क्या आपके बच्चे को है बिस्तर गीला करने की परेशानी? जानिए ये जरूरी बातें...

बिस्तर गीला होना या बेडवेटिंग, यह आपके बच्चे के व्यापक विकास का एक प्राकृतिक पड़ाव है। इससे घबरायें नहीं।

क्या है बेडवेटिंग ?

कोव्सर मेडिकल इंस्टिट्यूट के एक लेख में बेडवेटिंग या एन्युरेसिस (Enuresis) का मतलब कुछ इस प्रकार समझाया गया है- बच्चे की टॉयलेट ट्रेनिंग पूर्ण होने के बावजूद, असंयमित रूपसे तथा, दिन या रात के समय अपनी नींद में बिना जाने या बिना चाहे मूत्र (urine) का निर्वहन होना, इसे बेडवेटिंग कहा जाता है।

सामान्यतः बच्चोंमें दो तरहसे बेडवेटिंग देखा गया है, PNE अर्थात Primary Nocturnal Enuresis तथा SNE या Secondary Nocturnal Enuresis।

- PNE बेडवेटिंग का वह प्रकार है जिसमें ५ साल और ऊपर की उम्र के बच्चोंने रात के समय सूखेपन का कभी, कोई अनुभव ना किया हो
- SNE का मतलब यह है कि, किसी भी आयु के बच्चेने ६ महीने के कालावधि तक रात में सूखापन प्राप्त कर लिया था, लेकिन इस समय के बाद दोबारा बेडवेटिंग की शुरुआत हो गयी

आगे चलकर, PNE के दो प्रकार है, दिन के लक्षण सहित तथा इन लक्षणों के बगैर। जिन बच्चोंमें दिन के लक्षण नज़र नहीं आते उन्होंने पूरे दिनमें सूखापन प्राप्त कर लिया है और बेडवेटिंग केवल रात में होती है। लेकिन कुछ बच्चोंमें दिन के समय भी बेडवेटिंग तथा बारंबार मूत्रवहन होना जैसे लक्षण देखने को मिलते है। यह भी PNE का एक प्रकार है।

क्या बेडवेटिंग एक अल्पकालिक अवस्था है ?

ज्यादातर बच्चे उम्र के तीन साल तक दिन के समय बेडवेटिंग करना और पाँच साल की उम्र तक दिन और रात दोनों वक्त बिस्तर गीला करना बंद कर देते है। National Association for Continence कहती है कि प्रति वर्ष १५ प्रतिशत बच्चे बेडवेटिंग से मुक्ति पा लेते है तथा कोई इलाज किये बिना PNE पर मात कर जाते है।

कुछ महत्वपूर्ण सांख्यिकी विवरण जो बच्चोंमें पाए जानेवाले Enuresis पर प्रकाश डालते है...

The National Sleep Foundation और Children’s Hospital of Boston के अनुसार बच्चोंमें बेडवेटिंग के आंकड़े कुछ इस प्रकार है-
- ५ साल के बच्चोंमें १३ से २० प्रतिशत
- ७ साल के बच्चोंमें १० प्रतिशत
- १० साल के बच्चोंमें ५ प्रतिशत

इस विवरण के तहत यह मान लेने में कोई हर्ज नहीं है कि बेडवेटिंग दरअसल आपके बच्चे के विकास का एक जरूरी अंग है। इसके साथ ही हर माँ को यह समझना जरूरी है कि उम्र के साथ यह समस्या ख़त्म हो जाती है। हालाँकि कोई आपको यह नहीं बता पायेगा कि आपका बच्चा पूर्ण रूपसे सूखेपन का अनुभव कितने सालोंमें कर पायेगा क्योंकि यह बात उसके वश में नहीं है।

कैसे पाया जा सकता है रात का सूखापन?

