“अपने पति के बेस्ट फ्रेंड के साथ..मैंने जिंदगी के सबसे बेस्ट सेक्स का लुत्फ उठाया”

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ऐसा नहीं है कि हमारे बीच सेक्स नहीं है लेकिन वो भी बस मेरे पति की वासना को खत्म करने के लिए है। हमारे बीच रोमांस जैसे अचानक किस, गले लगाना, कॉम्पिलमेंट देने जैसी चीजें नहीं रह गई है जिसकी मैं कमी महसूस करती हूं।

मेरी शादी को लगभग 10 साल हो चुके हैं।एक दशक बीत गए और अब मेरे दो बच्चे हैं। मेरी शादी बिल्कुल वैसी है जैसी इस समय में उम्मीद की जानी चाहिए..रूटीन फॉलो करना और नीरस।

सबसे पहले मैं बता दूं कि मैं और मेरे पति कई सालों से जिम्मेदारियों के बोझ तले इतने व्यस्त हैं कि शायद ही हम एक दूसरे के लिए समय निकाल पाते हैं। एक अंतराल के बाद मैंने सबकुछ फिर से ठीक करने की कोशिश भी की। ऐसा नहीं है कि हमारे बीच सेक्स नहीं है लेकिन वो भी बस मेरे पति की वासना को खत्म करने के लिए है। हमारे बीच रोमांस जैसे अचानक किस, गले लगाना, कॉम्पिलमेंट देने जैसी चीजें नहीं रह गई है जिसकी मैं कमी महसूस करती हूं।

मैं सेक्सी कपड़े भी पहनी..

क्या साथ बैठकर पोर्न देखना अच्छा आइडिया है? कई बार ऐसा मौका आया जब मैंने इस अंतर को खत्म करने की कोशिश की । मैंने कमरे में फूल और रंगबिरंगी मोमबत्तियां भी सजाई ताकि वो मेरे इशारे को समझ सकें। मैं मानती हूं कि इन सबको छोड़ मैंने अपने पति को सिड्यूस करने की कोशिश नहीं कि क्योंकि मेरे ख्यालात थोड़े पुराने हैं। मैं कभी भी अपनी जरूरतों की मांग नहीं करती।

इसे मिडिल क्लास भारतीय पालन पोषण कह लें या कुछ और लेकिन मुझे नहीं पता कि अगर मैं किचन की जगह अपने बेड को कंट्रोल में लेने की कोशिश करती तो मेरे पति सरप्राइज होने की जगह शॉक्ड हो जाते या उनका कुछ और रिएक्शन होता।

पिछले साल कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद मैं आश्चर्यचकित रह गई। जिस विश्वास के साथ मैं बड़ी हुई थी वो भी खत्म होता दिख रहा था। मुझे पता चला कि एक इंटरनेशनल ट्रिप पर मेरे पति ने हमारे नीरस लेकिन मजबूत बॉन्डिंग को भी तोड़ दिया। इंटरनेशनल ट्रिप के दौरान उनकी मुलाकात होटल बार में एक लड़की के साथ हुई जिसके साथ वन नाइट स्टैंड भी लिया था। मुझे इसके बारे में नहीं पता चलता अगर वो अपने सामान में पुरुषों का रक्षात्मक कवच नहीं छोड़ देते।

मुझे बाई जैसा एहसास होता था..

 
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सामान को निकालने के दौरान मुझे एक बाई सा एहसास हो रहा था जो अपने मालिक के सारे गंदे सीक्रेट जानती हैं। कई घंटो तक रोने, खुद को कोसने के बाद मैंने इस बारे में पूछ लिया और मुझे बिल्कुल ठंढा और रुखा जवाब मिला कि – मुझे माफ कर दो ये मेरा पहली और आखिरी बार था। अपनी बड़ी हो रही बेटियों की खातिर हमें इस बारे में बात नहीं करनी चाहिए।

मैंने इस बारे में कभी बात नहीं की। बात करने का कोई मतलब भी नहीं था। चाहे ये पहली बार हुआ हो या इसके बाद भी हो लेकिन सच्चाई ये था कि ये हुआ।

