कब देना शुरु करें बेबी को पानी..पैरेंट्स के महत्वपूर्ण जानकारी

इस लेख में हम आपको बताएंगे कि क्यों 6 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए पानी अच्छा और जरुरी नहीं है और कब असल में आपको पानी देने की शुरुआत करनी चाहिए।

क्या आपको पता है कि बेबी को समय से पहले पानी देना उनकी जिदंगी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है? इस लेख को पढ़िए और जानिए कि असल में बेबी को पानी देने की शुरुआत करने की सही उम्र क्या होती है।

हम सभी जानते हैं कि जिंदगी के लिए पानी सबसे जरुरी है। बच्चे हो या बड़े कोई भी इसके बिना नहीं रह सकते। लेकिन बात जब छोटे बच्चों की आती है तो उनके लिए पानी देने के नियम अलग होते हैं।

इस लेख में हम आपको बताएंगे कि क्यों 6 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए पानी अच्छा और जरुरी नहीं है और कब असल में आपको पानी देने की शुरुआत करनी चाहिए।

क्यों 6 महीने से कम उम्र के बच्चों के नहीं पड़ती पानी की जरुरत

आपका बेबी स्तनपान करता हो या फॉर्मूला दूध पीता हो लेकिन जब तक वो 6 महीने के ना हो जाएं और ठोस आहार ना लेने लगे आपको बेबी को पानी देने की जरुरत नहीं होती है।

Healthline में पेडिट्रिशियन डॉ. एलन ग्रीनी ने कहा है कि मां के दूध में मौजुद पानी की मात्रा बेबी के हेल्थ के लिए पर्याप्त है, जो बेबी के फेफड़ों, टॉयलेट और मल के जरिये खत्म हो जाता है।

जानिए क्यों नवाजत शिशु को पानी देना स्वास्थ से खिलवाड़ करना है:

  • पानी में कैलोरी नहीं होता है लेकिन आपके बच्चे का पेट इससे पेट जरुर भरता है। इससे वजन कम हो सकता है बिलीरुबिन का स्तर बढ़ सकता है।
  • पानी आपके बेबी के लिए नशीला पदार्थ का काम करता है (हम इसके बारे में लेख के दूसरे पेज में चर्चा कर चुके हैं।)
  • आपके बेबी की किडनी इतनी सक्षम नहीं होती है कि वो अधिक द्रव्य को हैंडल कर पाएं। बेबी को पानी देने से उनकी किडनी से इलेक्ट्रोलाइट और सोडियम खत्म होता है जिसकी वजह से डिहाइड्रेशन होने की संभावना होती है।

स्तनपान करने वाले बेबी

स्तनपान करने वाले बच्चों को पानी की जरुरत जब तक वो ठोस आहार ना शुरु कर दें तब तक नहीं होती है।

Kelly Bonyata (IBCLC) की बताती हैं कि ब्रेस्टमिल्क में 88% पानी ही होता है वो भी खासकर शुरुआती दिनों में बेबी को जितना तरल पदार्थ चाहिए उतना मिल जाता है। World Health Organisation (WHO) के लैक्टेशन विशेषज्ञ का भी मानना है जो बच्चे खासकर मां के दूध पर निर्भर हैं उन्हें पानी की बल्कुल भी जरुरत नहीं होती है।

यहां तक कि जन्म के कुछ दिनों के बाद भी मां का कोलोस्ट्रम बेबी को हाइड्रेशन देता है और इसके अलावा बेबी को और कुछ भी नहीं चाहिए होता है।

‘चीनी पानी’ का क्या?

हो सकता है कि कई बड़े-बुजुर्ग आपको सलाह दे सकते हैं कि नवजात शिशु को चीनी पानी दें। लेकिन डॉक्टर्स इस नुस्खे को ना आजमाने की सलाह देते हैं।

 Academy of Breastfeeding Medicine के मेडिकल प्रोफेशनल के अनुसार ब्रेस्टफीडिंग के समय किसी तरह का सप्लीमेंट ना दें क्योंकि इससे बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है।इससे अधिक वजन कम होता है, अधिक बीमार रहने का खतरा होता है।

यहां तक कि कई मेडिकल प्रैक्टिशनर का मानना है कि अगर नवजात शिशु को कम मात्रा में चीनी पानी दर्द से राहत के लिए दिया जाता है। हालांकि Lancet में पब्लिश रिर्सच के अनुसार सुक्रोज से दर्द को राहत नहीं मिलती है।

फॉर्मुला दूध पीने वाले बेबी

फॉर्मुला मिल्क में 80% पानी होता है इसलिए बेबी के लिए ये फायदेमंद होता है और बेबी को फॉर्मुला मिल्क लेने के बाद भी पानी की जरुरत नहीं पड़ती है।

पेडिट्रिशियन स्टीफन आर डेनियल के अनुसार आपको दूध पाउडर-पानी के अनुपात के बारे में जानकारी होनी चाहिए। अगर आप फॉर्मुला मिल्क में अधिक पानी मिला देंगी तो इसके पोषक तत्व कम हो जाएंगे और बेबी के शरीर में अधिक पानी जाने के कारण नुकसान होगा।

