क्यों होता है बेबी का अनोमली स्कैन (anomaly scan) ...जानिए विस्तार से

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अनोमली स्कैन असल में बेबी की हड्डी, दिल, मस्तिष्क, स्पाइनल कॉर्ड, चेहरा और पेट को देखने के लिए किया जाता है।

 

प्रेग्नेंसी किट पर बनीं दो लाइन जब बता देती है कि आप प्रेग्नेंट हैं तभी से आपका एक एडवेंचरस और एक्साइटमेंट से भरा सफर शुरु हो जाता है। पेट में बेबी का किक मारना,स्पेशल कपड़े, रात में ना सो पाना, मॉर्निंग सिकनेस, पैरों में सूजन सहित कई नई चीजें आप पहली बार अनुभव करती हैं

हर तिमाही के साथ मां के दिमाग में कई सवाल आते हैं। सबसे महत्वपूर्ण स्कैन जो पैरेंट्स के मन में जिज्ञासा पैदा करती है वो हैं अनीमोली स्कैन। हमने डॉ तेजस कपाड़िया,कंसलटेंट से बात की ताकि हम अनीमोली स्कैन के बारे में अधिक जान सकें।

अनीमोली स्कैन

src=https://www.theindusparent.com/wp content/uploads/2017/11/Anomaly scan 1.jpg क्यों होता है बेबी का अनोमली स्कैन (anomaly scan) ...जानिए विस्तार से

अनीमोली स्कैन का अर्थ है कि सामान्य या कैजुअल से भटक जाना। इसका प्रयोग भ्रूण की विसंगतियों को चेक करने के लिए किया जाता है। ये सोनोलोजिस्ट परफॉर्म करते हैं ताकि पता चले कि बच्चे में कोई असामनात तो नहीं है।

क्यों होता है अनीमोली स्कैन

हालांकि अनीमोली स्कैन करना हर प्रेग्नेंसी में जरुरी होता है लेकिन कुछ डॉक्टर्स इस पर जोर नहीं देते हैं। ये आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप स्कैन करना चाहते हैं या नहीं। ये स्कैन बहुत महत्वपूर्ण है और 18-24 सप्ताह के बीच में किया जाता है। 

डॉक्टर्स इसे 18-20th सप्ताह में करवाने की सलाह देते हैं क्योंकि कानूनी रूप से 20वें सप्ताह के बाद गर्भपात नहीं किया जा सकता है। 

क्या होता है स्कैन में

इस स्कैन की मदद से बेबी की शारीरिक असमानताएं का पता चलता है लेकिन सभी शारीरिक असमानताओं को पता नहीं चलता है। इस स्कैन से बेबी की हड्डी, दिल, मस्तिष्क, स्पाइनल कॉर्ड, चेहरा, किडनी आदि का पता चलता है। 

इससे कई और स्थितियों का पता चलता है जैसे ऐनिन्सेफली, ओपन स्पिना बिफिडा, क्लेफ्ट लिप, डायफ्रैगमेटिक हार्निया, गैस,gastrochisis, एडवर्ड सिंड्रोम (T18) और Patau's सिंड्रोम (T13) का पता चलता है। 

कार्डिक अनीमोली अगर 20वें सप्ताह तक में नहीं हो पाता है तो दुविधा की स्थिति में 24वें सप्ताह में हृदय संरचना का पता चलता है। 

 

अगन नॉर्मल ना हो अनीमोली स्कैन

अगर समस्या क्लेफ्ट लिप जैसी गंभीर नहीं है तो डॉक्टर हो सकता है आपको जरुरी कदम उठान को बोलें। कई लक्षण ऐसे होते हैं जो जन्म के बाद सर्जरी से ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर समस्या काफी गंभीर और जिंदगी को खतरे में डालने वाली हो और इसका इलाज ना हो तो डॉक्टर प्रेग्नेंसी को आगे ले जाना चाहते हैं या नहीं ये आपके ऊपर छोड़ देते हैं। 

कहां होता है अनीमोली स्कैन?

आपकी गाइनोक्लॉजिस्ट आपको अच्छे से गाइड करेंगे कि आपको कहां स्कैन करवाना चाहिए। ज्यादातर निजी अस्पताल और डाइगोन्साटिक सेंटर अनीमोली स्कैन करते हैं लेकिन सबसे बेहतर होगा कि आप अप्वाइंटमेंट लेने से पहले बुकिंग करें। 

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अनीमोली स्कैन का है शुल्क?

ज्यादातर अनीमोली स्कैन प्राइवेट क्लिनिक/अस्पताल 2500-3500 के बीच होता है। सरकारी अस्पताल में भी 100-500 रुपए में हो जाते हैं। 

अनीमोली स्कैन से जुड़े 5 सवाल

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1)क्या स्कैन से पहले पेट का खाली होना जरुरी है?

नहीं, इसकी जरुरत नहीं है। 

2)क्या स्कैन से पहले ब्लाडर फुल होने की जरुरत है?

कुछ सोनोलोजिस्ट फुल ब्लॉडर में स्कैन करना चाहते हैं तो कुछ सोनोलोजिस्ट ऐसी कोई डिमांड नहीं करते हैं। 

3) कितने दिन में पता चलता है रिजल्ट?

ज्यादातर सोनोलोजिस्ट जो स्कैन करते हैं वो नजर आने वाली समस्याएं तुंरत ही बता देते हैं लेकिन रिपोर्ट 2-3 दिन में दिया जाता है। 

4) क्या स्कैन से मां और बच्चे को नुकसान पहुंचता है?

अभी तक ऐसा कोई प्रूफ या रिर्सच नहीं हुआ है जिससे पता चले कि बच्चे या मां को नुकसान अनीमोली स्कैन से नुकसान पहुंचता है। 

5) क्या स्कैन से डाउन सिंड्रोम का पता चलता है? 

डॉ तेजस कपाड़िया (कंस्लटेंट रेडियोलॉजिस्ट) का कहना है कि "अनीमोली स्कैन से डाउन सिंड्रोम का पता जरुर चलता है लेकिन इसकी भी संभावना है कि बेबी के पोजिशन की वजह से सबकुछ साफ-साफ नजर ना आए। आजकल ट्रिपल मेकर टेस्ट करने का चलन है जो 12-18 सप्ताह में होता है और इससे क्रोमोजोमल डिस्ऑर्डर का पता चलता है।"