क्यों आपके बेबी को है अच्छी नींद की आवश्यकता?

हम सभी जानते हैं कि नींद का हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। चाहे वो मानसिक, शारीरिक या भावनात्मक स्तर पर हो। लेकिन बच्चों के विकास में नींद की क्या भूमिका होती है?

आपको आख़िरी बार ऐसा कब लगा था कि आपने सच में एक अच्छी नींद ली है ? मम्मियों की इसपर अलग अलग राय है  - किसी के लिए रात में 2-3 बार उठना साधारण बात है, तो कुछ मम्मियां लगातार 8 घंटे की नींद की भूखी होती है।

हर 3 घंटे में उठना यदि आपको साधारण ही नहीं बल्कि स्वर्गीय लगता है, तो निश्चित रूप से आप एक नवजात शिशु की माता हैं । लेकिन हां, पूरी रात सोने का सपना देखना छोडियें मत। याद रहें...

उम्र के अनुसार बच्चों के सोने का अलग पैटर्न होता है |

शिशुओं की circadian rhythm के बारे में अधिक जानकारी देनेवाली वेबसाईट sleepfoundation.org, childdevelopmentinfo.com तथा sleepreviewmag.com के एक आर्टिकल में शिशुओं की नींद के पैटर्न के बारे में विस्तार से समझाया गया है |

  • 3 महीने की उम्र तक के बच्चे 14 से 17 घंटे की नींद लेते हैं। हालांकि ये अलग भी हो सकता है। 11 घंटे से कम या 19 घंटे से ज्यादा की नींद आइडियल नहीं मानी जाती है। बच्चे लगातार 4 घंटे से अधिक नहीं सो सकते हैं।
  • कई बच्चे 3 से 6 महीने के बीच रात में सोते हैं लेकिन रात में वो दो-तीन बार जागते हैं। circadian rhythm के अनुसार बच्चों की नींद जगह और समय पर भी निर्भर करती है। circadian rhythm शरीर के अंदर की मान लें एक घड़ी जैसी होती है जो रोशनी के रहने ना रहने पर भी निर्भर करती है।
  • एक बार जब बच्चे तीन महीने के हो जाते हैं तो वो 12 से 15 घंटे की नींद लेते हैं और कुछ बच्चे 11 महीने तक 12-15 घंटे तक सोते हैं। 6-11 महीने के बच्चे दिन में भी सोते हैं। वो 30 मिनट से लेकर 2 घंटे तक भी सो सकते हैं। कुछ बच्चे दिन भर में 3-4 बार सोते हैं।
  • पहले जन्मदिन यानि कि एक साल होने के बाद वो दिन भर में 11 से 14 घंटे तक सोते हैं। ये पैटर्न लगभग 2 साल तक रहता है। दिन में भी उनके सोने का समय घटकर तीन घंटा हो जाता है।

मेरे बच्चे को कितने घंटो की नींद लेनी चाहिए और ये क्यों जरूरी है?

नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार 3 महीने तक के बच्चों को कम से कम 11 घंटे की नींद लेनी चाहिए जबकि 4 महीने के बच्चों को कम से कम 11 घंटे की नींद लेनी चाहिए । छोटे बच्चों को 9 घंटे की नींद बहुत जरूरी होती है। बच्चों के लिए कम से कम 9 घंटे की नींद बहुत जरूरी है।

नेशनल हार्ट, फेफड़े और ब्लड संस्थान के अनुसार नींद बच्चों के लिए सबसे जरूरी है। बच्चे अगर गहरी नींद लेते हैं तो प्राकृतिक रूप से उनका विकास होता है। इससे उनकी मांसपेशियों का विकास होता है और शरीर भी मजबूत होता है।

अच्छी नींद लेने के कई फायदे होते हैं जैसे:

  • सीखने की कला
  • समस्या को समाधान करने का कौशल
  • ध्यान अधिक देना
  • फैसला लेने की क्षमता
  • सृजनात्मकता

क्या है बुरा स्लिपिंग पैटर्न?

