abortion के बाद अपनी wife से क्या ‘नहीं’ कहें

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विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्भपात के बाद महिला के जीवन में खुशियां लाने में उनके साथी क्‍या भूमिका निभा सकते हैं। वे ऐसा कैसे कर सकते हैं, जानने के लिए पढ़ें।

 

दिल्‍ली में कार्यरत ग्राफिक डिजाइनर दीप्‍ना मित्‍तल को इस साल जनवरी में बेहद दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना करना पड़ा।लगभग एक साल की कोशिश के बाद दीप्‍ना फिर गर्भवती हुई। लेकिन शायद किस्‍मत को यह मंजूर नहीं था और गर्भावस्‍था की दूसरी तिमाही में उनका फिर गर्भपात हो गया।

अपने पति का हाथ पकड़कर बैठी दीप्‍नाबेहद शांत भाव से उस समय को याद करते हुए बताती हैं,‘ यह कहना कि वह बहुत मुश्किल दौर था, काफी नहीं है। मैं पूरी तरह टूट चुकी थी और मेरा परिवार मुझे खुश रखने की हर संभव व मुमकिन कोशिश कर रहा था। लेकिन इस मुश्किल दौर में सिर्फ एक व्‍यक्तिबिसरी बातों को भुलाकर सकारात्‍मकता के साथ आगे बढ़नेमें मेरी मदद कर रहे थे और वह थे मेरे पति रजत।

रजत बताते हैं,‘जो कुछ भी हुआ वह अब गुजरे जमाने की बात है। मेरी पत्‍नी मेरे लिए उस बच्‍चे से कहीं ज्‍़यादा महत्‍वपूर्ण है,जिसकी किस्‍मत में शायद इस दुनिया में आना ही नहीं था।डॉक्‍टर ने इस युगल को अगस्‍त के बाद फिर गर्भधारण की कोशिश करने की सलाह दी। दीप्‍ना बताती हैं,‘जब तक रजत मेरे साथ हैं मुझे पता है कि परेशान होने की ज़रूरत नहीं है।

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गर्भपात के बाद महिला अंदर ही अंदर दुख महसूस करती है। मुंबई में रहने वाली एक ग्रीफ काउंसलर बताती हैं,‘इस दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना से जो तकलीफ व दुख महिला को होता है,उसका अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किलहै। इस बेहद महत्‍वपूर्ण परिस्थिति में महिलाओं को उनके साथी के समर्थन की ज़रूरत होती है क्‍योंकि यह सिर्फ विश्‍वास की बात नहीं है बल्कि यह उन्‍हें भरोसा दिलाता है, कि वहएक बार फिर गर्भधारण की कोशिश कर सकती हैं।ऐसा नहीं है कि इस तरह के सदमे से आपका साथी आपको तुरंत निकाल लेगा लेकिन महिला की ज़रूरतों के प्रति संवेदनशीलता रखने और उनके साथ अधिक समय बिताने से उन्‍हें इस दर्द को भूलने में मदद मिलेगी और सोच में सकारात्‍मकता आएगी।

साथी का साथ महिला को धीरे धीरे उसके पहले अवतार में ला सकता है

अगर किसी महिला का गर्भपात हो जाता है तो विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस तरह की भावनात्‍मक चोट से उन्‍हें उबारने के लिए उनके साथी को जितनी जल्‍दी मुमकिन हो उन्‍हें निकालने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसा नहीं किया गया तो यह  भावनात्‍मक दुख महिला के लिए बेहद गंभीर साबित हो सकता है।

ईसाइक्‍लीनिक डॉट कॉम में गाइनैकोलॉजिस्‍ट डॉ. प्रियंका मेहता बताती हैं,‘गर्भपात के बाद मुमकिन है कि महिला व उनके साथी व्‍यावहारिक मुद्दों को निपटाने में व्‍यस्‍त हो जाएं : जैसे दूसरों को यह दुखद समाचार देना, घर की देखभाल करना और किसी अन्‍य बच्‍चे का खयाल रखना।कुछ युगलों को लगता है कि व्‍यावहारिक मामलों पर ध्‍यान देकर वे इस दुख से आसानी से निपट सकते है। लेकिन ऐसा करने से आपका तनाव भी बढ़ सकता है। वह बताती हैं कि ऐसे मामलों में किसी की मदद लेना हमेशा अच्‍छा रहता है।