National Association for Continence के एक लेख में बताया गया है कि रात का सूखापन पाने के दो तरीके है।

- एक तरीका तो यह है कि बच्चे का मूत्राशय उसके दिमाग को एक संकेत भेजता है कि urine की मात्रा ज्यादा हो रही है और इसके उत्तर में दिमाग उसे relax करने का संकेत भेजता है ताकि उसकी क्षमता बढ़े।
- दूसरा तरीका यह है जब मूत्राशय में urine की मात्रा अधिकतम हो जाती है और सुबह होने तक मूत्रवहन रोकना नामुमकिन हो जाता है और ऐसी परिस्थिति में एक के बाद एक संकेत भेजे जाते है जब तक बच्चा उठ न जाये। मगर बच्चा अभी तक इस बात को सीख रहा होता है और इस वजह से जाग नहीं पाता।

रिसर्च कहता है कि ब्लैडर कंट्रोल को कुछ इस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है-

- १८ महीने की आयु में: मूत्राशय की किसी भी क्रिया का आभास, जैसे ब्लैडर का भरना या रिक्त होना, बच्चे को अनुभव नहीं होता
- १८ से २४ महीने की आयु में: बच्चे को मूत्राशय के रिक्त होने का पता चलता है
- ३ साल की आयु में: इस उम्र तक बच्चा अपने आप urine को रोकने में सक्षम होता है और आवश्यकता के हिसाबसे toileting के कौशल में प्रवीणता पाता है
- ३ से ५ साल की आयु में: ज्यादातर इस आयु तक बच्चे दिन और रात दोनों समय का सूखापन पा लेते है

कैसे बन जाती है बेडवेटिंग एक समस्या?

education.com इस वेबसाइट के अनुसार बच्चों के डॉक्टर्स कहते हैं कि उम्र के छह साल तक बेडवेटिंग को एक समस्या नहीं माना जा सकता।

बिस्तर गीला करनेवाले छह या सात साल की उम्र से छोटे बच्चे PNE के दौर से गुजर रहे होते हैं। माता पिता को इनके साथ धीरज से काम लेना होगा। इस समय घबराने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि आपका बच्चा जल्दही बेडवेटिंग पर मात कर चूका होगा।

लेकिन PNE, या SNE भी, जब छह-सात साल की उम्र के बाद भी जारी रहे तब आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

बच्चों में बेडवेटिंग के कारण कुछ इस प्रकार है:

National Health Service, England के अनुसार growth और development के अलावा बेडवेटिंग के कई कारण हो सकते है जिनके लिए माता पिता को बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना जरूरी है।

Medical और शारीरिक विकार, जैसे, bladder की परेशानी, constipation, diabetes, sleep apnea तथा मानसिक परेशानियां, जैसे, fear, insecurity, किसी प्रकार के शोषण का शिकार होना या ऐसी घटनाएं देखना ये भी बेडवेटिंग के कारण बन सकते है।

National Association for Continence के research अनुसार, heredity या आनुवंशिकता यह भी एक महत्त्वपूर्ण कारण हो सकता है। अगर माता पिता में से किसी एक को बचपनमें बिस्तर गीला करने की परेशानी हो, तो ऐसी परिस्थिति में ४४ प्रतिशत बच्चों को Nocturnal Enuresis की परेशानी का सामना करना पड सकता है, और अगर दोनों पालकोंको बिस्तर गीला करने की परेशानी रही हो तो यह आंकड़ा ७७ प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

इस तरह हल कर सकते है अपने बच्चे की बेडवेटिंग समस्या:

साधारण उम्र के बाद भी अगर बिस्तर गीला करने की शिकायत हो तो अपने बच्चे को डॉक्टर के पास जरूर ले जाये और उनकी सलाह को follow करे।

Leakage को रोकने के लिए, बच्चे की उम्र के हिसाब से अच्छी quality के diaper या diaper pant का इस्तेमाल करे। अगर आप अपने बच्चेके लिए diaper इस्तेमाल नहीं करते तो आप mattress protector का इस्तेमाल कर सकते है।

Huggies के pant diaper यह बेहतरीन विकल्पोंमें से एक है। खरीदने के लिए यहाँ click करें या अधिक जानकारी के लिए Huggies की website पर log on करें।

Potty training पर अधिक जानकारी प्राप्त करें और अपने बच्चे को सोने से पहले bathroom जाने की आदत डाल ले।

अपने बच्चे को emotional support दे। उसे यह समझाए कि बेडवेटिंग एक आम बात है और इसमें शरमिंदगी महसूस करने जैसा कुछ नहीं। अगर जरूरत हो तो डॉक्टर से भी सलाह मश्वरा कर ले और अपने बच्चे को बेडवेटिंग से आजादी दिलाए।