इन 5 पुराने घिसे-पिटे परवरिश के तरीकों को आजमाना बंद कीजिए

कई परवरिश के तरीके हमने अपनी परंपराओं से या पैरेंट्स से सीखी है। लेकिन आधुनिक वैज्ञानिक और मनौवैज्ञानिक रिर्सच का मानना है कि अब समय आ गया है कि हम इन तरीकों को बदलें और कुछ अच्छे तरीके अपनाएं।

कई परवरिश के तरीके हमने अपनी परंपराओं से या पैरेंट्स से सीखी है। लेकिन आधुनिक वैज्ञानिक और मनौवैज्ञानिक रिर्सच का मानना है कि अब समय आ गया है कि हम इन तरीकों को बदलें और कुछ अच्छे तरीके अपनाएं। अगर आप अभी भी इन सामान्य परवरिश के तरीकों को फॉलो करती हैं तो उनमें से कुछ पर फिर से सोच विचार करें।

1. अपने बच्चों को पूरा खाना खत्म करने बोलना

 

बच्चे खाने के मामले में थोड़े मूडी होते हैं और कई बार ऐसा होता है कि बस उन्हें नहीं खाना होता है। इसलिए हर घर में खाने की मेज पर एक ही सीन होता है कि पैरेंट्स बच्चों को पूरी खाना खिलाने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं और बच्चों द्वारा खाना खत्म ना करने पर डराना!
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को जबरदस्ती खाना खत्म करने के लिए कहने का लंबे समय तक नकारात्मक प्रभाव रहता है। डायटिशियन और परिवारिक न्यूट्रिशिन एक्सपर्ट जैकोबसेन के अनुसार इस तरह जबरदस्ती करने से बच्चे भूख या पेट अधिक भरा हुआ जैसे एहसाह को धीरे धीरे समझना बंद कर देते हैं।

धीरे धीरे जब वो व्यस्क हो जाते हैं तो वो अपने शरीर की सुनना बंद करते हैं। इससे अधिक खाने और मोटापे की समस्या होती है। बच्चों पर जबदस्ती खिलाने की आदत से उनकी खाने से जुड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है और भोजन के साथ अच्छा रिश्ता नहीं रह जाता है।

2. बच्चों की सराहना करने से परहेज 

पैरेंट्स अक्सर बच्चों की मुंह पर तारीफ करने से बचते हैं। हम उसी पुराने तरीके को मानते हैं कि बच्चों के सामने तारीफ करने से वो कहीं अधिक कॉन्फिडेंस में ना आ जाएं। लेकिन बच्चों की तारीफ करना जरूरी है क्योंकि आपके बच्चे हर दिन कुछ ना कुछ नया इस दुनिया में सीखते हैं। सराहना करने से बचने से ( या वो कुछ गलत करें तो सिर्फ नकारात्मक फीडबैक देना) आपके बच्चे के सेल्फ मॉटिवेशन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

आपने शायद कोलंबिया यूनिवर्सिटी की स्टडी के बारे में पढ़ा होगा जिसमें ये बताया गया था कि बच्चों की बुद्धिमता की तारीफ करने से उन्हें खुद ही आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है । उनकी सराहना करने से पिछड़े जाने पर भी वो प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ते हैं। उनकी तारीफ करने और मनोबल बढ़ाने से आप उन्हें सही वैल्यू देते हैं ताकि वो जीवन में सफल होने के मार्ग खोज लें।

3. मृत्यु के बारे में बात ना करना

 

मौत के बारे बच्चों से बात ना करना आप सिंगापुर जैसी जगह से लेकर भारत तक में मानो मना हो क्योंकि हर कोई इन संवेदनशील मुद्दों पर बात नहीं करना चाहता। पैरेंट्स नहीं चाहते कि बच्चों से इस विषय पर बात कर उन्हें  दुखी करें या डराएं।  

परवरिश के तरीकों में बच्चों के सामने मधुर शब्दों में सोना या चले जाना जैसे शब्द अब प्रचलन से बाहर हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना कि बच्चों को हमेशा मृत्यु के बारे में ईमानदारी से जवाब देना चाहिए ताकि वो भविष्य में अच्छे से समझ सकें। बच्चों से इस तरह की बातें करने से वो इस तरह के झटकों के लिए कहीं ना कहीं तैयार हो जाते हैं और समझते भी हैं।

4. सेक्स के बारे में बात ना करना

 

ये भी एक ऐसा विषय है जिसके बारे में पैरेंट्स नहीं बात करना चाहते हैं।हम लोगों में से कई जब बच्चों को इससे जुड़ी कुछ बातें समझानी होती है तो हड़बड़ा जाते हैं। आज भी कई पारंपरिक सोच है कि सेक्सुअल जागरूकता जल्दी होने से उनके संस्कारों और मुल्यों पर खतरा पड़ सकता है।

लेकिन रिर्सच की माने तो बच्चों के साथ सेक्स को लेकर फ्रैंक होना दूरगामी स्थिति के लिए ज्यादा अच्छा होता है।

HealthHub Singapore के अनुसार जो बच्चे सेक्स से जुड़ी बातों पर पैरेंट्स से खुलकर बात कर लेते हैं उनके सेक्सुअल एक्टिविटी में लिप्त होने की कम संभावनाएं होती हैं। सेक्स को एक पहेली की तरह बना कर रखने से बच्चे अपने शरीर से ही नहीं खुद को जोड़ नहीं पाते हैं और उससे भी ज्यादा बुरी बात है कि ये बात उन्हें यौन भक्षियों के सामने आघात योग्य बना देती है।

5. उन्हें बड़ों का सम्मान करने सिखाना

 

इज्जत और आदर करना हर पैरेंट्स अपने बच्चे को सिखाते हैं। हम चाहते हैं कि वो बड़े होकर विनम्र बनें। लेकिन सोचने वाली बात  ये है कि बड़े ये हमेशा नहीं जानते हैं। इस तेजी से बदलती दुनिया में बच्चों को  ये सिखाना कि वो पलटकर जवाब ना दें किसी तरह से उपयोगी नहीं रह जाता है। द वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के क्रिटिकल थिंकिंग को टॉप 10 जरूरी स्किल में दूसरे नंबर पर रखा गया है।

हम इस बात को मानेंगे कि उम्र के साथ जरूरी नहीं कि हर कोई शालीन और अच्छे दिल का हो। अपने बच्चों  को सिखाएं कि वो खुद के लिए खड़े हों। अगर बड़े उनसे कुछ गलत चीज की मांग कर रहे हैं तो बच्चों को बदले में इज्जत देने के ये सिखाएं कि वो इज्जत दोनों दोनों तरफ से की जाती है ना कि सिर्फ उम्र से।

अगर आपके पास कोई सवाल या रेसिपी है तो कमेंट सेक्शन में जरूर शेयर करें।

Source: theindusparent