क्या आपने श्वेता साल्वे की बेटी आर्या की यह CUTE तस्वीरें देखीं?

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वो बिल्कुल अपनी मम्मी की तरह पोज देती हैं!

श्वेता साल्वे की बेटी आर्या कुछ समय पहले एक साल की हुई हैं और वो पहले से ही अपनी खूबसूरत मम्मा की तरह स्टार हैं।

जिस तरह से वो पोज देती हैं वो इस बात का सुबूत हैं।श्वेता साल्वे उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं। देखिए आप भी।

 

अपने पति हरमीत शेट्टी के साथ गोवा स्थित घर पर श्वेता और आर्या हमेशा एक दूसरे के साथ इंज्वॉय करती नजर आती हैं।

ऐसी लगता है कि मम्मी श्वेता साल्वे अपने मातृत्व को पूरी तरह से इंज्वॉय कर रही हैं। कम से कम उनकी और आर्या की तस्वीरों को देखकर तो ये कहा जा सकता है। दोनों ही कुछ दिनों पहले एक बच्चों की मैगजीन के कवर पेज पर नजर आए थे।

 

आपको याद दिला दें कि श्वेता सालवे ने बेबी बंप में रैंप वॉक कर और एक खूबसूरत मैटरनिटी शूट कर सबको चौंका दिया था।

 

बाकी सेलिब्रिटीज से हटकर श्वेता साल्वे ने डिलीवरी के लिए वाटर बर्थ को अपनाया था जहां उनकी मां और पति उनके साथ थे।

 

उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि “मैंने गोवा में बेबी को डिलीवर करने का फैसला लिया क्योंकि मेरे पैरेंट्स वहीं रहते हैं। महाराष्ट्रियन में परंपरा होती है कि पहला बेबी नानी के घर होता है। मैं वाटर बर्थ के जरिए बेबी डिलीवर करूंगी। गोवा में कई बर्थ सेंटर हैं इसलिए यह आसान रहेगा।“

 

दिलचस्प बात है कि वाटर बर्थ के कई फायदे हैं और theindusparent के अनुसार आज की तारीख में कई भारतीय इसे अपना रहे हैं।

  • अधिक गतिशीलता: वाटर बर्थ में मम्मी को अधिक गतिशीलता मिलती है और लेबर के दौरान काफी कंफर्टेबल पोजीशन भी रहता है। एससीआई अस्पताल, दिल्ली की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ शिवानी सचदेव गौर के अनुसार शरीर पानी में रिलैक्स रहता है और इससे तनाव के हार्मोन का लेवल कम होता है और दर्द अवरोधक एंडोर्फिन बढ़ता है, जो अच्छे हार्मोन के रूप में जाना जाता है।
  • दर्द में आराम: जो महिलाएं वाटर बर्थ को अपनाती हैं उन्हें दर्द से राहत के लिए चिकित्सीय तरीकों की आवश्यकता कम पड़ती है। स्टडी के अनुसार पहले बेबी में वाटर बर्थ को अपनाने वाली 24 प्रतिशत महिलाओं को दर्द में आराम के लिए दवा की जरुरत पड़ी थी जबकि वाटर बर्थ को नहीं अपनाने वाली 50 प्रतिशत महिलाओं को दर्द से आराम के लिए दवाओं की आवश्कता पड़ी थी।
  • लेबर बढ़ाता है: पानी के कारण गर्भाशय का रक्त संचार बढ़ता है और इसलिए दबाब भी बढ़ता है जिस वजह से लेबर में तेजी आती है। डॉ गौर ने साथ ही यह भी बताया कि इससे योनि में कट या चीर लगने की संभावना कम होती है।
  • चीरा लगने की कम संभावना: डॉ गौर के अनुसार पानी के कारण पेरिनेम (योनि और गुदा के बीच का क्षेत्र) टिशू को नरम बनाता है और यह बेबी के सिर को समायोजित करने में सक्षम हो जाता है। इसका यह भी अर्थ है कि आपको एपीसीओटमी की आवश्यकता पड़ने की संभावना कम होती है
  • मां के वजन को सपोर्ट: डॉ गौर के अनुसार इसके कई और भी फायदे हैं जो खासकर मां के अच्छे के लिए होते हैं। उनके अनुसार "पूल का एक शांत और निजी माहौल होता है जो आपको लेबर के समय सुरक्षित महसूस करने में मदद करता है। यह आपके वजन का सपोर्ट करता है और यहां आपको सीधा रहने में आसानी होती है। इस वजह से योनी मार्ग आसानी से खुलता है । पानी की वजह से आप अपने संकुचन से निपटने पोजिशन बदलने में आसानी होती है।