एक साथ कई एक्स्ट्रा कर्रिक्युलर एक्टिविटीज़ में हिस्सा लेने वाले बच्चों को हो सकते हैं ये नुकसान

एक साथ कई एक्स्ट्रा कर्रिक्युलर एक्टिविटीज़ में हिस्सा लेने वाले बच्चों को हो सकते हैं ये नुकसान

एक्स्ट्रा कर्रिक्युलर एक्टिविटी आवश्यक तो है पर कहां तक और एक साथ कितनी संख्या में ये विषय विचार करने योग्य है ।

हर माता-पिता अपने बच्चे के भविष्य को लेकर कई सपने संजोते हैं जिसमें से पढ़ाई के क्षेत्र में बच्चे के एक्सिलेंट रिज़ल्ट के साथ ही वो अपने अधूरे प्रयासों को बच्चे के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं और जैसे ही बच्चा थोड़ा बड़ा होता है उसे किंडर गार्डेन भेजने के साथ एक साथ कई एक्स्ट्रा कर्रिक्युलर एक्टिविटीज़ जैसे-तैराकी, खेल-कूद, संगीत ,डांस या फिर कराटे आदि सीखने में लगा देते हैं ।

पैरेंट्स के लिए ये बड़ी ही सम्मानजनक बात बन जाती है कि उनका बच्चा 2-3 साल से ही एक साथ कई गतिविधियों को आज़मा रहा है ।

एक्स्ट्रा कर्रिक्युलर एक्टिविटीज़: आवश्यक तो है पर कहां तक

माना कि हमें अपने सपने बच्चों के माध्यम से सच करने हैं पर क्या आपको नहीं लगता कि ये सीखने की होड़ जीवन में एक बार शुरु होने के बाद हमेशा ही लगी रहती है इसलिए फिलहाल बच्चों को मूल रुप से अपना समय देकर उन्हें उनका बचपन भरपूर जीने देना चाहिए ।

एक्स्ट्रा कर्रिक्युलर एक्टिविटी आवश्यक तो है पर कहां तक और एक साथ कितनी संख्या में ये विषय विचार करने योग्य है ।

एक साथ कई एक्स्ट्रा कर्रिक्युलर एक्टिविटीज़ में हिस्सा लेने वाले बच्चों को हो सकते हैं ये नुकसान

यूं तो कई शोध इस बात की पुष्टि कर चुका है कि पढ़ाई से इतर जो बच्चे शौकिया तौर पर अलग-अलग तरह की गतिविधियों में भाग लेते हैं वो भविष्य में अधिक सफल और आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं ।

लेकिन आज़कल बच्चे अपने शौक अपनी रुचि के साथ ही माता-पिता की रुचि एवं अपेक्षाओं के मुताबिक भी कई एक्सट्रा एक्टिविटी को अपनाते हैं जिसके कारण उनकी जिन्दगी व्यस्तम होने लगी है ।

इसलिए हो सकता है कि मल्टी टास्किंग के इस ज़माने में रफ्तार से चलने की ज़िद में आपका बच्चा आपसे दूर जा रहा हो और शायद आपसे भी अधिक तनाव लेना शुरु कर दे।

एक साथ कई एक्स्ट्रा कर्रिक्युलर एक्टिविटीज़ में लगा देने से बच्चों में क्या परेशानी देखने को मिल सकती है...

