आपका शिशु नहाते वक्त रोता है...इसके पीछे कहीं आप तो जिम्मेदार नहीं? जानिए आखिर कहां हो रही है गलती

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स्नान करना एक बच्चे या शिशु के लिए बड़ा ही रिलैक्सिंग अनुभव होना चाहिए ना कि उन्हें रोज़ की इस प्रक्रिया से तनाव या तक़लीफ महसूस हो।

नवज़ात शिशु को नहाने की जिम्मेदारी ज्यादातर मांऐं नहीं लेना चाहती। उन्हें छोटे से शिशु को संभालने की कला सीखने में थोड़ा वक्त लग जाता है। इसलिए इस कार्य के लिए वो घर के किसी जिम्मेदार सदस्य या फिर आया को ही रखती हैं।

हालांकि आप जितनी ज़ल्दी इसके तौर-तरीके सीख लेंगी आपको उतना ही आनंद मिलेगा। अधिकांश बच्चे हल्के गुनगुने पानी से नहाना पसंद करते हैं ।लेकिन अधिक गर्मी के मौसम में आप नार्मल पानी का इस्तेमाल करें।

सर्दी के मौसम में आपको बड़ी ही सावधानी से तापमान की जांच कर स्नान कराना चाहिए। ऐसा देखा गया है कि शरीर के नीचले अंगों से नहलाना शुरु करने से शिशु इस प्रक्रिया का आनंद लेने लगता है और अचानक रोता भी नहीं है। साबुन या बॉडी वॉश लगाने के बाद सावधानी से शिशु को पकड़ कर रखें चिकनाई के कारण उनके फिसलकर गिरने का खतरा रहता है ।

करें सही समय का चुनाव

नवज़ात शिशु को नहाने के लिए एक समय तय कर लेना उचित रहता है। ध्यान रहे कि आपको रोज़ ही उसी समय पर शिशु को स्नान कराना है। समय में फेरबदल करने से शिशु का कम्फर्ट लेवल कम हो सकता है और जुक़ाम आदि की समस्या भी होने की संभावनाएं रहती हैं।

सही उत्पाद का चुनाव

हर शिशु के त्वचा की डिमांड अलग रहती है। जहां तक नवज़ात शिशु की बात की जाए तो उनके नाज़ुक अंगों को संज़ीदगी से साफ करने के लिए बेस्ट प्रोडक्ट का चुनाव करें। इस मामले में आप डॉक्टर की सलाह ले सकती हैं।

नहाने से पूर्व मालिश है ज़रुरी

मालिश करने से शिशु की थकावट कम हो जाती है और उसके मांसपेशियों में रक्त का संचार अच्छे से होता है। बच्चे में चुस्ती और स्फुर्ति लाने के लिए नहाने से पूर्व तेल की मालिश बेहद आवश्यक है। इससे नहाने के बाद शिशु को सुकुन भरी नींद आएगी ।

पेट भरा होगा तो कम रोऐंगे बच्चे

मालिश के बाद या पहले ही शिशु को फीड कराएं अगर शिशु की उम्र 6-18 माह तक है तो उसे सॉलिड फूड दें। ऐसा करने से वो नहाने के तुरंत बाद अगर सोना चाहे तो आपको उसके भूखे सोने की चिंता नहीं रहेगी। पेट भरा रहने से बच्चे नहाने के दौरान ज्यादा खुश दिखाई देते हैं।

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StockSnap / Pixabay

स्पंज स्नान या बाथ टब

छोटे शिशु को आप भले ही स्पंज स्नान करा रही हों लेकिन शिशु में ऊर्जा भरने और उसके संपूर्ण विकास के लिए बाथ-टब वाला स्नान ही सटीक है। इससे मां और शिशु के बीच का भावनात्मक रिश्ता और भी मज़बूत होता है।

रोज़ के स्नान को कैसे बनाएं एक फन एक्सपीरिएंस

जैसे-जैसे शिशु बड़ा होने लगता है आपका दायित्व है कि उसे खेल-खेल में सीखने की आदत डालें। इस तरह उसका ध्यान भटकाना या उसे बहलाना भी आसान हो जाता है। 1-2 वर्ष के बच्चे को नहाते वक्त किन बातों का रखें ख्याल आईए जानें….

  • अच्छी खुशबू वाले शैंपू या साबुन का इस्तेमाल करें
  • पानी के साथ छप-छपाक करना सिखाएं
  • खेल-खेल में उसे अंगों के नाम याद कराएं
  • उसके पसंद की राईम्स या गाना गाएं
  • उसे खुद से नहाने को कहें, उसे मज़ा आएगा
  • आप उसके लिए गाना प्ले भी कर सकती हैं
  • बाथरुम में इस्तेमाल होने वाली चीजों से उसका परिचय कराएं
  • नहाने के बाद शिशु को टॉवेल से खेलने दें आप गौर करेंगी की आपका बच्चा आईने में खुद को तौलिए में लिपटा देख किलकारियां मार रहा है ।

इन सारी बातों पर अमल करने से आपका शिशु नहाने के दौरान रोना भूल जाएगा और इसतरह उसे भी आपके साथ रोज़ क्वालिटी टाईम बिताने का इंतज़ार रहेगा ।