कभी सोचा है..क्यों मांएं हमेशा थकी हुई होती हैं? क्या आपने अनदेखे बोझ के बारे में सुना है?

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क्या हमेशा आपके साथ ऐसा होता है कि आप सुबह उठने के बाद भी अच्छा महसूस नहीं करती हैं? क्या दूसरी मम्मियों के साथ आपकी बातें भी ज्यादातर थकावट से जुड़ी हुई होती है? 

कितनी बार आप सुबह 7 बजे सोकर उठने के बाद भी थका हुआ महसूस करती हैंक्या हमेशा आपके साथ ऐसा होता है कि आप सुबह उठने के बाद भी अच्छा महसूस नहीं करती हैं? क्या दूसरी मम्मियों के साथ आपकी बातें भी ज्यादातर थकावट से जुड़ी हुई होती हैआखिर क्यों हर मां थका हुआ महसूस करती है? क्या आपने कभी भी अनदेखे काम के बोझ के बारे में सुना है?

मम्मियां हमेशा थका महसूस करती हैं क्योंकि उन्हें कभी भी पूरी तरह से आराम करने का समय नहीं मिलता। अगर हम सो भी जाते हैं तो हमारे दिमाग के किसी ना किसी चेतन अवस्था में कुछ ना कुछ चलते रहता है।

अरे मैं तो भूल गई कि मुझे बेटे के नोट पर साइन करना था..सुबह कर दूंगी।

बेबी को टीका लगवाना थामुझे ये सुबह करवा देना चाहिएलेकिन इसके लिए पहले अपॉइंटमेंट लेनी होगी?

अगले शुक्रवार को पति के दोस्त डिनर पर आ रहे हैंमुझे एक दिन सुपरमार्केट जाना चाहिए।

क्या मैंने कपड़ों को अंदर कियानहीं कियामैं बहुत थक गई हूं अबकहीं रात में बारिश हुई तो ? 

मेरी बेटी की दो दिनों के बाद स्पेलिंग टेस्ट है और ये शब्द वो अच्छे से नहीं बोल पा रही है।

मम्मी हमेशा थकी हुई रहती हैंमुझे समझ नहीं आता क्यों

नोट – मुझे बेबी के क्लास पार्टी के लिए बेक स्प्रिंकल कपकेक बनाने हैं।

मेरा वजन बढ़ रहा हैहमें अगले सप्ताह डिनर पर जाना है। मुझे नहीं लगता मैं अपनी पसंदीदा ड्रेस में फिट आऊंगी। मेरा वजन बढ़ रहा है..हे भगवान मैं मोटी हो रही हूं।

ये कितनी अजीब बात है कि माएं हमेशा थकी हुई होती हैं..कभी कभी मैं सोचती हूं क्यों

आप सोने जाती हैं तो भी आपके दिमाग में कई बातें चल रही होती हैं। कई रूके हुए काम याद आते हैं। आपको रात में याद आए कि आपने अपने बेटे का फॉर्म नहीं भरा है जिसके लिए उसे टीचर से सजा भी मिल सकती है। इसके बाद रात में तो नींद आने से रही और आप सोचते हैं कि मम्मियां हमेशा थकी–हारी क्यों रहती हैं।

क्या मुझे कामकाजी माओं तक पहुंचने की भी जरूरत है?

यह अदृश्य काम का बोझ है जो माता-पिता को स्थायी थकावट के रास्ते नीचे खींचते हैं। हम कई काम करते हैं और कई काम ऐसे होते हैं जो करने पड़ते हैं। कुछ लोग इसे माओं की प्रवृत्ति कहते हैं, तो कुछ इसे अजीबोगरीब काम का बोझ कहते हैं, और विज्ञान इसे मम मस्तिष्क कहता है। मैं इसे माइक्रोमैनेजिंग कहती हूं।

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Mums have a never-ending list of things to worry about!

मां बनने के बाद खुशी के साथ बच्चों के चेहरे पर प्यारी सी मुस्कुराहट के साथ कई काम और जिम्मेदारिया भी आती हैं। लेकिन स्पष्ट रूप से बताएं तो हमारे हमेशा थके होने के पीछे सबसे बड़ा कारण होता है कि हम खुद को ऐसा करने की अनुमति देते हैं।

ये समझना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है कि अपना बेस्ट देने के लिए मां माइक्रोमैनेजर बन जाती है या फिर यह कह सकते हैं कि यह हमारे अंदर की छिपी विचित्र नियंत्रण को बाहर ले आता है।

वहीं दूसरी तरफ आप ये भी बहस कर सकते हैं कि अगर हम चिंता नहीं करेंगे तो और कौन करेगा? यहां हम सारे अच्छे पापा को कम करके नहीं आंक रहे हैं लेकिन हमें सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए कि महिलाओं और पुरूषों में काफी अंतर होता है। उम्मीदें होती हैं लेकिन ज्यादातर पुरूष काफी आसानी से काम करते हैं और ये भी एक कारण है कि मांएं ज्यादातर थकी हुई होती हैं जबकि पापा नहीं होते हैं।

उदाहरण के तौर पर देखते हैं जब हम माता-पिता अपने बच्चे को बाहर लेकर आते हैं। अगर पति बच्चों को फिल्म दिखाने ले जाते हैं तो हमें सांस लेने की फुर्सत मिलती है। लेकिन हम क्या करते हैं? हम चिंता करने लग जाते हैं।

क्या वो बेटे का जैकेट लेकर गए? अगर थियेटर के अंदर अधिक ठंढ हुई? क्या उन्हें याद रहेगा कि उसे बूस्टर सीट दिलवाना है?