जलाली कहती हैं,‘उद्देश्‍य खुशियों को जीवन में फिर लाना है। इस भावनात्‍मक दुख से जूझ रही अपनी साथी को सामान्‍य करने के लिए वह सब कुछ करें, जो इस दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना से पहले उन्‍हें करना अच्‍छा लगता था। दर्द भरने का मतलब उसे भूलना नहीं होता बल्कि जो भी कुछ हुआ उसे स्‍वीकार कर आगे बढ़ना होता है। उपर्युक्‍त दी गई सलाह को ध्‍यान में रखकर उस पर अमल करने से साथी को अहसास होगा कि एक बार फिर उनका जोड़ा खुशनुमा रहने लगा है। इस दुख से आपको निकलने का रामबाण या कोई जादू की छड़ी नहीं है, धीरे धीरे इस दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करें।

गर्भपात के बाद महिला के साथी को क्‍या करना चाहिए और क्‍या नहीं जानने के लिए पढ़ना जारी रखें

गर्भपात के दौरान साथी को क्‍या करना चाहिए और क्‍या नहीं

विशेषज्ञ बता रहे हैं गर्भपात के बाद 7 निम्‍नलिखित क्‍या करें और क्‍या नहीं करें, विशेष तौर पर महिला के साथी के लिए।

 क्‍या करें

  • अपनी पत्‍नी के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं ;आपके साथ से वह धीरे –धीरे वह पहले जैसी सामान्‍य हो जाएंगी।
  • उनकी समस्‍याओं को सुनें। उन्‍हें विश्‍वास दिलाएं कि आप हर कदम पर उनके साथ हैं, चाहे वह रोएं या फिर बार-बार अपना दुख आपको बताएं। बातचीत करना, उन्‍हें विश्‍वास दिलाना और उनकी बातों को ध्‍यान से सुनने से आपको एक –दूसरे की भावनाएं समझने और इस दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना को स्‍वीकार कर आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
  • कुछ पुरुष गर्भपात के बाद महिला साथी को सहज महसूस कराने के लिए मजबूती से चुपचाप अपनी सपोर्टिव भूमिका निभाते हैं। वे उन पर किसी भी प्रकार की जि़म्‍मेदारी डालने के बजाय उन्‍हें आगंतुकों और इस बारे में पूछने वाले फोन कॉल से भी सुरक्षित रखते हैं।
  • घर के रोज़मर्रा के काम में उनकी मदद करते हैं क्‍योंकि वह भावनात्‍मक तौर पर सुन्‍न महसूस कर रही होती हैं, जिस वजह से उनके काम करने की रफ्तार सुस्‍त हो जाती है।

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  • सुनिश्चित करें कि आप उनकी जिम्‍मेदारियों पर नज़र रखें; चाहे वह घर पर हो, काम पर हो, माता-पिता, बच्‍चों और स्‍टाफ के लिए हो।
  • जब वह धीरे-धीरे सामान्‍य दिनचर्या में लौटने लगें तो उन्‍हें प्रोत्‍साहित करें क्‍योंकि हर किसी का दुख जताने का तरीका अलग होता है और आपको इसका पता तब तक नहीं चलेगा, जब तक वास्‍तविकता में आप इसका अनुभव नहीं करें।
  • इस दुख से उबरने में एक-दूसरे की मदद करें और जानने की कोशिश करें कि उन्‍हें कैसा लग रहा है। सुनें कि आपके साथी क्‍या कह रहे हैं। कुछ महिलाएं अपने अनुभव के बारे में बात करना चाहती हैं जबकि कुछ महिलाओं को इस बारे में बात करना बड़ी पीड़ादायक लगता है। वह कैसा महसूस कर रही हैं इस बारे में किसी डॉक्‍टर या सलाहकार से बात करना वास्‍तव में मददगार साबित हो सकता है और इसे प्रोत्‍साहित करना चाहिए।