  • एकाग्रता की कमी- जब बच्चे रोज़ स्कूल के बाद हॉबी क्लासेज के लिए जाने लगते हैं तो ज़ाहिर है कि उनपर होम वर्क पूरा करने का दबाब बना रहेगा । कई तरह की गतिविधियों में शामिल होने के कारण वो किसी एक चीज पर पूरी मेहनत नहीं कर सकेंगे । ऐसे में कई बच्चे क्लास जाना भी छोड़ देते हैं या नियमित नहीं रहते इसलिए पढ़ाई में एकाग्रता नहीं रहेगी ।
  • थकान और तनाव-  जिस तरह हम दिन-भर भाग-दौड़ करने के बाद थकान का अनुभव करते हैं और स्ट्रेस लेते हैं ठीक वैसा ही बच्चों के साथ होता है । जब बच्चे घर में पैरेंट्स के साथ खेलने या अपनी बातें रखने का समय नहीं निकाल पाते तो उन्हें तनाव होता है । हर वक्त किसी ना किसी चीज़ के लिए उन्हें तैयारी करनी होती है जिसमें उन्हें बेहतर ना कर पाने की भी चिंता बनी रहती है । हो सकता है कि इन कारणों से वो अच्छी नींद ना ले पा रहे हों ।
  • व्यवहार में झुंझलाहट- अगर बच्चे कई एक्टिविटीज़ को केवल आपके कहने पर अपनाए हुए हैं तो उनके व्यवहार में नकारात्मकता दिखने लगती है। जैसे किसी को डांस का शौक है लेकिन आपने उसे पेंटिंग या स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग लेने की सलाह दे रखी है तो ऐसे में बच्चा अपनी इच्छा के विरुद्ध काम करने के दौरान गुस्सैल या चिड़चिड़ा बर्ताव वाला हो जाएगा ।  

एक्स्ट्रा कर्रिक्युलर एक्टिविटीज़ चुनने के दौरान पैरेंट्स को क्या करना चाहिए

  • पैरेंट्स को चाहिए कि वो बच्चे का समर्थन करें
  • हर हॉबी के आगे के विकल्प के बारे में बच्चों को जरुर बताएं
  • अपने लिए फ्री टाईम पाने के ख़ातिर बच्चे को ओवरलोड ना करें
  • जहां तक संभव हो बच्चे द्वारा भाग लिए गए बाहरी ऐक्स्ट्रा एक्टिविटीज पर ध्यान दें  
  • प्रोत्साहित करने से उनमें आत्मविश्वास जागेगा इसलिए उन्हें शाबाशी दें
  • एक सप्ताह में रोज़ाना की बजाए हॉबी क्लासेज़ कम होनी चाहिए ताकि बच्चे को आराम मिले ।
  • जिस हॉबी के प्रति बच्चा सजग हो एवं उन्हें ना अटेंड करने के बहाने ना बनाता हो तो समझिए कि उसे वो एक्टिविटी पसंद है ।
  • आप खुद फुरसत के पलों में अपने पुराने अधूरे शौक पूरा करें-जैसे पेंटिंग करना, लिखना या कोई म्युजिक इन्सट्रुमेंट बजाना भी सीख सकती हैं ताकि आपको संतुष्टि मिले और बच्चे को आप से प्रेरणा मिल सके।                                                            

 आपसे एक बात कहूं...बच्चे से आशा रखना सामान्य है लेकिन उनकी पसंद-नापसंद को परखे बिना अपनी रुचि  अपने शौक उसपर थोपना गलत है ।मैं भी कबूल करती हूं कि अपने जीवन में जो मैं चाहकर भी ना कर सकी वो मैं अपने बच्चे से करवाने की इच्छा रखती हूं और मेरी ये सोच पूरी तरह सही नहीं है ।

इस बात को लेकर मेरे मन में द्वंद चलते हैं कि मैं अपने बच्चे के लिए पढ़ाई के अलावा कौन सी गतिविधि का चुनाव करुं संगीत में मेरी रुचि और तालीम के कारण मेरे लिस्ट में सबसे ऊपर वही रहता है...इसी तरह आप भी शायद अपने बच्चे के माध्यम से अपने अधूरे ख्वाब शौक पूरा करना चाहती होंगी तो बेहतर होगा कि आप उन्हें कई विकल्प दें जिसमें से कोई एक वो स्वंय ही चुन सकें ।

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Written by

Shradha Suman