कंगना की स्कूल की दोस्त ने लिखी चिट्ठी...बताया असल में कैसी हैं बॉलीवुड की क्वीन

कंगना रनौत की बचपन की दोस्त उन्हें ऑयरन लेडी कनू के रूप मे याद करती हैं।

कंगना रनौत भले बॉलीवुड में बाहर से आई हों लेकिन उन्होंने हाल फिलहाल में आए कई न्यूकमर से अधिक सफलता पायी है। पिछले कुछ समय से कंगना रनौत लगातार किसी ना किसी कंट्रोवर्सी का शिकार हो रही हैं और धीरे धीरे कंट्रोवर्सी बढ़ते ही जा रही है।

एक ओर जहां कंगना रनौत ऋतिक रोशन के साथ अपने रिलेशनशिप को लेकर हमेशा अडिग रही हैं तो वहीं ऋतिक रोशन ने कभी नहीं माना कि कंगना रनौत कभी भी उनकी जिंदगी का हिस्सा रही थीं।

आरोप प्रत्यारोप के दौर के बाद बॉलीवुड के अंदर बंटे अलग-अलग खेमो ने भी अपना साइड बता दिया है। उम्मीद के मुताबिक कई बड़े स्टार्स ने खुले तौर पर ऋतिक का पक्ष लिया है।

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अभी तक बॉलीवुड में शायद ही कोई है जिसने कंगना रनौत की साइड ली हो लेकिन आखिरकार कंगना के स्कूल की दोस्त ने कंगना के बारे में चिट्ठी लिखी है और बताया कि वो रियल लाइफ में कैसी हैं और कैसे विवाद और अफवाहें उनके साथ जुड़ते चली जाती हैं।

कंगना के स्कूल की दोस्त डॉ बोंदिना एलांबाम जो खुद एक लेखिका और कवि हैं उन्होंने यह लिखा जिसे लोग सोशल मीडिया पर पढ़ रहे हैं।

आयरन लेडी कनू

डॉ एलांबाम ने अपनी चिट्ठी में लिखी है कैसे कंगना चंडीगढ़ में पढ़ने आई थी जहां दोनों रूममेट थे। उन्हें इंग्लिश नहीं बोलने आने के कारण कुछ मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा लेकिन 12वीं उन्होंने अच्छे नंबरों से पास किया। कंगना की स्कूल की दोस्त ने उनकी बहुत ही सकारात्मक छवि पेश की है और कहा है कि वो कभी भी कंगना जितनी विनम्र इंसान से नहीं मिली।

उन्होंने एक घटना का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने बताया कि स्टारडम मिलने के बाद उन्होंने चंडीगढ़ में अपने सभी रूममेट को बुलाया ताकि उनके साथ समय बिता सकें और पुराने पलों को फिर से जी सकें।

कंगना का यह अवतार कंगना की एक और साइड दिखाता है क्योंकि शायद ही किसी स्टार के पास इतना समय हो कि वो अपने गुजरे जमाने से जुड़े लोगों के साथ समय बिताएं। 

डॉ एलांगबम ने एक किताब लिखी है जिसका टाइटल Between the Poet and her Pencil है। कुछ समय पहले इसे लॉन्च भी कंगना ने ही किया था जबकि दोनों एक दूसरे से ज्यादा संपर्क में नहीं रहते हैं। उन्होंने कहा है कि कंगना को पिछले कई सालों से जानने के कारण उन्हें पता है कि लोग उनके ऊपर इसलिए उंगलियां उठा रहे हैं क्योंकि उन्होंने अपने दम पर बॉलीवुड में जगह पाई है।

यहां पढ़िए उन्होंने क्या लिखा है:

पिछले कुछ दिनों से कंगना रनौत की जिंदगी के बारे में काफी बातें की जा रही है। मैं भी इस तथाकथित सोशल मीडिया पर अपने निजी अनुभवों को रखना चाहूंगी। मैं कंगना रनौत को काफी लंबे समय से जानती हूं।

हम दोनों चंडीगढ़ में स्कूल में क्लासमेट भी थे और रूममेट भी। कनू काफी शांत रहने वाली स्मार्ट और कॉन्फिडेंट लड़की थी। चूंकी वो हिंदी मिडियम स्कूल से आई थी इसलिए पहले कुछ महीने उसके लिए काफी मुश्किलों भरे थे। (D.A.V मॉडल स्कूल, सेक्शन Sec15A).

