आप बच्चे को ना पीटते हों लेकिन इमोशनल अत्याचार तो नहीं कर रहे ?

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जब बात बच्चों की आती है तो कई बार शब्द आपके एक्शन से ज्यादा दुख दे जाते हैं।

"क्या आप मुझसे प्यार नहीं करते बाबा? क्या आप इतनी सी चीज मेरे लिए नहीं कर सकते?" मेरी दोस्त ने अपनी चार साल की बेटी को कम से कम 10 बार ये बातें टीवी रिमोट लेने की वजह से कही। 

आखिरी 10 मिनट में उसने कम से कम 5 अलग अलग तरीके अपनाए ताकि वो एक छोटी सी चीज उससे ले सकें। लेकिन फिर भी नहीं सुनी तो उसने कहा कि "पापा को आने दो फिर 10 दिनों तक टीवी नहीं देखने मिलेगा।"

आखिरकार उसे सख्ती के साथ अपनी बेटी के सामने आना ही पड़ा क्योंकि इसके बिना वो नहीं सुन रही थी। "ये हमेशा होता है,वो टीवी के लिए कुछ भी कर सकती है।"

उसने शायद ध्यान नहीं दिया लेकिन उसकी बेटी पीछे खड़ी अपनी मम्मी की बातें सुन रही थी। हम हमेशा सोचते हैं कि कुछ अगर शारीरिक तकलीफ  दे जिस वजह किसी तरह के निशान शरीर पर दिखे तो वही प्रताड़ना होती हैं। लेकिन जब बात बच्चों की आती है तो कई बार शब्द आपके एक्शन से ज्यादा दुख दे जाते हैं।

एक दुख पहुंचाने वाली बात आप अपने पांच साल के बच्चे से करते हैं और उनका नाकारात्मक असर उनपर ज्यादा होता है बजाय की आप उन्हें पार्टी में शैतानी करने पर धीरे से चपत लगा दें। यहां हम आपको चार कारण बता रहे कि कैसे आप अपने बच्चों के इमोशनली प्रताड़ित करते हैं और अधिक संभावना इस बात की है आपको इनके बारे में पता भी नहीं होगा।

1. परिवार या दोस्तों के सामने आलोचना

हम भारतीय पैरेंट्स अक्सर अपने बच्चों की खुबियों के बारे में घर आए मेहमानों को बताते रहते हैं और अगर वो ऐसा ना करें तो हम उन्हें कई बार कई दुखी करने वाली बातें कह जाते हैं। ज्यादातर हम मेहमानों के सामने डांट देते हैं, ऐसे में बच्चे अपेक्षित महसूस करने लग जाते हैं।

एक और गलती जो हम अक्सर करते हैं वो ये कि हम बच्चों के साथ बिल्कुल छोटे बच्चे की तरह व्यवहार करते हैं।जबकि हम जानते हैं कि वो सबकुछ समझते हैं कि हम क्या मजाक कर रहे  या कमेंट पास कर रहे हैं।

 
child आप बच्चे को ना पीटते हों लेकिन इमोशनल अत्याचार तो नहीं कर रहे ?

देखो, वो कैसे ऐसा कर रही है? तुम क्यों उसके जैसी नहीं बन सकती?" हम अक्सर बच्चों के सामने ऐसी चीजें कह जाते हैं लेकिन इससे हम उन्हें कम आंकने की कोशिश करते हैं।चलिए मैं ही आपसे पूछती हूं कि आप उसकी जगह पर होती तो कैसा लगता।

2. धमकी या भवनात्मक रूप से ब्लैकमेल करना

कितनी बार आपने अपने बच्चे को बोला है कि अगर तुमने अभी ऐसा नहीं किया तो डैडी को पिटाई करने बोलूंगी या अपना होमवर्क करो नहीं तो थप्पड़ मारूंगीया फिर ये कि "अगर तुम मेरी बात मानोगे तो एक घंटे के लिए टीवी देखने दूंगी।

मैं अगर गलत नहीं हूं तो हमेशा तो नहीं लेकिन कई बार पैरेंट्स ऐसा करते हैं। ये कुछ और नहीं बल्कि अपने बच्चों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है कि पैरेंट्स को खुश करने के लिए कुछ करना पड़ेगा।

3. वो क्या कहना चाह रहे हैं इसपर ध्यान नहीं देना

हमें अपने बच्चों को बताने के लिए कई बातें होती हैं मिट्टी से मत खेलो,खाने से पहले अपने हाथ धो लो, बिना टीचर को बताए क्लास से नहीं जाना है, जब टीजर बोल रहे हैं तो मत बोलना हम उन्हें दिन भर में लाखों बातें बता देते हैं।

लेकिन कितनी बार खुद ध्यान दिया है कि बच्चे क्या कहना चाह रहे हैं? मुझे कहने की जरूरत नहीं है कि बच्चे आपके सामने जितना सहज रहेंगे उतना ज्यादा खुलेंगे और इसका तरीका है आप उन्हें उनकी बात कहने दें।अगर ऐसा नहीं करेंगे तो वो अपेक्षित महसूस करेगें जिसका उनपर मनोवैज्ञानिक असर पड़ेगा और वो आपसे बातें भी छिपाएंगे।

4. बच्चों को डांटना या चिल्लाना

मैं कभी अपने बच्चे पर हाथ नहीं उठाती। मेरी कोशिश होती है कि वो समझ जाए कि बिना हाथ उठाए मैं उसे क्या कहना चाह रही हूं मेरी दोस्त ने कहा। लेकिन तुम ऐसा कैसे करती हो? मैंने उससे पूछा।

कुछ नहीं यार, गुस्सा आता है तो डांट देती हूं और जब मैं ऐसा करती हूं वो समझ जाता है कि मैं क्या कहना चाह रही हूं।" जवाब में मेरी दोस्त ने ये बातें बड़े गर्व से कहीं।

मुझे अपनी दोस्त और उसके बेटे के लिए बुरा लगा। चिल्लाना, डांटना या कोई ऐसा शारीरिक संकेत जो इशारा करे कि आप गुस्सा में हैं ये आपके बच्चे को इमोशनली चोट पहुंचाती है। इस बात की संभावना ज्यादा है कि रोज रोज डांटने चिल्लाने की जगह एक बार थप्पड़ मार दें।

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Source: theindusparent