क्या आपके घुटनों में भी चलने-बैठने के दौरान दर्द होता है? कहीं आप इस समस्या से ग्रसित तो नहीं...

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बढ़ती उम्र के साथ जोड़ों का दर्द कई लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है।

कुछ महीनों पहले ही मेरी 42 साल की कजिन बहन ने मुझसे घुटनो में दर्द की शिकायत की। वो एक साल पहले ही एक बेटी की मां बनी थी इसलिए सबने यही कहा कि शायद वो अभी तक कमजोर  हैं इसलिए उन्हें मल्टी विटामिन लेने की सलाह दी गई।

उनके बताने के तीन महीनों के बाद ही उनका पीरियड्स आना बंद हो गया और हमने ध्यान दिया कि उनका दाएं पैर बो-शेप का आकार ले चुका था और दर्द भी अधिक रहता था। जब हमलोग डॉक्टर के पास पहुंचे तो पता चला कि उनका मेनोपाउज शुरू हो चुका है। जी हां बिल्कुल ठीक पढ़ा आपने। 

वो अपनी जिंदगी के उस स्टेज में थी जिसे सबसे ज्यादा भयावह माना जाता है। अच्छी बात ये रही कि दूसरे बेबी के बाद उनका मेनोपाउज आया लेकिन घुटनों के दर्द का मेनोपाउज से क्या कनेक्शन?

हमने इस बात को जानने के लिए फोर्टिस एस्कॉर्ट हॉस्पिटल और फोर्टिस मेमोरियल हॉस्पिटल, नई दिल्ली की डॉ रश्मि रजत चोपड़ा से बात की जो हाथ और कलाई की सर्जन हैं ताकि हमें असल सच्चाई का पता चल सके।

भारतीय महिलाओं में मेनोपाउज

डॉ रश्मि रजत चोपड़ा ने बताया कि अधिकतर महिलाओं में मेनोपाउज 45-55 साल के बीच आता है जिसकी वजह से ओस्ट्रोजेन हार्मोन का लेवल घट जाता है और इसका असर हड्डियों और जोड़ों  पर पड़ता है। 

हालांकि भारत में ज्यादातर महिलाएं में मेनोपाउज जल्दी शुरू हो जाता है।ISEC (Institute for Social and Economic Change) के एक सर्वे के अनुसार 4% महिलाएं हमारे देश में 29 साल से 34 साल के बीच में मेनोपाउज स्टेज में आ जाती हैं।

ज्यादातर महिलाओं में मेनोपाउज एस्ट्रोजेन हार्मोन की कमी के कारण शुरू होता है।डॉ चोपड़ा ने बताया कि एस्ट्रोजन हार्मोन हेल्थ, ज्वाइंट, हड्डियों के लिए बेहद जरुरी  है।ये हड्डियों को बनाने में मदद करता है इसलिए अगर ज्वाइंट में कुछ दिक्कत खासकर मेनोपाउज में होता है।

महिलाओं में मेनोपाउज अर्थाराइटिस

बढ़ती उम्र के साथ जोड़ों का दर्द कई लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है। मेनोपाउज के बाद महिलाओं में दर्द, ज्वाइंट के आसपास सूजन ये सब मेनोपाउज के लक्षण हैं और ये मेनोपाउज के बाद आम भी हैं। 

ये सुबह में खासकर बढ़ जाता है और बढ़ते दिन के साथ और भी ज्यादा दर्द कुछ लोगों में बढ़ता है। खासकर बैक पेन, घुटनों में दर्द काफी ज्यादा होता है। हाथ और उंगलियों के ज्वाइंट का भी दर्द बढ़ता है।

डॉ चोपड़ा ने ये भी कहा कि थोड़ा व्यायाम और जॉगिंग से इसमें काफी राहत मिल सकती है।मेनोपाउज के बाद वजन का बढ़ना भी एक काफी कॉमन है। जोड़ों में दर्द के कारण ज्यादातर महिलाएं एक्टिव नहीं रह पाती और उनका वजन बढ़ जाता है। इसके कारण जोड़ों पर और भी प्रेशर बढ़ता है और इससे समस्या बढ़ जाती है। कई किताबों से लेकर स्टडी में इस बात का उल्लेख है कि मेनोपाउज के बाद वजन बढ़ जाता है।