 क्‍या नहीं करें

  • अपनी साथी से हमदर्दी की उम्‍मीद नहीं करें क्‍योंकि उनका दर्द आपसे कहीं ज्‍़यादा है। वह शारीरिक और भावनात्‍मक तौर पर हुए नुकसान से जूझ रही हैं।इसलिए जब वह अपना दुख आपसे साझा करें तो आप अपना दुख उनके सामने बयां नहीं करें। बस आप उनके साथ हर मुश्किल में खड़े रहें।
  • उन्‍हें भाषण देने और तर्कों के आधार पर बात करने की कोशिश नहीं करें क्‍योंकि इससे वे सहज़ नहीं बल्कि और खराब महसूस करेंगी जैसे यह कहना शिशु के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था- क्‍योंकि इससे उनके अंदर का खालीपन और बढ़ जाएगा।
  • अधीर नहीं हों। गर्भपात से गुजरने वाली महिलाएं, जो कुछ भी हुआ उस बारे में बार-बार बात करने से बेहतर महसूस करती हैं।
  • इस दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना को भूलकर आगे बढ़ने में मदद करने के लिए ऐसा व्‍यवहार या बातचीत बिल्‍कुल नहीं करें कि कुछ हुआ ही नहीं हो। ऐसा करना बिल्‍कुल भी ठीक नहीं है क्‍योंकि उन्‍हें इस दुख को स्‍वीकार कर ही आगे बढ़ना होगा – विशेष तौर पर इस दुखद अनुभव के बाद, जो कई बार पोस्‍ट ट्रॉमेटिक स्‍ट्रेस डिसऑर्डर जितना गंभीर हो सकता है।
  • अगर वह अपना अनुभव बयां करते हुए रोए या बात करें तो उन्‍हें रोकने की कोशिश नहीं करें क्‍योंकि रोने और भावनाएं व्‍यक्‍त करने से वे बेहतर महसूस करेंगी।
  • ग्‍लानि महसूस नहीं करें। दोनों ही साथियों में यह भाव होता है और समय व अच्‍छे साथ के साथ यह बुरा दौर भी गुज़र जाएगा।महिलाएं ग्‍लानि का अनुभव कर सकती हैं और जो कुछ भी हुआ उसके लिए अक्‍सर वे खुद को जिम्‍मेदार ठहराती हैं कि उन्‍होंने क्‍या गलत किया या क्‍या सही।
  • अगर हालात नहीं सुधर रहे हैं तो जल्‍द से जल्‍द किसी सलाहकार से मदद लेने से गुरेज़ नहीं करें। कुछ महिलाओं के लिए उनके गर्भपात की सही वजह जाने बिना आगे बढ़ना बहुत मुश्किल लगता है। अगर आपकोऐसा लगता है कि आपकी पत्‍नी में भावनात्‍मक व शारीरिक तौर पर कोई सुधार नहीं दिख रहा है तो पेशेवर की मदद लें, काउंसलर से बात करें या जितनी जल्‍दी मुमकि‍न हो चिकित्‍सकीय मदद लें।

गर्भपात होना बेहद व्‍यक्तिगत अनुभव होता है, जिसका असर हर किसी पर बिल्‍कुल अलग होता है। कुछ महिलाओं को इस अनुभव से बाहर निकलने में ज्‍यादा समय लग सकता है, जबकि कुछ अपने जीवनसाथी की मदद से जल्‍दी ही इस मुसीबत से निकल जाती हैं। जलाली कहती हैं जीवनसाथी को एक-दूसरे के साथ रहना चाहिए, उनका साथ सच्‍चा होना चाहिए और महिलाओं की सभी समस्‍याओं के प्रति उन्‍हें संवेदनशील रहना चाहिए। अच्‍छा रहता है कि जीवनसाथी बातचीत के लिए हमेशा तैयार रहे। जलाली कहती हैं,‘जीवनसाथी को बेहद धैर्यवान और समझदार होना चाहिए। उन्‍हें विशेष तौर पर यह ध्‍यान रखना चाहिए कि महिला में भावनात्‍मक स्‍तर पर सुधार हो रहा है या नहीं।

अगर आपके पास गर्भपात की स्थिति में जीवनसाथी के साथ से जुड़ा कोई सवाल है तो कृपया नीचे दिए गए बॉक्‍स में पूछे।