इस बसंत पंचमी जानिए मां सरस्वती को प्रसन्न करने की विधि

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इस बसंत पंचमी जानिए बच्चे को ज्ञानवान बनाने के लिए कैसे करें सरस्वती की आराधना

जब समस्त श्रृष्टि उल्लास के रंगों से सराबोर होती है , बिना बारिश के ही जब हर तरफ हरियाली और हर लताओं पर फूल सजने लगते हैं तो श्रृतुराज वसंत का आगमन होता है । सर्दी जब अपने पैर समेटने लगती है और धूप कोहरे की चादर हटा हमारे आंगन में खिलने लगती है तो अनायास ही किसी नई सुबह जैसा अनुभव होता है ।

यह समय इतना अनुपम और खूबसूरत होता है कि इस मौसम के स्वागत में हम ना चाहते हुए भी किसी पुष्प की भांति खिल उठते हैं । जी हां, बसंत अपने साथ प्रेम रस लेकर आता है और सभी के हृदय को तर कर जाता है ।

साथ ही माघ महीने की शुक्ल पक्ष में पंचमी तिथि को बसंत पंचमी के रुप में भी मनाया जाता है । मान्यता है कि ब्रम्हा के आवाह्न से इसी तिथि को ज्ञान की देवी मां सरस्वती प्रकट हुई थी और इसलिए यह दिवस शिक्षा, ज्ञान और कलाप्रेमी जनों के लिए बेहद ही खास होता है ।

श्वेत वस्त्र धारण करने वाली मां शारदे चारों दिशाओं में वास करती हैं शायद इसलिए इनकी चार भुजाएं हैं जिसमें वीणा, पुस्तक और माला विद्यमान है । मां के रुप से हमें यह संदेश मिलता है कि वीणा की धुन सी मधुर संगीतमय जीवन के लिए ऐकाग्रता एवं ज्ञान के सदुपयोग से हमें धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए ।

कब करें पूजन     

हर वर्ष पंचमी तिथि के प्रवेश करने के समय अलग होते हैं इसलिए आपको शुभ मुहूर्त देख कर पूजा करनी चाहिए इस बार सुबह के 07:17 से 1 बजे के पहले तक का समय उत्तम है और शाम के 4:30 बजे के बाद पंचमी तिथि समाप्त हो जाएगी ।

पूजन में पीले रंग का महत्व

src=https://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2018/01/Saraswati pooja.jpg इस बसंत पंचमी जानिए मां सरस्वती को प्रसन्न करने की विधि

पीले रंग को बसंत का पर्याय माना जाता है इसलिए माता को पीले रंग का फूल चढ़ाया जाता है । पीला रंग प्रकृति और उल्लास को भी दर्शाता है साथ ही हमारे पारंपरिक रीति रिवाज़ों में भी इस रंग को शुभ माना जाता है । चूंकि मां सफेद वस्त्र धारण करती हैं इसलिए उन्हें बसंत के आगमन से प्रकृति में आए बदलाव के विभिन्न रंगों से प्रेम है ।

12 नामों का उच्चारण करें

सरस्वती, भारती, सारदा, हंस वाहिनी, जगती, वागीश्र्वरी, कुमुदी, ब्रह्मचारिणी

बुद्धिदात्रि, वरदायिनी, चंद्रकांति और भुवनेश्वरी । माता के इन 12 नामों का स्पष्ट उच्चारण कम से कम 11 बार ज़रुर करना चाहिए । चूंकि ये सभी नाम उन्हें उनके गुण के आधार पर प्राप्त हैं इसलिए इसके जाप से वो प्रसन्न होती हैं ।

तेज बुद्धि और ऐकाग्रता के लिए जाप करें

शारदा शारदाभौम्वदना। वदनाम्बुजे

सर्वदा  सर्वदास्माकमं सन्निधिमं सन्निधिमं क्रिया तू ।

श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा ।

ऊं ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नम: ।

पूजन की विधि  

स्नान के बाद पीला वस्त्र या सफेद वस्त्र पहनना चाहिए । मां शारदे की नई प्रतिमा या चित्र पूजा घर के उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें । पूजा विधि शुरु करने से पूर्व संकल्प अवश्य लेनी चाहिए । साथ ही गणपति की पूजा से कार्यक्रम शुरु करें उसके बाद ही सरस्वती की अर्चना करें ।

पूजा के दौरान पीला एवं श्वेत चंदन का प्रयोग करना चाहिए साथ ही सफेद और पीले रंगों के फूल भी अवश्य चढ़ाएं । पूजा में ऊं ऐं सरस्वत्यै नम: मंत्र का 108 बार जाप करने से विद्या की प्राप्ति होती है । माता को मौसमी फलों और मिष्ठान्नों के साथ दूध, दही, शहद, तुलसी के मिश्रण से तैयार पंचामृत का भोग लगाना चाहिए । इस पूजा में नारियल, घी के दीपक का भी महत्त्व होता है ।

शुभ कार्य की शुरुआत

इस दिन मंगल कार्य करना शुभ माना जाता है । कई लोग बच्चों का विद्या आरंभ इसी दिन करवाते हैं ।  इसके अलावा नए व्यापार शुरु करने, गृह प्रवेश आदि के लिए भी आज का दिन मंगलमय रहता है ।

इस दिन नए बच्चों का अन्न पराशन भी करवाना शुभ माना जाता है । खास कर नन्हे बच्चों की जीभ में शहद से ऊं भी बनाया जाता है मान्यता है कि इससे बच्चा ज्ञानवान बनता है ।