abortion- क्या pregnancy के दौरान food poisioning से हो सकता है?

lead image
src=http://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2015/12/Screen Shot 2015 07 10 at 1.06.15 PM.jpg abortion  क्या pregnancy के दौरान food poisioning से हो सकता है?

50% प्रेगनेंसी गर्भपात का शिकार हो जाती हैं

प्रेगनेंसी के दौरान फूड पॉइजनिंग से हो सकता है गर्भपात

कई अनजानी वजहों से भी गर्भपात हो सकता है। जानने के लिए पढ़ें

 

गर्भपात का दुख झेलना भावी अभिभावकों के लिए काफी मुश्किल समय हो सकता है। अक्सर ऐसा होता है कि गर्भवती महिलाएं गर्भपात के लिए खुद को ही दोषी ठहराती हैं और इस ग्लानि के साथ जीती हैं। गर्भपात काफी दिल तोड़ने वाला साबित हो सकता है लेकिन यह समझना बहुत जरूरी है कि गर्भपात पूरी तरह से अनैच्छिक होते हैं।

 

वेबएमडी के अनुसार गर्भधारण के करीब 50 फीसदी मामलों में गर्भपात हो जाता है और वह भी महिला का मासिक धर्म होने से पहले। जिन मामलों में महिलाओं को गर्भवती होने की जानकारी होती है उनमें से करीब 15 मामलों में गर्भपात हो जाता है। हम आपको बताते हैं गर्भपात की कई वजहों के बारे में।

पहले तीन महीनों में गर्भपात की वजहें

 

क्रोमोसोम संबंधी विकार

बेंगलुरू स्थित कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल की कंसल्टेंट (ऑब्सटेट्रिक्स व गायनेकोलॉजी) डॉ. सीता राजन कुमार कहती हैं, ’’गर्भधारण के पहले तीन महीने में गर्भपात की सबसे आम वजह भू्रण में एन्युप्लोइडी या क्रोमोसोम संबंधी विकार हो सकती है।’’ कभी-कभी गर्भधारण के दौरान भ्रूण में असामान्य संख्या में क्रोमोसोम आ जाते हैं। आमतौर पर इसका संकेत होता है कि भ्रूण शायद सामान्य ढंग से विकसित नहीं हो सके और इसलिए गर्भपात हो जाता है।

 

थाइरॉयड असामान्यता

हाइपो या हाइपरथाइरॉयडिज़्म के प्रभाव गर्भाशय में विकसित हो रहे भ्रूण के लिए काफी जोखिम भी परिस्थितियां उत्पन्न कर देते हैं। थाइरॉयड असामान्यता गर्भावस्था के हॉर्मोन में हस्तक्षेप करती है और भू्रण को विकसित नहीं होने देती। हाइपरथाइरॉयडिज़्म की वजह से गर्भपात का जोखिम बढ़ जाता है, जबकि हाइपोथाइरॉडिज़्म का भू्रण पर जो प्रभाव पड़ता है वह लंबी अवधि तक रहते हैं विशेष तौर पर क्योंकि मस्तिषक और भू्रण के सामान्य विकास के लिए थाइरॉयड हॉर्मोन बहुत महत्वपूर्ण होता है।

 

इम्युनोलॉजी संबंधी कारक

कुछ मामलों में महिला का शरीर गर्भधारण को एक बाहरी वस्तु की तरह देखता है। आमतौर पर फर्टिलाइज़्ड अंडा महिला के शरीर को एंटीबॉडीज़ नहीं भेजने का एक संदेश देता है। लेकिन कुछ मामलों में इसका विकास अनुमान के अनुसार नहीं होता और एंटीबॉडीज़ भू्रण पर हमला कर उसे नष्ट कर देती हैं।

 

कुछ दवाओं या शराब का गलत इस्तेमाल

शराब, निकोटिन और कुछ दवाओं में मौजूद तत्व प्लेसेंटा को पार कर जाते हैं और भ्रूण के विकास में अवरोध पैदा करता है। गर्भधारण की योजना बनाने से पहले अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने से अस्वस्थ जीवनशैली के कारण होने वाले गर्भपात का जोखिम कम हो सकता है।

 

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस)

इस बीमारी की वजह से अंडे की गुणवत्ता खराब होने लगती है। पीसीओएस ही इंसुलिन प्रतिरोध के लिए जिम्मेदार होता है, जो एंडोमीट्रियल लाइनिंग को अच्छी तरह परिपक्व होने से रोकता है और इस तरह गर्भपात हो जाता है।

 

दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान गर्भपात की वजहें जानने के लिए आगे पढ़ती रहें

 

src=http://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2015/12/shutterstock 132280757.jpg abortion  क्या pregnancy के दौरान food poisioning से हो सकता है?