मुझे कायर कह लीजिए या कुछ और लेकिन मैं इस शादी में रही। मुझे नहीं पता था कि मैं अपनी बेटियों और दुनिया के सामने ये सच्चाई कैसे बताई जाए। मैंने इस सच्चाई को स्वीकार कर लिया कि मेरी जिंदगी सिर्फ बोरिंग नहीं बल्कि कड़वी भी हो गई है। मैं अवसाद में भी चली गई और बिना पति के सपोर्ट के इससे बाहर आई। उन्होंने हमेशा ऐसा व्यवहार किया जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो जबकि मैं हर दिन इस भयावह एहसास के साथ जीती रही।

एक साल के दरम्यान कुछ महीनों पहले मैं एक शख्स के सामने खुद को रोक नहीं पाई और उसे अपनी खोखली शादी के बारे में सबकुछ बताया। ये मेरे पति के बेस्ट फ्रेंड है। मान लीजिए कि ये A हैं।

वो अक्सर हमारे घर आते रहते हैं।मेरे पति नहीं होते थे तो भी बच्चों को साथ ले जाते थे। कभी कभी हम A और मैं अपने बच्चों के इंतजार में घंटो कॉफी शॉप में भी बैठते थे। धीरे धीरे हम दोस्त बन गए।

मुझे रोने के लिए एक कंधे की जरूरत थी..

 
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अब तक हमारा बस इतना सीक्रेट था कि मेरे पति के नहीं होने पर भी वो आया करते थे। लेकिन एक दिन मुझे सच में रोने के लिए एक कंधे की जरूरत थी और A मेरी जिंदगी में उस वक्त आए। वो ना सिर्फ मेरी दुख भरी कहानी सुने बल्कि ये भी बताया कि मैं कितनी आकर्षक लगती थी और मेरे पति ये नहीं समझ पा रहे थे।

मुझे लगता है कि उन्होंने झूठ बोला लेकिन मुझे अच्छा लगा। मैं और रोई और आखिरकार उन्होंने स्वीकार किया कि वो मुझसे आकर्षित थे और मैंने भी भावनाओं को आत्मसात कर लिया।

उस दिन इससे भी ज्यादा हुआ। हमने सारी रुकावटों को खत्म किया और बिल्कुल बिंदास, वाइल्ड, ग्लानिहीन और संतोषजनक रूप से एक दूसरे के साथ इंटिमेट हुए। वो बाद में रात में चले गए लेकिन मैं बिल्कुल भी अपराधबोध से ग्रसित नहीं थी बल्कि मुझे अच्छा लग रहा था। अपने पति के साथ दोषी की तरह बात करने के बजाय मैंने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ बात किया। मैं खुद के लिए तैयार होने लगी...या A के लिए मुझे नहीं पता लेकिन ये बहुत ही अच्छी फीलिंग थी।

लंबे समय के बाद मैं खुद को लेकर खुश थी। उस दिन के बाद से मैं A से अकेले में नहीं मिली। जी हां..आपने बिल्कुल सही समझा मेरे पति भी उसके बाद से ट्रिप पर नहीं जाने लगे।

मैं अपराधबोध से ग्रसित नहीं..

ईमानदारी से बताऊं तो मैं चीटिंग करती वाइफ का एक एपिसोड और चाहती हूं। मैं खुद से नफरत करती हूं कि मैं अपराधबोध से ग्रसित नहीं हूं। क्या ये इसलिए है कि क्योंकि मैंने बदले की भावना के लिए सेक्स किया था? सच्चाई ये है कि A सिंगल है और ये बात मेरे बोझ को काफी हदतक घटा देता है। मैं इस बात से इंकार नहीं कर सकती कि ये मेरी जिंदगी का सबसे घिनौना सच है और मुझे इसके साथ आगे बढ़ना होगा ।

मुझे सलाह की जरूरत है..क्या मुझे अपने रोमांस को फिर से जिंदा करना चाहिए ताकि मैं एक बार फिर अवसाद में चली जाऊं या फिर इस रिश्ते का बोझ उठाते रहूं।

अनुरोध करने पर लेखिका का नाम नहीं बताया गया है

Source: theindusparent