क्या आपका शिशु भी अत्यधिक रोता है...जानिए कहीं ये कॉलिक का संकेत तो नहीं है...

कोई शिशु अगर एक दिन में कुल मिलाकर 3 घंटे रोए और उसके रोने की यही प्रक्रिया पूरे सप्ताह देखने को मिले तो कह सकते हैं कि शिशु को कॉलिक हो गया है ।

यूं तो शिशु अपनी हर एक मांग पूरी करने के लिए रोते ही हैं लेकिन कई बार शिशु की हर ज़रुरत पूरी होने के बाद भी वो चुप नहीं रहते और ऐसे में मां बेहद ही परेशान हो जाती है ।

अगर आपका शिशु स्वस्थ दिखाई देता है लेकिन फिर भी वो बहुत रोता है और उस पर काबू पाना मुश्किल होता हो तो इसे ही उदरशूल यानि कॉलिक कहा जाता है। कोई शिशु अगर एक दिन में कुल मिलाकर 3 घंटे रोए और उसके रोने की यही प्रक्रिया पूरे सप्ताह देखने को मिले तो कह सकते हैं कि शिशु को कॉलिक हो गया है ।

छोटे से बच्चे का अनियंत्रित तरीके से रोना हर किसी के लिए मुश्किलों भरा अनुभव हो सकता है । वाकई बहुत असहाय सी परिस्थिति बन जाती है जब आपकी तमाम कोशिशों के बावजूद भी शिशु चुप होने का नाम ना ले ।

आमतौर पर कॉलिक की समस्या 2-4 सप्ताह की उम्र से शुरु हो कर 4 महीने की अवस्था तक अपने आप ठीक हो जाती है । लेकिन अपने आंख के तारे को इसतरह रोता देख कोई इतना इंतज़ार भला कैसे कर सकता है इसलिए डॉक्टर के पास शिशु को ले जाना जरुरी भी है और सही भी ।

कैसे समझें की शिशु को कॉलिक की समस्या है

  • अगर शिशु बार-बार पूरी  ताकत से रोना शुरु करे
  • रोते समय वो टांगों को पेट तक ले आए
  • पीठ को भी चापाकार में मोड़ ले
  • अधिकांश रुप से वो दोपहर के बाद या शाम के वक्त रोना शुरु करे ।

चूंकि शिशु के पास संचार का कोई और ज़रिया नहीं है तभी वो अपने हर कष्ट को रोकर ही व्यक्त कर सकते हैं । इसलिए अधिक रोने वाले शिशु की दिनचर्या या उनके व्यवहार में आ रहे परिवर्तन को गौर करना एक बड़ी जिम्मेदारी है ।

हो सकता है कि शिशु रोकर अपनी किसी बड़ी परेशानी के बारे में इशारा कर रहे हों । आप शिशु की दूध पीने की इच्छा का कम होना, नैपी कम गीली करना, उसके पॉटी के रंग में आए असामान्य बदलाव इत्यादि गौर करने पर डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं ।

आपको जान कर हैरानी होगी लेकिन इसके कोई ठोस कारण उपलब्ध नहीं हैं कि आखिर कुछ शिशु अन्य की अपेक्षा अत्यधिक क्यों रोते हैं । कॉलिक को भी दरअसल शिशु के सामान्य रुप से रोने की चरम सीमा ही मान सकते हैं ।

ये अवस्था जन्म के दूसरे सप्ताह से लेकर दो माह तक अधिक परेशान करती है । आपको बता दें कि कॉलिक बेबी बॉय और गर्ल दोनों में ही सामान रुप से देखा जा सकता है । ये समस्या विशेष चिंताजनक नहीं है इसलिए आपको हिम्मत से शिशु को पुचकार कर दुलार कर उसे आराम का ऐहसास करवाना चाहिए ।