उत्तर प्रदेश में रियल मोगली गर्ल...बंदरों के साथ हुई बड़ी!

उत्तर प्रदेश में रियल मोगली गर्ल...बंदरों के साथ हुई बड़ी!

जब गांव वालों ने उसे बंदरों से बचाने की कोशिश की तो बंदरों ने लोगों को उस बच्ची को छूने तक नहीं दिया

रुडयार्ड किपलिंग की लिखी किताब द जंगल बुक हम सब ने पढ़ी है। ये मोगली की काल्पनिक कहानी है जिसमें एक छोटा सा बच्चा अपने पैरेंट्स से जंगल में बिछड़ जाता है और भेड़िए उसे बड़ा करते हैं। भले कहानी अवास्तविक लगती है कि किसी इंसान को जानवर कैसे पाल सकते हैं?

लेकिन ऐसा लगता है कि ये सिर्फ सही नहीं बल्कि सच्चाई है। जी हां आपने बिल्कुल सही पढ़ा।

असल जिंदगी की मोगली

इस कहानी को जानकर ऐसा लगता है कि किरदार सीधे किपलिंग की बुक से आ गया है। जी हां रिर्पोट्स के अनुसार उत्तर प्रदेश के कतरनियाघाट पशु विहार के पास एक 8 साल की लड़की को गांव वालों ने बंदरों से जान बचाने की कोशिश की और उसे अस्पताल लेकर आए।

द जंगल बुक की तरह ही जब गांव वालों ने उसे बंदरों से बचाने की कोशिश की तो बंदरों ने लोगों को उस बच्ची को छूने तक नहीं दिया। यहां तक की जब लड़की को बचाने की कोशिश की जा रही थी तो उनकी संख्या बढ़ती ही जा रही थी। गांव वालों ने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी और नग्न अवस्था में पाई गई इस बच्ची को अस्पताल लेकर आए।

मोगली का व्यवहार जानवरों जैसा

अस्पताल के कर्मचारी और पुलिस इस बच्ची को मोगली गर्ल बुला रहे हैं। इस आठ साल की बच्ची को अस्पताल लाया गया तो वो चल भी जानवरों की तरह रही थी।

mowgli girl

चुंकी वो बंदरो के साथ बड़ी हुई थी और इसलिए वो आराम से ना तो बैठ, चल पा रही थी और ना तो भाषा समझ पा रही थी।

डॉक्टर्स ने भी बताया कि जब उसे पहले बार अस्पताल लाया गया तो वो अपने हाथों से खा भी नहीं पा रही थी। वो खाना जमीन पर फेंक कर और मुंह से खाने की कोशिश कर रही थी।

पुलिस ने मीडिया को बातचीत में बताया कि बच्ची को वहां से बचा कर लाना आसान नहीं था। उसके पूरे शरीर पर घाव थे। उनके अनुसार हमारी प्राथमिकता उसे सही उपचार देना और पैरेंट्स को खोजना है।

पुलिस ने साथ ही ये भी कहा कि वो लड़की बहुत ज्यादा कमजोर और भूखी लग रही है। इस बात की आशंका ज्यादा है कि बच्ची को मां बार ने छोड़ दिया।

वो जल्दी सीख सीख रही है मानव स्वभाव

चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डी के सिंह जो उस बच्ची का इलाज कर रहे हैं उनका कहना है कि बच्ची बात नहीं करती और खुद को खुजलाती भी बंदरों की तरह है। ऐसा लगता है कि वो कई सालों तक जंगल में रही है।

अब मोगली गर्ल धीरे धीरे ठीक हो रही है और वार्ड ब्वॉय को पहचान लेती है। ऐसा लगता है कि बच्ची को काफी कम उम्र में जंगल में छोड़ा गया था। डी के सिंह की मानें तो वो ना तो बात कर पा रही थी और ना कोई भाषा समझ रही थी। वो कई सालों से जंगलों में रह रही थी इसलिए व्यवहार भी उनके जैसा ही है।

उत्तर प्रदेश में रियल मोगली गर्ल...बंदरों के साथ हुई बड़ी!

  उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि वो अब हाथों के संकेत समझ जाती है और धीरे धीरे मानवीय स्वभाव को अपना रही है।

मोगली गर्ल की कहानी समाज के उन वर्ग को दर्शाती है जो बेटियों को जन्म देकर छोड़ देते हैं। इस तरह के केस देखकर ऐसा लगता है कि भारतीयों में अभी भी अपने बेटे की चाह बेटियों से अधिक है

कहानी में नया मोड़!

भले मोगली गर्ल को जंगल में बड़ा किया गया है लेकिन पुलिस इसे सच नहीं मान रही है।एक रिर्पोट के मुताबिक बच्ची जिसे एहसास नाम दिया गया वो असल में मानसिक बीमारी से ग्रसित है। अब बच्ची को चाइल्ड वेलफेयर कमिटी बहराइच में भेज दिया गया है।

बहराइच चाइल्डलाइन के वॉलेन्टियर अरुण चौधरी का मानना है कि बच्ची को धीरे धीरे तैयार किया जाएगा कि वो दूसरे बच्चों के साथ रह सके। वो अपने जितने बड़े बच्चों को देखखर खुश थी। हम उसके व्यवहार से खुश हैं।

भारतीयों में आज भी बेटे की चाहत और बेटियों को छोड़ देते हैं!

ये बात हाल में India Human Development Survey (IHDS) की रिर्पोट में सामने आई थी कि आज भी पैरेंट्स बेटे की चाहत रखते हैं। इस सर्वे में ये बात भी सामने आई थी कि बड़ी संख्या में भारतीय एक बेटी चाहते हैं।

  • 73 प्रतिशत भारतीयों ने माना की वो एक बेटी अवश्य चाहते है।
  • 11 प्रतिशत भारतीय दो बेटियों की चाहत रखते हैं
  • 60 प्रतिशत भारतीय एक बेटे की चाहत रखते हैं

भले ये काफी छोटे स्तर पर किया गया सर्वे हो लेकिन इससे सामाजिक मानसिकता का पता चलता है। सर्वे एक छोटा सा तरीका था ये पता करने की बेटियों को लेकर सोच है और ये एक ऐसी सच्चाई है जिसके साथ भारत जी रहा है। नीचे दिए वीडियो में देखिए कि बच्ची का व्यवहार लोगों के लिए कैसा था।

 Watch the video to see how the girl behaves and is learning from those around her.

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Source: theindusparent

Written by

Deepshikha Punj