आजमाए उपाय...कैसे बिना पिटाई के बच्चों को सिखाएं अनुशासन

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किसी भी तरह से पिटाई या शरीर को कष्ट पहुंचाने वाली सजा मम्मी -पापा को सिवाय पछतावा, गुस्सा या तनाव के कुछ नहीं देता

कोई भी माता-पिता कितने भी अच्छे और स्मार्टनेस के साथ बच्चों का पालन पोषण कर रहे हों लेकिन ऐसा समय आता ही है जब अच्छे से अच्छे पैरेंट्स भी अपना धैर्य खो देते हैं। किसी को भी शरारती या गलत व्यवहार करने वाले बच्चे पसंद नहीं आते और ना कोई चाहता है कि उनके बच्चे ऐसे हों।

किसी भी तरह से पिटाई या शरीर को कष्ट पहुंचाने वाली सजा मम्मी -पापा को सिवाय पछतावा, गुस्सा या तनाव के कुछ नहीं देता। वास्तव में ये पूरा अनुशासित रखने का तरीका बच्चों से ज्यादा पैरेंट्स को तनाव में ला सकता है।

परवरिश की इस समस्या कि बच्चों की बिना पिटाई किए या सख्ती बरते कैसे अनुशासित रहना सिखाया जा सके इस समस्या का समाधान है। आगे पढ़िए 5 आजमाए उपाय कि कैसे बच्चों को अनुशासित रहना सिखाया जाए वो भी बिना सख्ती बरते और खासकर पिटाई किए।

कैसे बिना पिटाई के बच्चों को पढ़ाएं अनुशासन का पाठ

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1. टाइम-आउट
कभी कभी अच्छे से अच्छे पैरेंट्स भी स्थिति को संभाल नहीं पाते हैं। बिना कोई ऐसा रिएक्शन दिए जो बच्चों के लिए सही साबित ना हो हमेशा खुद पर काबू रखें और टाइम आउट लें।

टाइम आउट का मतलब कुछ समय के लिए बच्चों से बिल्कुल भी बात नहीं करना। यहां इसके पीछे उददेश्य सिर्फ इतना है कि बच्चा और माता-पिता थोड़ी देर के लिए एक दूसरे से अलग रहें ताकि स्थिति आगे खराब ना हो।

आपको भी कभी अचानक से गुस्सा आता होगा और बस किसी तरह गुस्से पर कंट्रोल करना चाहती होंगी तो हम आपको दे रहे हैं ऐसा करने के कुछ टिप्स

  •   कुछ मिनटों के लिए अपने बच्चे से दूरी बना लें।
  •    कुछ देर के लिए बिल्कुल शांत रहें और कुछ और काम में जुट जाएं।
  •   अपने बच्चे को कुछ देर के लिए कोने में खड़े होने के लिए कहें।
  •   अपनी भावनाओं को लिखें।


2. उचित सजा दें

बच्चों के सजा हमेशा सोच समझकर दें ताकि उन्हें अपनी गलती का एहसास हो। जैसे उन्हें साइकिल करना पसंद है तो कुछ दिनों के लिए साइकिल चलाने से मना कर दें। ये किसी भी शारीरिक सजा से ज्यादा बेहतर होगा क्योंकि बच्चों को अगली बार डर होगा कि वो उसी गलती को फिर से दोहराएंगे तो उनके फेवरिट काम को नहीं करने दिया जाएगा।

3. बच्चों को लिखने बोलें

बच्चों और आपके बीच कभी किसी तरह Communication gap नहीं होना चाहिए चाहे बच्चा कितना भी छोटा हो। बच्चों को चीजें काफी कम उम्र से समझ में आती हैं।

जब भी वो कुछ गलत या बुरा व्यवहार करें उन्हें बैठकर कुछ लाइनों में सॉरी लिखने बोलें। बच्चों को ये लिखने में काफी दिक्कत आएगी, उन्हें मुश्किल भी लगेगा लेकिन जैसे ही वो कुछ लाइन लिखेगा उसे अपनी गलती का एहसास होगा। उन्होंने सच में गलती की है।

4. टाइमलाइम सेट करें

हमेशा टाइम आउट के बाद बच्चों से बैठकर इत्मिनान से बात करें। उन्हें बताएं कि अगली बार गलती हुई आप उन्हैं कैसी सजा मिलेगी और अगली बार वो गलती हो तो वो सजा जरुर दें।

5. काम दें

जब भी बच्चें कुछ गलत करें तो उन्हें कुछ ऐसे बोरिंग काम करने दें जो उन्हें पसंद ना आए। जैसे घर का कोई काम जो उन्हें करने में अच्छा ना लगें और यही उनके लिए काफी होगा। 

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Source: theindusparent