दूसरी तिमाही में गर्भपात की वजहें

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान गर्भपात कभी-कभार ही होता है और इसकी वजह माता के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। इसकी वजह निम्नलिखित में से कुछ भी हो सकती है:

प्लेसेंटा तक अपर्याप्त रक्त प्रवाह

भू्रण तक अपर्याप्त रक्त प्रवाह की वजह से उसका विकास धीमा पड़ सकता है क्योंकि ऐसा होने पर भू्रण तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति नहीं हो पाती है। इसकी वजह माता में वैस्कुलर संबंधी विकार या डायबिटीज़ या फिर नशीले पदार्थों का इस्तेमाल हो सकता है। डॉ. कुमार कहती हैं, ‘‘इसकी वजह क्रोमोसोम संबंधी विकार भी हो सकते हैं, जिसकी वजह से रक्त के थक्के बन जाते हैं और प्लेसेंटा तक रक्त प्रवाह रूक जाता है।’’

 

रक्त में शुगर स्तर का बढ़ना

रक्त में शुगर स्तर बढ़ने से इंसुलिन की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ जाती है, जिससे भू्रण के विकास के लिए प्रतिकूल माहौल बन जाता है।

 

कमज़ोर सर्विक्स या सर्वाइकल अयोग्यता

अगर सर्विक्स कमज़ोर हो तो विकसित हो रहे भू्रण के कारण यह फूल सकता है। इस वजह से यह भू्रण को संभालकर नहीं रख पाता है और गर्भपात हो जाता है।

 

असामान्य आकार का गर्भाशय

एक असामान्य आकार के गर्भाशय में भू्रण को पर्याप्त मात्रा में पोषण नहीं मिल पाता, जिस वजह से उसका विकास नहीं होता और गर्भपात हो जाता है।

 

बैक्टीरियल वैजाइनोसिस, साइटोमिगेलोवायरस, गोनोरिया, सिफिलिस, मलेरिया या एचआईवी जैसे संक्रमण

कुछ बैक्टीरिया संक्रमणों के कारण गर्भाशय की अंदरूनी लाइनिंग में जलन हो सकती है, जिससे भू्रण का विकास बहुत मुश्किल हो जाता है।

 

संक्रमित भोजन का सेवन करने से हुई फूड पॉइज़निंग

भोजन (कच्चा मांस या बिना पके भोजन) में कुछ हानिकारिक पदार्थ मौजूद हो सकते हैं, जिससे माता को फूड पाइजनिंग हो सकती है। ऐसी स्थिति में शरीर से निकलने वाले हानिकारक पदार्थ काफी तेजी से भू्रण तक पहुंचकर उसके विकास में अवरोध उत्पन्न कर सकते हैं।

 

तीसरी तिमाही में गर्भपात की वजहें

ऐसे मामले बहुत ही दुर्लभ होते हैं। इस अवधि में गर्भपात के ज्यादातर मामले अम्बिलिकल कॉर्ड में जटिलता की वजह से होते हैं जैसे कॉर्ड का उलझना और इस स्थिति में शिशु को ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है या फिर गर्भाशय खुद इससे अलग हो जाता है।

 

गर्भपात के बाद महिला करीब दो या उससे अधिक मासिक धर्मों के बाद फिर गर्भधारण की कोशिश कर सकती है। लेकिन अगर उसे पहले से ही कोई चिकित्सकीय समस्या है तो उस स्थिति में डॉक्टर उन्हें पहले इस बीमारी के पूरी तरह ठीक होने और फिर गर्भधारण की कोशिश करने की सलाह दे सकते हैं।

 

लगभग सभी महिलाएं गर्भपात के बाद भी स्वस्थ गर्भधारण और डिलीवरी का आनंद ले सकती हैं। इसलिए अगर आपको यह बात बेचैन कर रही है कि गर्भपात के बाद आप सफलतापूर्वक गर्भधारण और डिलीवरी कर सकती हैं, तो घबराएं नहीं सिर्फ धैर्य रखकर अपने डॉक्टर द्वारा दिए गए सुझावों का पालन करें और स्वस्थ शिशु का स्वागत करें!

 

 

अगर आपके पास गर्भपात से जुड़े कोई भी सवाल हैं तो कृपया नीचे दिए गए टिप्पणी बॉक्स में पूछें।