अपने ओव्यूलेशन टाईम को समझ कर आप आसानी से गर्भवती हो सकती हैं...जानिए कैसे

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बांकि दिनों की अपेक्षा इस दौरान आपके शरीर का तापमान बढ़ा होता है । जांचने के लिए कुछ दिन पहले से रोज़ सुबह उठते ही तापमान लेकर नोट करें ।

एक औरत के लिए मां बनने का सुख प्राप्त करना बेहद खूबसूरत अनुभव होता है । मातृत्व का ये एहसास अपने आप में इतना अलौकिक होता है कि इसकी कल्पना प्राय: हर शादीशुदा स्त्री अपने जीवन में निश्चित रुप से करती है ।

यूं तो अधिकांश महिलाएं बिना किसी तनाव के ही अपनी इच्छानुसार गर्भधारण कर लेती हैं लेकिन कुछ ऐसी भी हैं जिनको इसके लिए कठिन प्रयास करना होता है । मेरा ये लेख उन सभी दंपतियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जो संतान की इच्छा रखते हैं ।

हालांकि आपमें से कई ऐसी भी महिलाएं हैं जिन्हें ये जानने में अधिक दिलचस्पी होगी कि पार्टनर के साथ संबंध बनाना किन दिनों सबसे अधिक सुरक्षित होता है । खैर, प्रेगनेंट होने के लिए या इससे बचने के लिए दोनों ही स्थिति में डिंबोत्सर्जन यानि ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को समझना आपके लिए आवश्यक है ।  

सबसे पहले बड़े ही आसान लहज़े में ये जानिए कि ओव्यूलेशन होता क्या है और गर्भधारण में इसकी भूमिका क्या होती है...

डिंबोत्सर्जन महिलाओं के प्रजनन चक्र का ही एक भाग है । इस दौरान ओवरी से एक अंडा बाहर निकल कर फेलोपियन ट्युब में जाता है । जहां 12-24 घंटे के भीतर अगर इसका मिलन स्वस्थ स्पर्म (शुक्राणु) से हो जाए तो ये निषेचित यानि ऐग फर्टिलाइज्ड हो जाता है ।

निषेचित होने के बाद फीमेल ऐग गर्भाशय में जा कर सेटल हो जाता है जिससे कई तरह के हार्मोन का विकास होने लगता है जिसके फलस्वरुप मासिक धर्म रुक जाएगा इसतरह आप गर्भवती हो जाती हैं ।

अब आपके मन में ये सवाल रहा होगा कि तय समय सीमा के भीतर अगर शुक्राणु नहीं मिला तो क्या होगा...दरअसल तब फीमेल ऐग निषेचित होने योग्य नहीं रह जाता तो पीरियड के दौरान निकलने वाले गर्भाशय की परतों के साथ अनिषेचित ऐग भी हमारे शरीर से बाहर निकल जाता है ।

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कैसे पता करें अपना ओव्यूलेशन टाईम  

गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए ओव्यूलेशन टाईम का सही आंकलन करना और इसी दौरान संबंध बनाना जरुरी होता है । माहवारी चक्र के आधार पर ही इसका पता लगाया जाता है ।

  • ये जरुरी नहीं कि हर महिला का मासिक धर्म नियमित हो इसलिए हर किसी का ओव्यूलेशन पीरियड अलग होता है । कई बार अलग-अलग महिलाओं के माहवारी चक्र में 7 दिनों का अंतर होता है ।
  • नियमित मासिक धर्म की स्थिति में, पीरिएड के अगले 12वें दिन से 16वें दिन तक ओव्यूलेशन पीरियड होता है वहीं अगर अनियमित माहवारी हो तो गर्भधारण के लिए निश्चित दिन पता करना कठिन हो जाता है ।
  • लेकिन इसमें आप खुद ही अपनी मदद कर सकती हैं । मासिक धर्म आने के अगले 14वें दिन आप सबसे अधिक जननक्षम होंगी ।
  • जैसे मान लीजिए कि अगर 28 दिन के मासिक चक्र में महीने के 1-7 तारीख के बीच आपका पीरियड वाला टाईम होता है तो दिनांक 8 से लेकर 11 तारीख के दौरान आपके गर्भाशय की परतें ऐग रिलीज़ करने के लिए खुद को तैयार करती है ।
  • इसतरह 12 , 13 तारीख़ के साथ ही 14 तारीख़ को ओव्यूलेशन का टाईम होगा ।
  • इस दिन संबंध स्थापित करने से गर्भधारण की बहुत अधिक संभावना होगी । अगर फीमेल ऐग निषेचित नहीं हो सका तो फिर धीरे-धीरे चीजें सामान्य रुप से चलती हैं और फिर 26-28 ताऱीख तक गर्भाशय की परतें और अनिशेषिच अंडे पीरियड के दौरान बाहर निकल जाते हैं ।

ओव्यूलेशन के अन्य लक्षण क्या हैं

अंडोत्सर्ग के सही समय को जानने के लिए आपको अपने शरीर में हो रहे बदलाव पर नज़र रखना होगा । एक बार आप मासिक धर्म के 12वें दिन से 16वें दिन तक के वैजाइनल डिस्चार्ज को परख कर देखिए । इसमें हो रहे बदलाव ओवल्यूशन पीरियड का सटीक संकेत दे सकते हैं ।

क्योंकि बांकि दिनों की अपेक्षा इस दौरान स्त्राव में गाढापन बढ़ जाता है । हाथ से छूने पर चिपचिपा लगने की बजाए ये चिकनाई वाला लगता है जिसे खींचा जा सकता है ।

बांकि दिनों की अपेक्षा इस दौरान आपके शरीर का तापमान बढ़ा होता है । जांचने के लिए कुछ दिन पहले से रोज़ सुबह उठते ही तापमान लेकर नोट करें ।

ये फर्टाइल फेज़ होता है जिसमें यौन संबंध बनाने की इच्छा तीव्र होती है ।

इसके अलावा ओव्यूलेशन जांचने के उपकरण का इस्तेमाल करने से आपको अंडोत्सर्ग होने के 12-24 घंटे पूर्व ही मालूम हो जाएगा । ये उपकरण यूरीन में ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन का लेवल पता कर के ओव्यूलेशन की जानकारी देता है ।