किसी को कमेंट करने का हक नहीं कि मैं कैसी मां हूं: करीना कपूर

"कोई कैसे समझ सकता है कि मुझे डिप्रेसिंग लगना चाहिए या 45 दिनों से पहले मैं बाहर निकल सकती हूं? "

करीना कपूर पिछले एक साल से रूढिवादी सोच से हटके काम करने के लिए लाइमलाइट में हैं। उन्हें बेबी बंप छिपाने नहीं बल्कि फ्लॉन्ट करने को पॉपुलर किया। वो बेटे के जन्म के बाद भी लगातार काम कर रही हैं और ना तो कभी अपने बेटे को मीडिया से छिपाने की कोशिश की।

वो बतौर एक्ट्रेस कई चीजें पहली बार की खासकर एक्ट्रेसेस का भी मां बनना नॉर्मल है इस धारना को वो एक्ट्रेसेस बीच लाई हैं।

उऩकी झोली में खई अच्छी बातें आई कि वो कुछ भी अलग नहीं कर रहीं तो वहीं जहां तक परवरिश की बात है उनकी आलोचना की जा रही है।

जी हां ये बिल्कुल सच है

भारत में सबके पास देने के लिए राय है

हाल में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि हमारे देश में महिला को उसके उम्र के हिसाब से आंका जाता है और वो भी आलोचना की शिकार हुईं।

“ये एक नए सफर की शुरूआत है। मां बनने के बाद मैं हर दिन कुछ ना कुछ सीख रही हैं। ये एक लंबा सफर है, जिसके लिए मैं और सैफ दोनों काफी एक्साइटेड हैं। मैं मानती हूं कि प्रेग्नेंट महिलाओं को टिक टिक कर रहे टाइमबम की तरह समझा जाता है लेकिन इस विचारधारा को मैंने कभी नहीं माना। मां भी मैं बनना चाहती थी इसलिए इसे चुना। भारत में सभी राय देते हैं खासकर अगर बात महिलाओं की हो।“

 

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पोस्टमार्टम डिप्रेशन जरूरी नहीं

करीना ने इस दौरान पोस्टमार्टम डिप्रेशन के बारे में भी बात की जो वो मानती हैं कि ये होना चाहिए।

उन्हें कहा कि “हां मैं डिलिवरी के कुछ दिनों बाद अपने पैरों पर खड़ी थी लेकिन ये दुखी करता है कि लोग आपको आंकने लगते हैं। लेकिन किसी को कमेंक करने का अधिकार नहीं है कि मैं कैसी मां हूं। सभी अपना पक्ष रखने लगते हैं लेकिन पोस्टमार्टम डिप्रेशन कोई जरूरी नहीं है। मां बनना और प्रेग्नेंसी एक एक प्रक्रिया है जिससे हर महिला गुजरती है”

इसके साथ ही बेबो ने ये भी कहा कि दो मां कभी एक जैसी नहीं हो सकती।

“सभी प्रेग्नेंसी और मां का बच्चे के साथ 9 महीनो का सफर अलग होता है। इससे आप समांतर में नहीं रख सकते। कोई नहीं समझ सकता कि जन्म देते वक्त मुझे कैसा लग रहा था। कोई कैसे समझ सकता है कि मुझे डिप्रेसिंग लगना चाहिए या 45 दिनों से पहले मैं बाहर निकल सकती हूं? मैं अगर मेरे बारे में ऐसी बातें की जाती हैं तो बाकियों के बारे में भी किया जाता होगा।“

‘Judge किए जाने का दवाब हमेशा रहता है

एक मां के तौर पर लोगों द्वारा आंके जाने का दवाब हमेशा रहता है और उन्हें पसंद नहीं कि लोग उनके परवरिश करने के तरीकों को भी आंके।

उन्होंने कहा कि “सिर्फ इसलिए कि मैं और मेरे पति सोशल मीडिया पर हर घंटे अपनी भावनाएं शेयर नहीं करते लोगों को आजादी मिल गई है कि वो मेरे और मेरे बच्चे के बारे में कुछ भी लिख दें। इस तरह के रिर्पोट्स को पढ़कर काफी झल्लाहट होती है कि मैं कैसे वजन कम कर रही हूं और कैसे खुद को फिट रख रही हूं।एक कपल के तौर पर हमारी जिंदगी में क्या हो रहा है हम पूरी दुनिया के साथ शेयर नहीं करते इसलिए मैं कोई स्पष्टीकरण नहीं देने वाली कि हम क्या कर रहे, मैं वजन कम करने के लिए क्या प्लान कर रही या मैं अपने बेटे के साथ क्या करती हूं। मैंने अपनी प्रेग्नेंसी को इंज्वॉय किया। और अब मैं छत पर जाकर चिल्ला नहीं सकती कि मां बनकर कैसा एहसास हो रहा है और मैं तैमूर से कितना प्यार करती हूं। हम पर हमेशा जज किए जाने का दबाव होता है। ये मायने नहीं रखता कि आप क्या कर रहे हो।“

इस इंटरव्यू के दौरान करीना ने एक सही बात उठाई कि क्यों कामकाजी या घर में रह रही मम्मियों को हमेशा उनकी पसंद, नापसंद पर आंका जाता है? हमें नई मॉम से सीखना चाहिए और सबसे जरूरी बात कि हमें इस तरह कि गैरजरूरी आलोचनाओं का प्रभाव नहीं पड़ने देना चाहिए।

तीन कारण क्यों हर नई मॉम को मस्तमौला रहना चाहिए

  • ये आपकी जिंदगी है : आप बड़ी हो चुकी हैं। अगर आप शादी करने के लायक बड़ी हो गई है, बड़ों का ख्याल रखने के लायक हो गई है, घर और काम में सामंजस्य बिठाने के लायक हो गई हैं और सबसे बड़ी बात कि इस लायक हो गई हैं कि आप निर्णय ले सकें कि अब मां बनना है तो फिर ये टेंशन क्यों लेना। आप जैसे आगे बढ़ना चाहती हैं बढ़िये।
  • आपका बेबी है : आपने फैसला किया कि आप मां बनेंगी। ये आपके उपर है कि आप कैसे बच्चे का देखभाल करती हैं और उसे बड़ा करती हैं। कई बार ससुराल वाले से लेकर मां-बाप तक इसके बीच में आते हैं लेकिन सच्चाई यही है कि वो आपका बेबी है और आपको सबसे अच्छे से पता है कि उसे कैसे बड़ा करना है। सब की सुनिये लेकिन आपको जो सबसे सही लगे वो करिये।
  • ये सलाह नहीं है : अगर कोई आपको लगतार आपके परवरिश के तरीकों को आंक रहा है, आपके कुकिंग, सफाई को आंक रहा है आपके ‘भले के लिए सलाह’ दे रहा है तो ये असल में सलाह नहीं है। ये सिर्फ जज करने का तरीका है। इसलिए मस्तमौला और बिंदास एट्टिट्यूड अपनाइए और वो कीजिए जो आपको अच्छा लगता है खासकर घर और बच्चों के मामले में।

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Source: theindusparent