शिशुओं के लिए क्या सही है कपड़े की नैपी या डायपर...और क्यों जानिए

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बाजार में नर्म कपड़ों से बनी कई तरह की नैपी मिल जाती है और आजकल डिस्पोज़ेबल डायपर के कई ब्रांड्स भी हर जगह उपलब्ध हैं ।

अमूमन जन्म के बाद शिशु को सूती कपड़े में लपेट कर रखने और उन्हें सूती कपड़े के लंगोट पहनाने का ही प्रचलन है । बाजार में नर्म कपड़ों से बनी कई तरह की नैपी मिल जाती है और आजकल डिस्पोज़ेबल डायपर के कई ब्रांड्स भी हर जगह उपलब्ध हैं ।

आप अपने शिशु के लिए किसका चुनाव करती हैं ये पूरी तरह आप पर निर्भर करता है क्योंकि कपड़े के लंगोट के अलावा नवज़ात शिशु को डायपर पहनाने के दौरान भी आपको कुछ सावधानियां बर्तनी होगी जैसे 2-3 घंटे के अंतराल पर डायपर चेक करना चाहिए या उससे पहले अगर आपको लगे की शिशु मलत्याग कर चुका है तो तुरंत ही साफ करना आवश्यक है ।

वहीं नवज़ात शिशु कई बार नैपी गीला करते हैं और उन्हें रात में भी मलत्याग करने की आदत होती है । ऐसे में कपड़े की नैपकीन को हर मूत्र त्याग के बाद ज़ल्दी-ज़ल्दी बदलना होता है दिन के समय तो माएं ऐसा आराम से कर देती हैं लेकिन रात में कठिनाई का सामना करना पड़ता है ।

13 Steps to Cure Baby Diaper Rash at Home शिशुओं के लिए क्या सही है कपड़े की नैपी या डायपर...और क्यों जानिए

हो सकता है कि शिशु नैपी गीली करने के बाद कोई सिग्नल ना दें ऐसे में देर तक गीले कपड़ों में रहने से उसे बुखार या कफ की समस्या हो सकती है साथ ही शिशु सुकून से सो भी नहीं पाता है ।

मेरे परिवार वालों ने शिशु को कभी भी डायपर ना पहनाने की सलाह दी थी  । उन सभी का मानना था कि इससे शिशु के कमर की मजबूती प्रभावित होती है , उनके त्वचा में संक्रमण होने का डर रहता है और शिशु के चलने के तरीके अलग से हो जाते हैं इत्यादि ।

लगातार दो महीने की परेशान कर देने वाली रातों के बाद मैंने अपनी ज़िद से ही उसे डिस्पोज़ेबल डायपर पहनाना शुरु कर दिया । यकींन मानिए उसके बाद मेरी परेशानी आधी हो गई और बेबी के साथ मेरी भी नींद पूरी होने लगी ।

चूंकि मेरे शिशु का जन्म गर्मी के दिनों में हुआ था तो मैं उसे केवल रात में ही सोने के पहले डायपर पहनाया करती थी और अब तक मुझे डायपर पहनाने से संबंधित कोई विशेष समस्या नहीं देखने को मिली है ।

वैसे आपको ये भी मालूम हो कि ताज़ा शोध के मुताबिक जो बच्चे शुरुआत से ही हमेशा डायपर पहनते हैं उनके पैरों के बीच की दूरी बढ़ने के कारण उनकी चाल थोड़ी अलग हो जाती है । आईए हम आपको दोनों ही विकल्पों से होने वाले फायदे और नुकसान के विषय में थोड़ी जानकारी दे दें...।  

कपड़े की नैपी पहनाने के फायदे...

  • ये सस्ता विकल्प है आप चाहें तो घर पर भी सूती कपड़े से इसे बना सकती हैं ।
  • गर्मी के मौसम में शिशु के लिए सबसे आरामदेह होता है ।
  • शिशु को हल्का महसूस होता है और अलग से कोई भार नहीं लगता ।
  • शिशु के गुप्त हिस्सों में हवा लगती है, जिससे रैशेज , पसीने आदि की समस्या नहीं होती ।
  • नुकसान की बात करें तो बार बार लंगोट बदलना शायद आपको झंझट का काम लग सकता है और खास कर बाहर जाने के दौरान तो बिल्कुल भी नहीं ।

डिस्पोज़ेबल पैंट्स पहनाने के फायदे...

  • सर्दियों में शिशु अधिक मूत्र त्याग करते हैं और ऐसे पैंट्स पहनाने से उन्हें गीले पन का ऐहसास कम से कम होता है ।
  • बच्चे सुकून से जहां मर्जी वहां खेल सकते हैं क्योंकि बिस्तर गीला करने का डर नहीं रहता  ।
  • इसके नुकसान कई हो सकते हैं लेकिन तब जब आप एक ही डायपर कई घंटों तक पहनाकर रखें । साफ-सफाई का ध्यान रखना होगा और नैपी बदलने के दौरान ऐंटी रैशेज क्रीम या पाउडर भी लगाना चाहिए ।
  • गर्मी के दिनों में या ऐसे भी कोशिश यही करें कि शिशु कम से कम डायपर पहनें । बाहर जाने के दौरान या रात में सोने के पूर्व डायपर पहनाना ठीक है लेकिन 24X7 डायपर पहनना शिशु को परेशान करने के साथ-साथ त्वचा को भी नुकसान पहुंचा सकता है