गर्मी...बेबी और पानी की खपत

हमारे देश में ठंढ से ज्यादा अधिकतर जगहों पर गर्मी रहती है और आप सोच रहे होंगे कि क्या बेबी को गर्मी में 6 महीनों तक पानी नहीं देना सही है।

लेकिन इसका भी जवाब नहीं है और ये नतीजा (Almroth and Bidinger, 1990; Ashraf et al., 1993; Sachdev et al, 1991)रिर्सच में निकाला गया है।

अगर बाहर बहुत गर्मी भी है तो फॉर्मुला दूध पीने वाले बच्चों को इसके अलावा पानी की आवश्यकता नहीं होती है। आप गर्मियों में नोटिस करेंगे कि बच्चे कम अंतराल पर दूध पीना चाहते हैं लेकिन बहुत कम मात्रा में दूध पीते हैं। दरअसल शुरुआत में मां से मिली दूध से वो प्यास बुझा लेते हैं इसलिए वो अच्छे से हाइड्रेटेड रहते हैं।

इसका ये भी अर्थ है कि माओं को अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए ताकि वो गर्मियों में बेबी की अधिक दूध की मांग को पूरा कर सकें।

फॉर्मुला दूध पीने वाले बेबी को गर्मियों में भी पानी की आवश्यकता नहीं होती है । आपको बस दूध पिलाने के अंतराल को कम करना होगा।

अगर बेबी को डिहाइड्रेशन होता है या पेट में कीड़ा होता है  (जिसकी वजह से शरीर का पानी खत्म हो जाता है) तो हो सकता है डॉक्टर बेबी के लिए ओरल डिहाइड्रेशन सॉल्युशन दे (पानी नहीं)।

कब दें बेबी को पानी

नवजात शिशु और बेबी को 6 महीने के बाद

इतने बड़े बच्चों को ब्रेस्टमिल्क और फॉर्मुला मिल्क के अलावा बिना डॉक्टर की सलाह के कुछ भी ना दें।

6 से 12 महीने के बेबी

  • एक बार बेबी 6 महीने का हो जाए तो उन्हें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी दिया करें। इस उम्र में 24 घंटे में 2 आउंस से अधिक पानी ना दिया करें। इससे ज्यादा पानी लेने के बाद बच्चे दूध पीने में कमी कर सकते हैं जो इस समय सबसे जरुरी होता है।
  • जब आपका बेबी ठोस आहार लेना शुरु करता है तो उन्हें कुछ भी खिलाने के बाद बहुत ही कम मात्रा में पानी दिया करें ताकि कब्ज की समस्या ना हो। लेकिन पानी को दूध से रिप्लेस ना करें।
  • बेबी जैसे-जैसे अपने पहले जन्मदिन के नजदीक आते हैं उन्हें पानी देने की मात्रा में उनकी एक्टिविटी के साथ वृद्धि करें।

12 महीने से अधिक के बेबी

  • इस उम्र तक बच्चे दूध पीना कम कर देते हैं और दिन भर में तीन बार भोजन और नाश्ता करते हैं।
  • शारीरिक गतिविधियों के बढ़ने के कारण आपके बेबी की पानी पीने की मात्रा खुद-ब-खुद बढ़ जाएगी।
  • United States Department of Agriculture  के अनुसार बच्चे को एक दिन में 1.4 लीटर पानी (4.23 कप) देना चाहिए। इसमें पानी का स्त्रोत भोजन और दूध भी हो सकता है।
  • अगर आपको बेबी को आवश्यक मात्रा में पानी पिलाने में समस्या आ रही है तो पानी को अलग-अलग तरीके से देना शुरू करें। उनके लिए रंग-बिरंगा सिप्पी कप लेकर आएं।आप बेबी को अधिक पानी युक्त भोजन जैसे तरबुज, अंगूर और तरह-तरह के सूप भी दे सकते हैं।

बच्चों में पानी का नशा

क्या है ये

एक बच्चे की किडनी इतनी परिपक्व नहीं होती है कि वो अधिक मात्रा में तरल पदार्थ को हैंडल कर सकें। 6 महीने से पहले पाने देने से हो सकता है बेबी के शरीर को अधिक तरल पदार्थ को हैंडल करना पड़े और उनका इलेक्ट्रोलाइट असंतुलित हो सकता है।

बेबी को अगर 8oz (240 ml) पानी दिया जाए तो भी वो पानी के नशे का शिकार हो सकते हैं। पानी देने से बेबी के मस्तिष्क में सूजन आ सकती है और इससे मृत्यु भी हो सकती है।

लक्षण और संकेत

  • उल्टी
  • आलस्य, उंघना
  • अधिक पसीना चलना
  • शरीर का कम तापमान (<97 °F or 36.1 °C)
  • अधिक टॉयलेट करना (एक दिन में 6-8 डायपर)

अगर आप इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए तो जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर के पास जाएं।

संदर्भ

kellymom.com

St. Louis Children’s Hospital

Healthline