इधर नवरात्री में देवी की पूजा..और उधर तुरंत जन्म ली बच्ची को जिंदा दफन किया

इधर नवरात्री में देवी की पूजा..और उधर तुरंत जन्म ली बच्ची को जिंदा दफन किया

भारत इकलौता ऐसा देश है जहां देवी की पूजा की जाती है तो दूसरी तरफ यहां अपनी बेटियों को मार दिया जाता है।

अगर आपको उपर की पढ़ी लाइन ने आपको झकझोरा हो तो आप नीचे की ओडिशा के जाजपुर जिले की ये कहानी पढ़कर सन्न रह जाएंगे।

रिर्पोट्स के अनुसार, 6 घंटे की नवजात बच्ची को उसके माता पिता ने दफन कर दिया। उसके सर को पहले गड्ढे में डाला गया लेकन पूरे शरीर को नहीं। इससे आप सोच सकते हैं कि ये कितना घिनौना कृत्य होगा।

उसके साथ कया हुआ?

जिस तरह से उसे दफन कर दिया गया था, उसकी जान दो मिनट में भी जा सकती थी लेकिन कहते हैं ना जहां शैतान है वहां भगवान भी है।

वहां से गुजर रहे कुछ लोगों ने बेबी के पैर को देखा। जाजपुर जिले के निवासी श्यामसुदरपुर ने उसे जिंदा निकाला औऱ पास के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में ले गए।अब बच्ची की हालत स्थिर है

इधर नवरात्री में देवी की पूजा..और उधर तुरंत जन्म ली बच्ची को जिंदा दफन किया

यहां तक की गांव वाले जब उसे बाहर निकाल रहे थे तो जोर जोर से रो रही थी मतलब साफ था कि उसकी सांस चल रही थी और वो महसूस कर पा रही थी

बचाने वालों के लिए भयावह था ये दृष्य

इस घटना के हीरो आलोक रंजन राउत जिसने बच्ची को बचाया उन्होने मीडिया से बातचीत में बताया कि कैसे बच्ची का गड्ढे के बाहर पैर देखखर उन्होंने समझ लिया कि वहां कोई छोटा बच्चा है जो जिंदा है।

“मैदान के गड्ढे में एक छोटे से बच्चे का पैर दिख रहा था। हम सब वहां पहुंचा और बच्ची को वहां से निकाला।“ उन्होंने बताया कि “बच्ची को सर के भार दफनाने की कोशिश की गई। हमने बच्ची का पैर देखकर समझ लिया था कि वो जिंदा है।“

कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के मेडिकल ऑफिसर ने कहा कि बच्ची कुछ घंटो की थी जब उसे यहां लाया गया था और काफी गंभीर हालत थी।

चिंतामणी मिश्रा ने बताया कि “अंजिरा पंचायत का एक आशा वर्कर बच्ची को लेकर आया था। बच्ची कुछ घंटे पहली ही जन्म ली थी और काफी गंभीर हालत में थी। हमने तुरंत उसका उपचार शुरू किया और अब उसकी हालत स्थिर है। “

धाऋत्री के माता पिता फरार

सेंटर के कर्मचारियों ने बच्ची का नाम धाऋत्री रखा है जो एक संस्कृत शब्द है और इसका मतलब धरती होता है। पुलिस फिलहाल केस की जांच कर रहे हैं क्योंकि ये सीधी तरह से कन्या भ्रूण हत्या का केस है।

एक लीडिंग इंटरनेशनल डेली ने बच्ची को बचाने का वीडियो रिलीज किया था। इस विचलित कर देने वाले वीडियो को देखकर पता चलता है कि मानवता वाकई खत्म हो गई है और हमारे देश में आज भी लड़िकयों को बोझ की नजरों से देखा जाता है। भले ये भयानक हादसा गांव में हुआ हो लेकिन शहर में भी पैरेंट्स बेटियों की जगह बेटों को तरजीह देते हैं।

भारतीय अभी भी बेटों को देते हैं तरज़ीह

Indian Human Delopmenr Survey , University of Maryland और National Council of के ज्वाइंट रिर्पोट की माने तो आज भी ज्यादातर भारतीय बेटे की चाहत रखते हैं।

बेटा Vs बेटी
सर्वे की माने तो ज्यादातर भारतीय कम से कम एक बेटी जरूर चाहते हैं।

  • 73 प्रतिशत भारतीयों ने माना की वो एक बेटी अवश्य चाहते है।
  • 11 प्रतिशत भारतीय दो बेटियों की चाहत रखते हैं
  • 60 प्रतिशत भारतीय एक बेटे की चाहत रखते हैं

सर्वे एक छोटा सा तरीका था ये पता करने की बेटियों को लेकर सोच है और ये एक ऐसी सच्चाई है जिसके साथ भारत जी रहा है।

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Source: theindusparent

Written by

Deepshikha Punj