह आपको पैर ऊपर कर आराम करने की सलाह दे सकते हैं, जिससे आप फिर अपने आराम से घूम-फिर सकें और अपनी गर्भावस्था का पूरा लुत्फ उठा सकें।

अगर गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग के बारे में आपको कोई अतिरिक्त जानकारी, सवाल या टिप्पणी है तो नीचे दिए गए टिप्पणी बॉक्स में साझा करें।