क्रूरता की हद: 28 साल की MBA छात्रा ने फांसी लगाकर दी जान..दहेज के लिए ससुराल वाले करते थे मारपीट

दीपेंशा शर्मा एमकॉम और एमबीए करने के बाद बीएड कर रही थीं। उनकी एक डेढ़ साल की बेटी भी थी लेकिन बदकिस्मती से उन्हें यह रास्ता चुनना पड़ा।

20 साल की नई नवेली दुल्हन साल्शा के फांसी लगाने के कुछ सप्ताह के बाद एक और ऐसी ही दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। दिल्ली की 28 साल की एमबीए ग्रेजुएट फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।

सबसे ज्यादा शॉकिंग बात ये रही कि वो एक डेढ़ साल की बच्ची की मां भी थी।

पूर्वी दिल्ली की रहने वाली दीपेंशा शर्मा सिर्फ एमबीए नहीं बल्कि एमकॉम भी की हुई थीं और बीएड कर रही थीं क्योंकि वो सरकारी नौकरी चाहती थीं।

कई शिक्षित लोग इतनी पढ़ी लिखी लड़की के होने की वजह से गर्व महसूस कर सकते हैं लेकिन उनका एकेडेमिक ससुराल वालों के लिए बिल्कुल भी मायने नहीं रखता था।

कैसे हुई प्रताड़ना की शुरूआत?

दीपेंशा शर्मा की 2014 में शादी हुई थी और वो एक कॉलेज में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर काम करती थीं लेकिन उनके पति एक न्यूज चैनल में तकनीकी टीम में थे और दीपेंशा को नौकरी छोड़ने को कहा था।

दीपेंशा के पिता राकेश शर्मा ने PTI से बातचीत के दौरान कहा कि मेरी बेटी ग्रेटर नोएडा में बतौर प्रोफेसर काम करती थी लेकिन उन्होंने नौकरी छुड़वा दी और उसे सरकारी नौकरी की तैयारी करने को कहा।

दीपेंशा के पिता ने ये भी खुलासा किया है उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।  

उनके पिता ने कहा कि दीपेंशा हमारे पास ससुराल वालों द्वारा शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने के बाद परेशान होकर कई बार आती थी। लेकिन वो बार-बार हमें विश्वास दिला देते थे कि फिर से परेशान नहीं किया जाएगा।“  वो असल में पीएचडी करना चाहती थी लेकिन उसके पति चाहते थे कि वो BEd करे।

पति नहीं पूरी करते थे जरूरत

बदकिस्मती से उनके पति ने उन्हें वो करने को मजबूर किया जो वो नहीं करना चाहती थी। यहां तक कि पति ने उसे कहा कि पिता को पढ़ाई का खर्च उठाने को कहा।

उन्होंने शेयर किया कि मैं 20000-25000 रूपए हमेशा देते रहता था। बेटी के जन्म के बाद भी पति का व्यवहार नहीं बदला।

उन्होंने रक्षाबंधन पर भी दीपेंशा को 12000 रूपए दिए लेकिन ससुराल इस कम रकमसे नाराज थे।

और आखिरकार सोमवार की काली रात को परिवार वालों को कॉल आया कि उनकी बेटी ने खुद को कमरे में बंद कर लिया है और बाहर नहीं आ रही है। 

जब तक वो घर पहुंचते और कमरे का दरवाजा तोड़ा गया तब तक वो फांसी लगाकर जान दे चुकी थी।

दीपेंशा की मौत के बाद IPC सेक्शन 304बी के तहत (दहेज हत्या) मामला दर्ज किया गया। इसमें अंर्तगत उम्र कैद की सजा दी जा सकती है।

हालांकि यह कह पाना मुश्किल है कि आखिरकार ऐसा क्या हुआ कि दीपेंशा ने फांसी लगाकर जान दे दी। दीपेंशा शायद खुद को मजबूर महसूस करती थी और अपने पैरेंट्स को अधिक अपमानित नहीं करना चाहती थी।

पढ़े लिखे शहरी भारत में बढ़ रही दहेज हत्या!

बदकिस्मती से देश में दहेज हत्या बढ़ रही है और खासकर राजधानी दिल्ली में इसकी संख्या बढ़ रही है। कई कठिन कानून होने के बाद भी इस पर आज तक काबू नहीं किया जा सकता है। NCRB (NCRB) के अनुसार 2015 में 7634 महिलाएं दहेज प्रताड़ना के कारण मौत की शिकार होंगी।

दिल्ली पुलिस के अनुसार 31 महिलाएं सिर्फ देश की राजधानी में दहेज प्रताड़ना का शिकार हो चुकी हैं।

ये दिल दहलाने वाली संख्या हमें याद दिलाते हैं कि हम कैसे बहुओं के साथ व्यवहार करते हैं। हमें जबरदस्ती कानून की वजह से उनके साथ साधारण इंसानों जैसा व्यवहार करना पड़ता है।

ये तो सिर्फ समय बताएगा कि बहुओं को कभी भी वो आजादी मिल पाएगी या नहीं जो दामाद को मिलता है।