कहीं आप भी अपने शिशु को काजल तो नहीं लगातीं...जानिए ऐसा करना कितना सही...

हालांकि मेडिकल साइंस इस बात की पुष्टि नहीं करता है फिर भी घर के बड़े-बूढ़े या दाई मां किसी भी प्रकार से इसे असुरक्षित मानने को तैयार नहीं होते जिसके कारण नए ज़माने के पैरेंट्स को भी उनकी सलाह माननी ही पड़ती है ।

हमारे देश के तकरीबन सभी हिस्सों में बुरी नज़र से बचाने के लिए नवज़ात शिशु को काजल लगाने की परंपरा है । इसके पीछे कई मान्यता है जैसे- शुरुआत से ही शिशु के आंखों में काजल लगाने से उनकी आंखों की बनावट निखर जाती है या आंखों की रौशनी बढ़ती है या आंखे बड़ी हो जाती हैं...आदि ।

हालांकि मेडिकल साइंस इस बात की पुष्टि नहीं करता है फिर भी घर के बड़े-बूढ़े या दाई मां किसी भी प्रकार से इसे असुरक्षित मानने को तैयार नहीं होते जिसके कारण नए ज़माने के पैरेंट्स को भी उनकी सलाह माननी ही पड़ती है ।  

नाज़ुक से शिशु की आंखों में काजल या सूरमा लगाना कतई भी सही नहीं है । ये शिशु के लिए सुरक्षित भी नहीं होता । हो सकता है कि आपको भी यही लगता हो कि काजल से शिशु की आंखें बड़ी हो जाऐंगी पर ऐसा होना अस्वभाविक है । हां काजल लगाने के बाद आंखें सुंदर जरुर लग सकती हैं  ।

शिशु को काजल से क्या समस्या हो सकती है...

बाज़ार में कई तरह के काजल मिलते हैं जो शत-प्रतिशत कैमिकल फ्री होने का दावा करते हैं लेकिन फिर भी आंख बंद कर के भरोसा करना ठीक नहीं रहता है । इससे शिशु के आंखों में जलन या पानी निकलने जैसी समस्या हो सकती है ।

जहां तक मैंने देखा है कोई शिशु आराम से काजल नहीं लगवाता, अपनी आंखों को काजल से बचाने के लिए बार-बार सर हिलाना, हाथ-पैर मारना, ज़ोर से रोना ये सारी आज़माइशें करता है और इस तरह जबरदस्ती करने से शिशु की आंखें चोटिल हो सकती हैं कई बार ऊंगलियों की गंदगी से आंखों में ईरिटेशन हो जाता है ।

आपको शायद मालूम ना हो पर ग्रामीण क्षेत्रों में घर में ही शिशु के लिए काजल तैयार किया जाता है । सरसों तेल की दीया-बाती जला कर उसे मिट्टी के दूसरे दीये से ढ़क देते हैं जिसमें ज्वलनशील बाती से निकलने वाला काला धूंआ जमा होकर चिपक जाता है ।

कई जगह इसमें भी तरह-तरह के प्रयोग करते हैं जैसे अजवाईन आदि डालकर दीया जलाते हैं । विधि कठिन तो नहीं है लेकिन इसे भी नवज़ात शिशु की आंखों के लिए सुरक्षित नहीं मानना चाहिए ।

घरेलू काजल से भी शिशु की आंखें लाल हो सकती हैं । खुजली जैसा होने पर शिशु अपनी आंखें दोनों हाथों से रगड़ते हैं जिसके बाद फैला हुआ काजल मुंह तक पहुंचने का भी खतरा रहता है ।

इसलिए शिशु को बुरी नज़र से बचाने के साथ- साथ उसे बीमारियों या संक्रमण से बचाना भी आवश्यक है । आंखों में काजल लगाने की अपेक्षा आप उसके फॉरहेड पर काला टीका लगाएं या कान के पीछे या फिर तलवे में भी टीका लगाने की मान्यता है जो एक सुरक्षित विकल्प है ।