काम और बच्चे...कैसे करें तालमेल

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महिलाएं भी आगे बढ़ना चाहती हैं, काम करना चाहती हैं, घर व काम दोनों संभालना आसान नहीं हैं बस एक पॉजिटिव एप्रोच रखने कि जरुरत है

'बैलेंस' और संतुलन काम और घर के बीच बैठाना आजकल की फ़ास्ट मूविंग, हाई टेक, कम्पटीशन से भरी जिंदगी में मुश्किल तो है पर नामुनकिन नहीं है।जैसे जैसे महिलाओं में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता बड़ी है, हम महिलाएं भी समय के साथ आगे बढ़ना चाहती हैं, काम करना चाहती हैं, करियर के सबसे ऊँचे शिखर को चुना चाहती हैं ।

हमारा ऐसा चाहना गलत भी नहीं है, पर आगे बढ़ने में हमें अपने साथ-साथ घर व बच्चों को भी साथ लेकर आगे बढ़ना पड़ता है ।मेरी समझ से महिलाएं बोर्न फाइटर और मल्टीटास्कर होती हैं ।हम एक ही समय में एक साथ कई सरे काम कर सकती हैं और वो भी सफलता के साथ - बस अपने अंदर की मैनेजमेंट स्किल्स को थोड़ा सा निखारने की जरुरत होती है ।

घर व काम के बीच में संतुलन 

में खुद भी काम करती हूँ, घर भी संभालती हूँ, ऑफिस में स्टाफ मीटिंग लेती हूँ और घर में अचार पापड़ भी बनती हूँ। बच्चे भी संभालती हूँ । कभी कभी इतना सब संभालते-संभालते थकन सी होने लगती है पर जब घर में सबके मुस्कराते चेहरे दिखाई देते हैं और अपने मन के अंदर सुकून होता है क्योंकि में अपने मन का काम कर रही हूँ तो साडी थकन भाग जाती है ।मन में एक नया जोश भर जाता है ,दुगनी स्फूर्ति के साथ काम करने का ।

working mother काम और बच्चे...कैसे करें तालमेल

घर व काम के बीच में कैसे संतुलन स्थापित करना है बस यह समझना जरुरी है ।इसको हम कुछ पॉइंट्स में डिसकस करते हैं ।

१) प्रिऑरिटीज़ डिफाइन होनी चाहिए: जैसे हम किसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं घर व बच्चों को या काम को ।क्योंकि कभी-कभी ऐसे पड़ाव भी आते हैं जब आपको दोनों के बीच में किसी एक का चुनाव करना पड़ सकता है ऐसे समय के लिए हमें स्पष्ट होना चाहिए की हमारी प्रिऑरिटीज़ क्या हैं - काम या बच्चे? ताकि उस वक़्त चुनाब करना आसान रहे ।मेरी समझ से हमें बच्चों को प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि बच्चों को हमारी जरुरत ज्यादा है ।हम भी आज करियर के जिस मुकाम पर हैं उस तक पहुँचाने में कहीं हमारी माँ ने भी अपने शौक या इच्छाओं का बलिदान किया था ।

२) Let go of guilt: कभी- कभी ज्यादा काम की वजह से बच्चा कोई कमी महसूस कर रहा है या आप उसे समय नहीं दे प् रहे हैं तो मन में कोई गिल्ट या कुंठित विचार मत रखिये ।उस समय ये सोचिये कि आप के काम करने कि वजह से आज आपका परिवार कितना खुशहाल है ।आप अपने बच्चों को बेहतर सुविधाएँ दे प् रही हैं ।कभी-कभी काम ज्यादा हो सकता है पर इसके लिए खुदको दोष मत दीजिये ।अपने काम को पीछे मत छोड़िये ।खुश रहिये क्योंकि जब आप खुद खुश रहेंगी तभी आप सब को खुश रख पाएंगी ।

woman on laptop काम और बच्चे...कैसे करें तालमेल

३) समय पर काम कीजिये: अपने टाइम-टेबल को इस तरह से मैनेज कीजिये कि आप कल के लिए कोई काम ना छोड़ें जैसे बच्चों का स्कूल बैग,यूनिफार्म ,आपके ऑफिस का बैग,कल का मेनू ये सब पहले दिन ही कर के रखें ।ऐसे छोटे-छोटे कामों को अगर पहले दिन ही कर लिया जाये तो दूसरे दिन सुबह आप और कामों को समय से कर पाएंगी व समय से ऑफिस के लिए तैयार हो पाएंगी ।जब सभी काम समय से होंगे तो मन में शांति रहेगी और ऑफिस में भी काम करने में मन लगेगा और काम भी अच्छा होगा ।

४) छोटी-छोटी बातें याद रखें: अगर आप अपने सास-ससुर के साथ रहती हैं तो उनकी छोटी-छोटी बातें जैसे डॉक्टर से चेक-अप,दवाइयां,उनके जन्मदिन व शादी कि सालगिरह इत्यादि याद रखिये ।इससे उन्हें भी अच्छा लगेगा और वो आपको हमेशा आपके काम में आपको सपोर्ट करेंगे ।ऐसे ही बच्चों कि ptm,जन्मदिन ,उनके प्रोजेक्ट वर्क,उनकी आउटिंग्स ये सब याद रखना बहुत जरुरी है ।ताकि उन्हें नेग्लेक्टेड वाली फीलिंग ना आये और उन्हें लगे कि आपके लिए वो ही सबसे ज्यादा इम्पोर्टेन्ट हैं ।याद रखने के लिए आप फ़ोन में reminders व alarms  लगा सकती हैं ।

५) बच्चों को पूरा समय दें: जिस समय आप अपने बच्चों के साथ हों वो समय केवल उन्हें ही दें ।अपने फ़ोन पर या सोशल मीडिया पर ना रहें ।बल्कि उनके साथ बातें करें,उनकी सुने तथा अपनी भी कहें ।उनके साथ हंसने मुस्कराने से हम भी अपनी परेशानियां भूल जाते हैं ।

६) खुद को भी समय दें: घर ,काम,बच्चे इतनी भागमभाग के बीच में खुद को याद रखना भी जरुरी है ।अपने शौक को भी समय दें ।अपने फ्रेंड्स के साथ बाहर जाएँ ,वो सब काम करें जो आप को पसंद हैं ,जो आपको ख़ुशी देते हैं ।खुद को रोबोट ना समझे ।अपने पसंद के काम करने से आप अपने को अंदर से अच्छा और डेटोक्सिफिएड महसूस करेंगी ।।अपने खाने-पीने व स्वास्थ्य को नजरअंदाज ना करें ।

घर व काम दोनों संभालना आसान नहीं हैं बस एक पॉजिटिव एप्रोच रखने कि जरुरत है ।बस याद रखिये ये सब आप अपने लिए कर रही हैं अपनी पहचान के लिए कर रही हैं ।सब कुछ फिर आसान लगने लगेगा ।आसमान में अगर उड़ना है तो थोड़ा दर्द पंखों को तो सहना ही होगा तभी तो हम शानदार उड़ान भर पाएंगे ।

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Source: theindusparent