अर्थाराइटिस को दूर रखने के लिए दवाइयां है बेस्ट

डॉ चोपड़ा ने बताया कि कई वैज्ञानिक किताबों में लिखा गया है कि मेनोपाउज के बाद अर्थाराइटिस कॉमन है। इसका कारण एस्ट्रॉजेन के मेटाबॉलिज्म का बिगड़ना भी हो सकता है।इसमें कई जीन भी होते हैं जो महिलाओं में वंशानुगत आते हैं।

दवाओं का लेना भी मेनोपाउज अर्थारइटिस का कारण हो सकता है। डॉ चोपड़ा के अनुसार “कई महिलाएं एस्ट्रोजेन ब्लॉक करने की दवाएं लेते हैं जैसे ब्रेस्ट कैंसर जोड़ों में दर्द बढ़ा सकता है। जिन महिलाओं की ओवरी ऑपरेट कर निकाली जाती है उनको भी अर्थाराइटिस होने का खतरा बना रहता है। “

डॉ चोपड़ा ने हमें बताया कि रिर्सच के अनुसार जो महिलाएं एस्ट्रोजन युक्त दवाएं ले रही हैं उऩकी अर्थाराइटिस होने की संभावना कम होती है। ये हड्डियों और जोड़ों पर अपना असर दिखाती हैं जिस वजह से अर्थाराइटिस की संभावना कम होती है।

मेनोपाउज अर्थाराइटिस का इलाज और बचाव

डॉ चोपड़ा ने विस्तार से बात करते हुए बताया कि मेनोपाउज अर्थाराइटिस के कारण महिलाओं को व्यायाम करने में समस्या हो सकती है। वो ज्यादा देर तक नहीं चल सकती लेकिन कई उपाय भी हैं जिन्हें अपनाकर आप तंदरुस्त और जोड़ों की ताकत बरकरार रख सकती हैं।

1. एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी

“एस्ट्रोजन हार्मोन के लेवल को ठीक करने या रिप्लेस करना इससे बचने का बेहतरीन उपाय है। अपने डॉक्टर की देखरेख में एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी लें जिससे जोड़ो के दर्द और सूजन की समस्या कम रहेगी।

2. व्यायाम और सही डाइट

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डॉ चोपड़ा ने ये भी बताया कि अगर आप जितना होना चाहिए उतना वजन बनाकर रखती हैं और सही डाइट लेती हैं तो भी आपको काफी आराम मिलेगा। हमेशा कठोर सतह पर जॉगिंग ना करें जिससे जोड़ों पर ज्यादा प्रेशर नहीं पड़ेगा। योगा और स्वीमिंग से आप खुद को फिट और कंट्रोल में रख सकते हैं। इससे जोड़ों पर ज्यादा प्रेशर भी नहीं पड़ता और उनका लचीलापन बरकरार रहता है।

3.खाने में न्यूट्रिएंट और एंटीऑक्सिडेंट शामिल करें

फल और सब्जियां जिनमें न्यूट्रिएंट और एंटीऑक्सिडेंट भरपूर मात्रा में पाई जाए वो जितना हो सके अपनी डाइट में शामिल करें।इससे जोड़ों में सूजन और जलन की समस्या कम होगी। सही डाइट से आपका वजन भी कंट्रोल में रहेगा इसलिए खाने में फलियां, Wholegrain, ड्राइ फ्रुट्स शामिल करें। इसे कैल्सियम और मैग्निशियम भी शरीर को मिलता रहेगा तो हेल्दी हड्डियों के लिए जरूरी हैं। विटामिन B3, ओमेगा फैटी एसिड, फिश ऑयल सप्लिमेंट से भी काफी फायदा मिलता है। 

4. रिलैक्स और मेडिटेशन

Hormone cortisol जो अधिक तनाव में होने पर सुजन या जलन बढ़ा सकता है और इसके लिए रिलैक्स करना और मेडिटेशन सबसे अच्छा उपाय साबित हो सकता है। मसाज और एक्युपंचर भी इसका सही इलाज होता है जिससे काफी राहत मिलती है। ये सीधे दर्द हो रहे जगह को टारगेट करते हैं।

डॉ चोपड़ा ने साथ ही ये भी बताया कि मेडिकल थेरेपी जैसे दवाईयां, इंजेक्शन और फीजियोथेरेपी से भी इसमे काफी राहत मिलती है।

सर्जरी की सलाह डॉक्टर तब देते हैं जब बाकी उपाय भी असर ना करें। अगर आप भी जोड़ों के दर्द और अनियमित पीरियड से गुजर रही हैं तो जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से संपर्क करें।

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Source: theindusparent

Written by

Deepshika Punj

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