जितनी नींद की जरूरत है अगर बेबी उतना ना सो पाए तो इसे बुरा स्लिपिंग पैटर्न बोलते हैं जिसके काफी अस्वस्थ्य तरीका माना जाता है। इससे बच्चों के हेल्थ पर काफी बुरा असर पड़ता है।

कम नींद लेने का कैसे पड़ता है असर

अगर बेबी कम नींद ले तो उनकी रोजमर्रा की एक्टिविटी पर असर पड़ता है। कम नींद लेने से बच्चे दुनिया को हस्तक्षेप की नजरों से देखते हैं। डॉ शैली विस ने Better Sleep for Your Baby and Child: A Parent's Step-by-Step Guide to Healthy Sleep Habits’ में लिखा है कि नींद की कमी के कारण उनके स्वास्थ्य, अटेंशन, सीखने की कला और यादाश्त पर असर पड़ता है। इसके अलावा उनकी सक्रियता, आवेग और साथ ही कम संज्ञानात्मक भी घट जाती है।

यहां हम बच्चों के कम सोने के परिणामों पर चर्चा कर रहे हैं।

मोटापा और स्वास्थ्य

रिर्सच के अनुसार बच्चों में मोटापा बचपन में कम सोने की वजह से भी होता है। जो बच्चे 5 साल से पहले 10 घंटे से कम की नींद लेते हैं उनका वजन अधिक सोने वालों बच्चों के मुकाबले अधिक होता है। अधिक मोटा होने से इन्सुलिन, डायबिटीज और कार्डियोवेस्कुलर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

विकास में समस्या

कई विद्वानों ने इसपर प्रयोग किया और प्रूव किया कि कम सोने के कारण सीधे उनके विकास पर असर पड़ सकता है।

व्यवहार में समस्या

बुरा स्लिपिंग पैटर्न के कारण सक्रियता, अवज्ञाकारी व्यवहार, गुस्सा नाराज़, संवेदनशीलता, धैर्य की कमी भी हो सकती है। निष्कर्ष में बताया गया है कि बच्चे अगर रात में नींद लें तो उनकी लयबद्धता औऱ अनुकूलन क्षमता बढ़ जाती है। वहीं 12 महीनों में दिन में कम सोने से भावनात्मक संतुलन पर भी असर पड़ता है।

मम्मियां, कृप्या ध्यान दें कि बच्चे पूरी नींद लें

कम लेकिन अच्छी नींद आपके बच्चों के लिए जादू का काम कर सकती है। इससे आपके और बच्चे की अच्छी बॉन्डिंग बनेगी। याद रखें कि बच्चे जितनी शांति से नींद  ले सकें नहीं तो वो अधिक एक्साटेड हो जाएंगे।

गर्म पानी से स्नान

पेडिट्रिशियन से सलाह लेने के बाद उन्हें रात में सुलाने से पहले गर्म पानी से नहलाएं या फिर शरीर को पोछ दें। इससे बच्चों को अच्छी नींद आएगी।

लोरी गाना और कहानियां सुनाना

पीढ़ियों से माएं बच्चों को लोरी गाते हुए सुला रही हैं लेकिन जो मम्मी नहीं गाती हैं वो कहानियों का सहारा ले सकती हैं। बिल्कुल हल्के आवाज में उन्हें कहानियां सुनाएं और आप खुद इसका असर देख पाएंगे। हम पर विश्वास नहीं है तो खुद कोशिश करके देखें।

हल्के हाथों से मसाज या थपकी दें

बच्चों की पीठ पर थपकी देना भी बच्चों को सुलाने का एक तरीका है जिसे भारत में सदियों से अपनाया जा रहा है। आप उन्हें हल्के हाथों से मसाज दे सकते हैं। ध्यान रखें कि स्तनपान के तुरंत बाद ये ना करें।

बेडटाइम रूटीन के अलावा भी ध्यान रखें कि बच्चे बिस्तर गीला करने के बाद या रूम में हुई किसी हलचल के बाद भी ना उठें। जब तक बच्चे सो रहें हो कमरे में अधिक हलचल ना करें।  सुरक्षा के लिए डायपर का इस्तेमाल करें। हगीज पैंट डायपर का इस्तेमाल करना सबसे बेहतर होगा। अधिक जानकारी के लिए Huggies website पर लॉग इन करें।