अपनी बेटी के पैर तोड़ना चाहते थे संजय दत्त... कारण सुन चौक जाएंगे आप

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हाल की ही बात है जब ऑन स्क्रीन मुन्ना भाई और खलनायक संजय दत्त ने ये माना कि वो अपनी बेटी त्रिशाला की टांगे तोड़ देना चाहते थे जब उन्हें पता चला कि...

ज्यादातर पैरेंट्स आज भी बच्चों को मारपीट कर अनुशासन में रखने में विश्वास करते हैं। इसमें कोई हैरानी वाली बात नही है कि अगर कुछ सेलिब्रिटी पैरेंट्स भी इसमें विश्वास करते हैं। कई ऐसे भी हैं जिन्होंने सीधे तौर इसे माना है।
जी हां बिल्कुल सही पढ़ा आपने।

हाल की ही बात है जब ऑन स्क्रीन मुन्ना भाई और खलनायक संजय दत्त ने ये माना कि वो अपनी बेटी त्रिशाला की टांगे तोड़ देना चाहते थे जब उन्हें पता चला कि वो फिल्मों में आना चाहती है।

"मैंने उसे अच्छे कॉलेज में डालने में बहुत मेहनत की"

 

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अब संजय दत्त अपना कमबैक भूमि फिल्म से कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि उन्हें त्रिशाला का बॉलीवु़ड में आने का फैसला बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। उन्हें इतना गुस्सा आया कि वो उसके पैर तोड़ देना चाहते थे।
 
"मैंने अपना कापी समय और एनर्जी त्रिशाला को अच्छे कॉलेज में डालने के लिए लगाया और उसने उसमें बहुत अच्छा किया। उलने फॉरेंसिक साइंस में स्पेशलाइजेशन किया है और मुझे लगता है कि ये बहुत अच्छी फील्ड है।" संजय दत्त ने PTI से बाचतीच में ये बातें की।

मुन्ना भाई MBBS के इस एक्टर ने एक्टर बनने पर परेशानियों के बारे में भी बताया और कहा कि क्यों उन्हें लगता है कि उनकी बेटी के लिए बॉलीवुड के रास्ते आसान नहीं होंगे।उन्हें ऐसा लगता है कि वो यहां अच्छा नहीं कर पाएंगी। इसलिए क्योंकि वो US में पली बढ़ी हैं और उनका लहजा भी (Accent)भी पूरी तरह अमेरिकन है।
संजय दत्त ने कहा कि "अगर वो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को ज्वाइन भी करना चाहेगी तो उसे अच्छे से हिंदी सीखनी होगी क्योंकि अमेरिकी एक्सेंट यहां नहीं चल पाएगा।"
जब संजय दत्त से ये पूछा गया कि उनकी ऑनस्क्रीन बेटी और रियललाइफ बेटी में क्या समानताएं है उन्होंने कहा कि "मेरी ऑनस्क्रीन और ऑफस्क्रीन बेटी में समानताएं है लेकिन त्रिशाला के मैं पैर तोड़ना चाहता था लेकिन यहां फिल्म में ऐसा नहीं कर सकता"।

"प्यार करने के साथ संजय दत्त हैं Strict पैरेंट"

अपने पिता के पैरेंटिग स्टाइल पर त्रिशाला ने एक इंटरव्यू में कहा था कि "एक बात जो मैं उनके बारे में बता सकती हूं कि मैंने उनसे सीखा है वो ये कि नहीं मतलब नहीं होता है और इसके बाद कोई सवाल जबाब का चांस नहीं रह जाता।वो बहुत प्यार करते हैं और कूल भी हैं लेकिन साथ ही वो काफी स्ट्रिक्ट भी हैं। वो थोड़े जिद्दी हैं और मैं भी।" हम दोनों के वैचारिक मतभेद हो सकते हैं लेकिन हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। "

 

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28 साल की त्रिशाला की न्यूयॉर्क में हेयर एक्सटेंशन कंपनी है और अब उनकी कोई प्लानिंग बॉलीवुड में आने की नहीं है क्योंकि उन्हें लगता है कि बॉलीवुड में अब उनका कोई गॉडफादर नहीं है।

त्रिशाला का कहना है कि "बाकी स्टारकिड्स की तरह मेरे मम्मी पापा मेरी मदद के लिए नहीं है। मेरे साथ नहीं हो सकता कि मैं पापा को एक फेवर के लिए कॉल करुं जो बाकि स्टार किड्स के साथ है।ये काफी मुश्किल है कि बिना मदद के आपको सबकुछ खुद खड़ा करना है।"

त्रिशाला दत्त और संजय दत्त भले साथ ना रहते हो लेकिन उन्होंने दिखाया है कि दूर रहकर भी कैसे एक दूसरे के दिल में अपनी जगह बनानी है। दोनों एक दूसरे के पर्सनल स्पेस का ध्यान रखते हैं।हालांकि संजय दत्त की पैरेंटिग स्टाइल ज्यादातर समय  में काम नहीं आती। कई दूसरे भी तरीके होते हैं कि बिना मारपीट के आप बच्चों को अनुशासित बना सकते हैं।

इन 3 तरीकों से बिना मारपीट किए आप बच्चों को अनुशासित बना सकती हैं

बातें शेयर करें: हो सकता है कि आपने घर में जो नियम बनाया है वो बच्चे नहीं माने या उन्हें पसंद नहीं आए लेकिन पीटाई करने से भी वो नियमों को नहीं मानेंगे। इससे वो धीरे धीरे आपकीइज्जत करना बंद करेंगे। उनसे प्यार से बात कीजिए कि आखिर क्यों उन्हें ये नियम नहीं पसंद है। उनकी बातों का सम्मान करिए और कोई ऐसा रास्ता निकालिए कि दोनों उस पर सहमत हो

उन्हें व्यस्त रखें: हिंदी में एक कहावत है खाली दिमाग शैतान का घर। जिसका मतलब है वो फ्री रहेंगे तो तरह तरह की बातें सोचेंगे। हमेशा उन्हें कुछ इंटरेस्टिंग कामों में उलझाए रखें।

शांत रहें: जब भी आपको लगे कि आपका बच्चा कंट्रोल के बाहर हो रहा है उससे थोड़ी दूरी बना लें।उससे कहें कि कुछ देर के लिए वो किसी के पास ना जाए और बात ना करे। स्थिति को कंट्रोल करें उसे नहीं।इससे उसे भी अपनी गलती का एहसास होगा।

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Source: theindusparent