"और कोई गुड न्यूज़?..."

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ताज्जुब इस बात का होता है जब यह सवाल उनके माता-पिता न पूछ कर दूर दराज के रिश्तेदार या आस पड़ोस वाले करते है

एक नव-दम्पति जब विवाह कर के अपने जीवन में आये बदलाव से सामंजस्य बैठा रहे होते हैं तब अक्सर उन्हें इस सवाल का सामना करना पड़ता है 'कुछ है क्या ?' या सीधे शब्दों में कहें तो "और कोई गुड न्यूज़..?"

ताज्जुब इस बात का होता है जब यह सवाल उनके माता-पिता न पूछ कर दूर दराज के रिश्तेदार या आस पड़ोस वाले करते है। जाने अनजाने लोग यह नहीं भांप पाते की यह सवाल उस जोड़े पर, जो पहले से ही अपने भविष्य की योजनाएं बना रहे हैं या यूँ कहे की जीवन में आये सबसे बड़े बदलाव से ताल मेल बठा रहे हैं के लिए एक दबाव बन जाता है।

daughter in law "और कोई गुड न्यूज़?..."

पती पत्नी अपने भविष्य की योजनायों में परिवार बढ़ाने को भी महत्त्व देते हैं परंतु उनकी योजनाएं के बारे में दुनिया का जानना आवश्यक नहीं है। आज कल के समय में अधिकतर लोग औसत आयु में  विवाह करते हैं इसका मतलब हैं की वे अपना भला बुरा समझते है और जो उनके लिए सबसे बेहतर हैं उसी का चुनाव करते हैं।

समय के साथ कई चीज़ें बदली हैं और आजकल बच्चों के पालण पोषण और देख रेख में बहुत बदलाव देखने को मिले हैं। हर माता पिता अपने बच्चे को सबसे अच्छी शिक्षा और माहौल देना चाहते हैं तथा उनकी हर इच्छा का ख्याल रखना चाहते हैं।

इसके लिए वह पहले बेहतर भविष्य और जमापूंजी पर ध्यान देते है अथवा निवेश करते है। कई बार यह देखने में आता है कि एक जोड़े की तलना दुसरे जोड़े से की जाती है की उन लोगों ने भी तो सही समय पर विवाह किया था और आज उनकी इतनी बड़ी संतान है या उनका परिवार पूरा हो चुका है।

ये बात ज़्यादातर अपने माता पिता ही कहते हैं और इससे और कुछ नहीं बल्की द्वेष भावना का ही विकास होता है। कई बार वह दम्पति उस दिशा में प्रयास भी कर रहे होते हैं परंतु उन्हें सफलता हाथ नहीं लगती और वह उसका कारण लोगों से छिपाना चाहते हैं। ऐसे में लोगों के सवाल तीर की तरह चुभते हैं और वे मानसिक दबाव में आ जाते हैं।

ऐसे में हमारा और आपका सहयोग आवयश्क होता है और हमें समझना चाहिए की किसी के नए जीवन में पहले से ही क्या चल रहा है, हम अनजान हैं अतएव हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए की हमारे सवाल किसी को ठेस न पहुंचाएं। जब तक कोई स्वयं आपसे परिवार पर विचार विमर्श नहीं करता अथवा आपको इतना हक़ नहीं देता की आप उनके जीवन में अपनी राय दे चपु रहना ही बेहतर है।

माता पिता को ये हक़ है की वह अपने बच्चे को सही दिशा दे पर उनकी समस्याओं को जानना भी माता पिता का कर्त्तव्य है, अतः नए दंपत्ति को समय दें तथा समय आने पर उनसे विचार विमर्श करें, दूर दराज के रिश्तेदार तथा पडोसी कृपया अपने काम से काम रखें और एक बेहतर समाज का उदाहरण पेश करें|

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Source: theindusparent