मैं खुद भी काफी डरपोक थी और ये मेरे लिए भी काफी अलग माहौल था क्योंकि मैं मणिपुर से हूं(भारत का उत्तरी पूर्वी क्षेत्र)। मैं और कंगना दोनों ने अपने नए स्कूल में संघर्ष किया लेकिन उसके लिए ये और भी मुश्किल था क्योंकि उसे हर चीज का सामना इंग्लिश में करना पड़ता था मुझे भाषा को लेकर कभी समस्या नहीं हुई, समस्या थी तो सिर्फ खाने को लेकर और वो भी कुछ दिनों में खत्म हो गई। कंगना एक मेडिकल स्टूडेंट थी और मैं आर्ट्स की स्टूडेंट थी ।

लेकिन वो अक्सर मुझसे मेरे विषय के बारे में पूछा करती थी और मेरे काम की सराहना करती थी, उस समय भी हम बच्चे जरूर थे लेकिन हम अपने पसंद/पैशन को लेकर बिल्कुल साफ थे। हम अपने करियर और भविष्य के बारे में बातें भी करते थे। वो अक्सर मेरा मनोबल बढ़ाती थी कि मैं और स्केच बनाऊं और इसी को प्रोफेशन बनाने की सलाह भी देती थी।

वो मॉडलिंग में दिलचस्पी लेती थी लेकिन एक्टिंग को अपना करियर बनाने की नहीं सोचती थी। वो शॉर्ट ब्रेक में मिमिक्री भी करती थी और मुझे याद है कि मैंने एक बार एक्टिंग को करियर बनाने के बारे में पूछा भी था लेकिन उसका जवाब था नहीं एक्टिंग तो नहीं। मैंने फिर से पूछा था कि सोचो की यश राज से ऑफर मिले तब? उस समय वो मुस्कान के साथ उसने कहा था तब मैं सोचूंगी। लेकिन उस समय मेरे या उसके सपने में भी मौजूदा स्टारडम का कोई अंदेशा नहीं था।

मैंने कभी इतना मेहनती शख्स नहीं देखा। वो घंटो साथ में पढ़ती थी ताकि इंग्लिश को मजबूत कर सके और बारहवीं की परीक्षा भी वो अच्छे नंबरों से पास करने में कामयाब रही। मैं उसे बिल्कुल सीधे और अच्छे इंसान के रूप में याद करती हूं।

वो हमारे लिए घर से बने खाने भी लेकर आती थी (मैं अभी भी उसके पापा की बिरयानी खाने के लिए तरसती हूं।)

बारहवीं के बाद हम सब अलग अलग हो गए लेकिन फोन और ईमेल के जरिए एक दूसरे से संपर्क में थे (बॉलीवुड में आने के बाद भी)। हम व्यस्त रहने के कारण ज्यादा एक दूसरे से बातें नहीं करते लेकिन हम कभी एक दूसरे को नहीं भूले।

अप्रैल 2015 में कंगना रनौत ने हमें फिर से मिलने के लिए चंडीगढ़ इनवाइट भी किया (तीन रूममेट)। हमने बॉलीवुड की क्वीन के साथ पुराने पलों को फिर से जिया। मैं अधिक बॉलीवुड को नहीं फॉलो करती हूं लेकिन मैं दूसरे एक्टर्स के बारे में कहानियां सुनती रहती हूं।

मैं उससे जुड़े सारे आर्टिकल पढ़ती हूं और सभी इंटरव्यू भी देखती हूं (चूंकि वो मेरे दिल के बेहद करीब है और मेरी दोस्त है)। इसलिए मैं पूरी स्थिति को समझ पा रही हूं। उसकी सफलता ही सबसे बड़ी समस्या है। कुछ लोग इसे हल्के में नहीं ले पाए तो कुछ लोगों  के लिए यह बेहद आसान था क्योंकि वो अपनी सफलता से डराकर बातें करते हैं। लेकिन कोई कुछ नहीं कर सकता क्योंकि वो आयरन लेडी हैं।

मैं उसे बहुत ही अच्छे से जानती हूं, वो बहुत ही विनम्र है। एक एक्ट्रेस जो अभी भी अपने स्कूल के दोस्तों से संपर्क में है और उनसे मिलने के लिए समय निकालती है और अपनी जड़ों को भी नहीं भूली है।

वो खुद के लिए खड़ी होना जानती है। कंगना रनौत Self Made है और (मैंने उसे स्कूल गर्ल से बॉलीवुड का क्वीन बनते देखा है)।मैं उसके हिम्मत की दाद देती हूं। कनू तुम ऐसे ही आगे बढ़ते रहो और मुश्किलों को पार करते जाओ।