क्या उसे पॉपकॉर्न देंगे? पॉरकॉर्न में चीनी बहुत होती है; कहीं खांसी ना हो जाए। चॉकलेट? हे भगवान बिल्कुल भी नही।वो लोग लंच क्या करेंगे? शायद MacDonald?

मैं उनके साथ क्यों नहीं गई?

मैं दोहराना चाहूंगी – आप सोचते होंगे कि मम्मियां हमेशा क्यों थकी हुई होती हैं? जब हमें चैन की सांस लेने का मौका मिलता है तब भी हम चिंता करने लग जाते हैं। हम सोचते हैं कि कोई और हमसे ज्यादा अच्छे हमारे बच्चों का ख्याल नहीं रख सकता है या फिर हमसे अलग कर सकता है।

इसी तरह से जब हम अपने बच्चों को अपने पैरेंट्स या सास-ससुर के साथ छोड़ देते हैं फिर भी चिंतित रहते हैं। क्योंकि हम ये मानकर बैठे हैं कोई भी ये अच्छे से नहीं कर सकता और यही सबसे बड़ा कारण है कि मांएं हमेशा थकी हुई होती हैं।

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We need to trust that dads can handle the baby just fine without us!

आप एक पुरूषों को देखें, उनके लिए सबकुछ कितना आसान होता है – अगर वो बच्चों को बाहर ले जाते हैं तो सोचते हैं कि बच्चो के साथ अच्छा समय बिता पाए और ज्यादा सोचते या चिंता नहीं करते हैं। वो ये नहीं सोचते कि एक पॉपकॉर्न का पैकेट उनके बच्चे के लिए कितना हानिकारक हो सकता है। वहीं अगर हम बाहर ले जाते हैं तो वो बीयर या नेटफ्लिक्स का एक केन लेकर मस्ती करते हैं। वो चिंता नहीं करते कि हम सही कर रहे हैं या गलत।

कभी कभी हमें चीजों को बस जाने देना चाहिए। हमें विश्वास करना चाहिए कि दूसरी पार्टी भी बच्चे से उतना ही प्यार करती है जितना हम करते हैं।

हमें  ये समझना होगा कि हम एक समय में सबकुछ नहीं कर सकते। ऐसे दिन भी होने चाहिए जब हम कपड़े बिना समेटे छोड़ दें। ऐसे भी दिन होने चाहिए जब हमें बर्तन सिंक में छोड़ दें क्योंकि हम एक लिमिट तक ही कर सकते हैं।

कई बार ऐसा भी समय आता है जब हम अपने विचारों को आवाज देनी चाहिए।मम्मियां हमेशा थकी हुई होती हैं और वो चाहती हैं कि उनके पति या परिवार का कोई सदस्य मदद करने के लिए आगे आए। आपके रिकॉर्ड के लिए बता दें – वो मदद नहीं करते हैं। घर को हम साझा करते हैं और इसलिए घर चलाने के दौरान जिम्मेदारियां भी मिलकर उठायी जाती है।

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Mums need to communicate their needs without arguing.

कई बार पुरूष बातों को नहीं समझते हैं और हमें उन्हें बताने की जरूरत पड़ती है। ये मत समझिए कि अगर वो कपड़े या बर्तन नहीं धोते, तो इसकी चिंता नहीं करते हैं या ऐसा करना नहीं चाहते हैं। शायद उन्हें ये बताने की जरूरत होती है। इसलिए कभी भी आप क्या चाहती हैं ये कहने में संकोच ना करें औऱ अपनी बात साफ तरीके से रखें कि आपको उनकी जरूरत है।

हमें मास्टर शेफ, कपड़े धोने की मशीन, शिक्षक, खेल के कोच, व्यवसायी, ममप्रैन्योर या कामकाजी मां सबकुछ एक साथ होने की जरूरत नहीं है। हमें वो करने की जरूरत है जो हमें परिभाषित करती है कि हम कौन हैं।

हर किसी को अलग अलग तरीकों से राहत मिलती है। चाहे वो किताब लेकर बिस्तर पर पड़े रहना हो, योगा करना, नेलपेंट लगाना, गरमा गरम चाय पीना या अकेले घूमने जाना हो। हमें कुछ ऐसा करने की जरूरत है जो हम दूसरों की जरूरत पूरी करने के लिए नहीं कर रहे हों।

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Never underestimate the importance of setting aside time for yourself.

कुछ लोगों के ये दूसरों के मुकाबले बड़े पैमाने पर करना पड़ता है, लेकिन ये जो भी है, इस अपनेसमय को सहेजना बहुत जरूरी है क्योंकि ये हमें रिचार्ज करता है। वरना हम अपनी पूरी जिंदगी यही समझते बिता देंगे कि मम्मियां हमेशा थकी हुई क्यों होती हैं। माएं कृप्या याद रखें कि इसके पहले कि ये अदृष्य काम के बोझ तले आप दब जाएं, कभी आप भी अपनी जिंदगी में उत्साह से भरे थे। आप एक मां और पत्नी बनने से पहले सिर्फ आप थे। मां और पत्नी बनने के चक्कर में खुद को ना भूलें।