क्या सजा या पनिशमेंट देना ही एक मात्र तरीका है ?

बच्चों को कुछ भी सिखाने से पहले हमें ये देखना चाहिए क्या ये काम हम खुद भी करते हैं, जो हम बच्चों से कराना चाहते हैं ? बच्चे वही सीखते हैं जो देखते हैं ।

एक माँ के रूप में मेरा मानना है की सजा या पनिशमेंट कोई तरीका नहीं है बच्चों को गलत करने से रोकने का या सही तरीका सिखाने का ।चलिए इसी बात पर एक किस्सा सुनाती हूँ ।

एक दिन मेरी छोटी वाली बेटी जो तीसरी क्लास में पड़ती है स्कूल से घर आकर बोली माँ आज स्कूल में एक गड़बड़ हो गयी। मैंने पूछा क्या हुआ बेटा? उसने बताया माँ आज मेरी दोस्त से मेरा पेंसिल बॉक्स गिर गया और टूट गया । मैंने पूछा फिर आपने क्या किया ? उसने बताया कि दोस्त ने बोला कि गलती से गिरा है और वो सॉरी है ।

मैंने पूछा तुम्हे गुस्सा नहीं आया ? मेरी बेटी बोली गुस्सा तो बहुत आया पर फिर मुझे याद आया कि जब कभी मुझसे घर में गलती से कुछ गिर जाता है तो आप मुझ पर गुस्सा नहीं करती बल्कि उसे साफ करने में मेरी मदद करती हो ।

मैं इतनी खुश हुई उसकी बात सुनकर कि अनजाने में मैंने उसे एक इतनी अच्छी आदत सीखा दी ।अगर मैंने उस पर गुस्सा किया होता तो शायद मेरी बेटी भी क्लास में अपनी दोस्त पर गुस्सा करके आती ।

बच्चे अपने पेरेंट्स का आइना होते हैं

बच्चे अपने पेरेंट्स का आइना या उनकी परछाई होते हैं । हम अपने बच्चों के लिए आदर्श होते हैं ।हमारा व्यबहार व विचार ही हमारे बच्चों के व्यबहार में नजर आते हैं । बच्चों को कुछ भी सिखाने से पहले हमें ये देखना चाहिए क्या ये काम हम खुद भी करते हैं, जो हम बच्चों से कराना चाहते हैं ? बच्चे वही सीखते हैं जो देखते हैं ।

ये हम उदाहरण के साथ समझ सकते हैं -

  1. बच्चे से मिल्क फैल जाये तो उस पर चीखने कि जगह हम प्यार से उसके साथ उसकी दूध साफ करने में उसकी मदद कर सकते हैं ।हम उसे समझा सकते हैं कि दुबारा उसे केयरफुल रहना होगा क्योंकि दूध फैलना मतलब खाने कि चीज का नुकसान होगा । अगर हम उस पर दूध फैलाने को लेकर चिल्लाते हैं तो उसे लगेगा चिल्लाना ही हर समस्या का हल है और बड़े लोग छोटों पर नाराज हो सकते हैं तो फिर आगे से बच्चा भी अपने से छोटों या बराबर वालों पर चिल्लायेगा।

  2. अगर कोई गलती हम से हो जाये तो हमें उसे समझ कर माफी मांगनी चाहिए जिससे बच्चों को भी समझ आ जाता है कि गलती करके माफी मांगने में कोई शर्म नहीं है ।

  3. अगर हम किसी से बच्चों के सामने झूठ बोलते हैं तो बच्चे को लगता है कि झूठ बोलना कोई गलत बात नहीं है ।छोटे -छोटे झूठ बोलते बोलते बच्चा कब बड़े -बड़े झूठ बोलने लग जाता है कि हमें पता ही नहीं चल पता ।
  4. अगर हम बच्चे से कोई वडा करते हैं कि हम आज उसको पार्क ले जायेंगे या क्रिकेट खेलेंगे तो हमें उस वादे को पूरा करना चाहिए ।अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो बच्चे को लगेगा कि प्रॉमिस तोड़ने में कोई बुराई नहीं है।

  5. अगर हम चाहते हैं कि बच्चा सभी को रेस्पेक्ट करे सबसे प्यार से बात करे तो पहले हमें भी सभी के साथ प्यार व आदर के साथ पेश आना होगा चाहे वो ड्राइवर हो या माली ।अगर हम गुस्से में किसी के साथ गलत शब्दों का इस्तेमाल करते हैं तो बच्चों को लगता है कि कभी-कभी गलत शब्दों का इस्तेमाल चलता है ।

ऐसे ढेरों उदाहरण हो सकते हैं पर महत्वपूर्ण बात यह है कि सजा देकर हम छोटे बच्चों को कोई सही बात नहीं सीखा सकते ।बच्चों के साथ हम कभी-कभी स्ट्रिक्ट तो हो सकते हैं पर पनिशमेंट देना सही नहीं है ।बच्चों को सही व गलत सही उदाहरण के साथ सही माहौल में सीखना ज्यादा बेहतर होता है उनके व्यक्तित्व के विकास के लिए ।

डराकर या सजा देकर हम उनका सही विकास रोक देते हैं अतः सजा न देकर बच्चे को समझे आखिर ऐसा उसने क्यों किया ?तब उसे सुधारने का तरीका ढूंढें ।बच्चे तो आखिर कच्ची मिटटी हैं और हम बड़े ही उन्हें सही आकर दे सकते हैं । कैसे ये करना है ये हमारे ही हाथ में है ।

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Source: theindusparent